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कलियुग केवल नाम अधारा, इस उक्ति का राधाचरण ने जीवनभर पालन किया

सराईपाली|राधामाधव संकीर्तन मंडली लमकेनी के गायक गुरु राधाचरण पसायत का निधन को फुलझर क्षेत्र के संकीर्तन के लिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 18, 2018, 02:55 AM IST

सराईपाली|राधामाधव संकीर्तन मंडली लमकेनी के गायक गुरु राधाचरण पसायत का निधन को फुलझर क्षेत्र के संकीर्तन के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। बीते दिनों गौरांग जन्मोत्सव मनाने के बाद उनका निधन हो गया। 3 वर्ष की उम्र से संकीर्तन गायन में वे जुड़े और जीवन के अंतिम दिनों में भी गीता व चैतन्य चरितामृत के श्लोकों को लोगों को जाकर सुनाया।

राधाचरण पसायत की संकीर्तन गायकी में गीता के श्लोक, चैतन्य चरितामृत के श्लोक, वेणुधर ग्रंथावली की रचनाएं, चंपू, छंद, ओडिशी सहित हिंदी के शास्त्रीय भजनों का गायन और विशेषकर बंगाली भक्ति प्रसिद्ध है। उन्होंने इस क्षेत्र में साल 1943 से लेकर 2016 तक सक्रिय रूप से आध्यात्मिक चेतना का स्वर मुखरित किया। पसायत को श्रद्धांजलि देते हुए प्रयास संस्था के नरेश चंद्र अग्रवाल, अमर बग्गा, शिक्षक संघ के अजय प्रधान और कोलता समाज के अध्यक्ष मंगता प्रधान ने कहा कि उन्होंने कलियुग केवल नाम अधारा उक्ति को जीवनभर जिया और लोगों का मनोरंजन के साथ साथ भक्ति ज्ञान प्रसारित किया। उनके अथक प्रयास से राधामाधव संकीर्तन मंडली का प्रदर्शन फुलझर के क्षेत्र के लगभग सभी गांवों से लेकर बरगढ़, सम्बलपुर, पाटना, नवापारा, ओडिशा जिले से जगन्नाथपुरी, नादियानगर (पं बंगाल), वृंदावन, मथुरा, बरसाना(उप्र), राजिम, फिंगेश्वर, सिरपुर और 1992 में उज्जैन महाकुंभ में 7 दिवस का संकीर्तन करने का अवसर मिला था।

गांजर स्कूल के छात्रों मनाया हिंदू नववर्ष

गांजर| सरस्वती शिशु मंदिर गांजर में धूमधाम से हिंदू नववर्ष मनाया गया। जिसमें विद्यालय परिवार के द्वारा देव दर्शन और रैली निकाल कर सभी को शुभकामनाएं दी गई। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य रमा चंद्राकर, आचार्य हनी चंद्राकर,आचार्या संगीता साहू, संतोषी चंद्राकर, तुलेश्वरी साहू, गुंजा चंद्राकर, भावना साहू और आया कुमारी साहू मौजूद थीं।

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