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मरघट भूमि की तरह जांच हो तो और निकलेगी शहर की जमीन यहीं पर बन सकते हैं सरकारी कार्यालय

पटवारियों के पास नहीं जानकारी, गोलमोल देते हैं जवाब और हो सकता है जमीन का घोटाला भास्कर न्यूज | सक्ती नगर एवं...

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 03:30 AM IST
पटवारियों के पास नहीं जानकारी, गोलमोल देते हैं जवाब और हो सकता है जमीन का घोटाला

भास्कर न्यूज | सक्ती

नगर एवं आसपास ग्रामीण क्षेत्र में शासकीय जमीन 700 एकड़ थी पर आज वह जमीन कहा गई। यह किसी को पता नहीं है, मगर ये जमीन नगर के 4 किलो मीटर के अंतर्गत पर बताई जाती है। सूत्रों के अनुसार बगबुडवा, नंदेली, हरेठी, टेमर, डोगिया, सोंठी, नगर पालिका वार्ड 1 से 18 तक लगभग 70 एकड़़ शासकीय जमीन बतायी जा रही है।

मरघट मुक्तिधाम संरक्षण समिति के सदस्यों ने संघर्ष कर मरघट भूमि के 10.40 एकड़ में से 9.70 एकड़ को भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त करा दिया है। उक्त जमीन को 1942 मिसल नक्शा के आधार पर सीमांकन एवं जांचकर 9.70 एकड़ जमीन को नगर पालिका को एसडीएम इंद्रजीत बर्मन ने खंभे गडा कर अपने कब्जे में ले लिया है। इसी प्रकार शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र में 700 एकड लगभग जमीन बड़े झाड़, छोटे झाड़, मरघट भूमि, घास जमीन, गौचर भूमि होने का अनुमान है। इन जमीनों को भी भूमाफियाओं से मरघट भूमि की तरह मुक्त कराने की आवश्यकता है। यदि ये जमीन मुक्त करा दी जाए तो जो सरकारी कार्यालय एवं निवास सक्ती से 8 किमी दूर जेठा में बनाने का निर्णय लिया जा रहा है उसे बदला जा सकता है। ये सभी कार्यालय महज इसलिए शहर से हटाए जा रहे हैं क्योंकि राजस्व अमला ने लिखकर दे दिया है कि शहर में खाली सरकारी जमीन नहीं है।