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महुआ बीनने से मिल रहा रोजगार

लंबर(सराईपाली)| महुआ की आवक शुरू हो गई है। ग्रामीण सुबह से महुआ बीनने के लिए जंगल की ओर जाते हैं. पतझड़ का मौसम शुरू...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 07, 2018, 04:00 AM IST

लंबर(सराईपाली)| महुआ की आवक शुरू हो गई है। ग्रामीण सुबह से महुआ बीनने के लिए जंगल की ओर जाते हैं. पतझड़ का मौसम शुरू होने के साथ ही महुआ के पेड़ों में फूल खिलने, झड़ने लगते हैं। क्षेत्र का प्रमुख वनोपज महुआ जंगलों मे बहुतायत में पाया जाता है। ग्रामीण, मजदूर और छोटे किसान परिवार धान कटाई, मिसाई के बाद खाली हो जाते है। ऐसे में उनके जीविका और रोजगार का नया अवसर हर वर्ष महुआ देता है। ग्रामीण महुआ के फूलों के बाद उसमें आए फलडोरी एकत्रित करते है। डोरी का उपयोग साबुन, तेल निकालने के साथ विभिन्न प्रकार के औषधि बनाने में किया जाता है। कुछ ग्रामीण इसका उपयोग शराब बनाने के लिए भी करते हैं। महुए को सुखाकर ग्रामीण परिवार सालभर सहेज कर रखते है। शुरुआती समय में महुए की कीमत 20-25 रुपए किलो होती है जो बाद में 30-40 रुपए हो जाती है।

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Web Title: महुआ बीनने से मिल रहा रोजगार
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