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वाटर हार्वेस्टिंग को कड़ाई से लागू नहीं किया तो बढ़ेगा जलसंकट

पानी की व्यवस्था और आपूर्ति को लेकर नगर पालिका की सोच व नीति को लेकर चर्चा आम लोगों में चल रही है। लोगों का कहना है...

Danik Bhaskar | Apr 06, 2018, 04:15 AM IST
पानी की व्यवस्था और आपूर्ति को लेकर नगर पालिका की सोच व नीति को लेकर चर्चा आम लोगों में चल रही है। लोगों का कहना है कि हम अपना पानी नहीं बचा पा रहे हैं और प्यास लगे तो कुआं खोदो की नीति पर चल रहे हैं। नगर में बोर के जरिए 50 से 55 लाख लीटर पानी प्रतिदिन निकाला जा रहा था। नगर पालिका ने पिछले दिनों वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया है, मगर यह कारगर ढंग से लागू नहीं किया गया है।

सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य किया गया है, लेकिन यहां पाइप लटकते तो दिखते हैं। नगर पालिका क्षेत्र में हैंडपंप है मगर सभी उपयोग नहीं लाए जा रहे हैं क्योंकि वाटर लेवल काफी नीचे चला गया है। नगरीय क्षेत्र में आज से 10 साल पहले वाटर लेवल 50 से 100 फीट तक था जो इन दिनों 800 से 900 फीट चला गया है।

जल होगा तो कल होगा: नगर पालिका क्षेत्र की आबादी 20 हजार के आसपास है। प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी की आवश्यकता के हिसाब से हर रोज 27 लाख लीटर पानी की जरूरत होती है, लेकिन दोहन इससे दोगुना हो रहा है। नगर पालिका के अधिकारियों का मानना है नगर में पानी की कमी नहीं है, इसकी समुचित व्यवस्था की आवश्यकता है, जिससे हर व्यक्ति को जरूरत के अनुसार पानी मिल सके।

जल संरक्षण और वाटर हार्वेस्टिंग के लिए कड़ाई जरूरी: 50 लाख लीटर पानी प्रतिदिन निकाला जाना भविष्य के लिए समस्या का सबब हो सकता है। पानी के मनमाने दोहन को रोकने और तालाबों का संरक्षण और गहरीकरण के साथ वाटर हार्वेस्टिंग को कड़ाई से लागू कराना होगा।

सराईपाली के तालाब भी सूखने के कगार पर।