--Advertisement--

नहीं है पक्की सड़क, जंगल के रास्ते जाते हैं ग्रामीण

डोंगररक्शा पहुंचने के लिए अब तक सड़क नहीं बनाई गई है। चिवराकुटा से 6 किलोमीटर दूर जंगल के रास्ते से होकर डोंगररक्शा...

Dainik Bhaskar

Mar 07, 2018, 04:00 AM IST
नहीं है पक्की सड़क, जंगल के रास्ते जाते हैं ग्रामीण
डोंगररक्शा पहुंचने के लिए अब तक सड़क नहीं बनाई गई है। चिवराकुटा से 6 किलोमीटर दूर जंगल के रास्ते से होकर डोंगररक्शा गांव जाना पड़ता है। पूर्व जनपद सदस्य व उप सरपंच रूसबु बरिहा ने बताया कि इस गांव के लोगों को बीते 5-6 साल पहले पानी और बिजली की सुविधा तो उपलब्ध कराई गई है। गांव की आबादी 325 है, जिसमें लगभग सभी बिंझवार व कोंद जनजाति है। सड़क नहीं होने के कारण लोगों को बारिश के दौरान आने-जाने में बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब गांव के लोगों का कहना है सड़क अच्छी हो जाए तो उनका बेहतर आर्थिक विकास हो सकेगा।

ये है यहां की सुविधाएं: डोंगररक्शा में प्राइमरी स्कूल है। पानी के लिए 7 हैंडपंप, सोलर नलजल है। निस्तारी के लिए एक बड़ा तालाब है। यहां महापुर (भगवान) बांध है, जिसमें पार बनाकर पानी को रोका गया है, लेकिन यह पानी सिंचाई के लिए भी उपयोग में नहीं आ रहा है। आज भी यहां के ज्यादातर लोग खेती और मजदूरी करते है। खेती के अलावा महुआ बीनने और तेंदूपत्ता संग्रहण से भी लोगों को रोजगार मिलता है।

इसलिए पड़ा डोंगररक्शा नाम: यह गांव 3 तरफ पहाड़ से घिरा हुआ है। पहाड़ी और घना जंगल होने से यहां तेंदुआ, भालू, कोटरी, साही, सांभर, जंगली सुअर और बड़ी संख्या में मधुमक्खी के छत्ते देखे जा सकते है। यहां पाया जाने वाला तोता भी अलग प्रकार का है। इस गांव पहाड़ को पार करने पर ओडिशा की सीमा लगती है। गांव के तीन ओर रक्शा पहाड़ है। इस इलाके में पहाड़ी क्षेत्र को डोंगर कहा जाता है। इसके चलते इस गांव का नाम डोंगररक्शा पड़ा है।

अनदेखी

डोंगररक्शा गांव पहुंचने के लिए चिवराकुटा से 6 किमी दूर जंगल के रास्ते से होकर जाना पड़ता है

सराईपाली. जंगल से होकर डाेंगररक्शा गांव तक पहुंचते हैं लोग।

X
नहीं है पक्की सड़क, जंगल के रास्ते जाते हैं ग्रामीण
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..