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बांध के कैचमेंट एरिया में हो गए अवैध कब्जे, साथ ही शासकीय भवन भी बने

जलाशय और बांध सिमट रहे हैं। भू जल स्तर भी 500 फीट से नीचे चला गया है। जलाशयों की स्थिति के नगर के एक मात्र महलपारा...

Danik Bhaskar | Feb 28, 2018, 04:25 AM IST
जलाशय और बांध सिमट रहे हैं। भू जल स्तर भी 500 फीट से नीचे चला गया है। जलाशयों की स्थिति के नगर के एक मात्र महलपारा स्थित बांध के पानी का कैचमेंट एरिया में शासकीय निर्माण और कब्जे हो जाने से अब बांंध में पानी पर्याप्त नहीं भर पाता है। कब्जे दिन ब दिन बढ़ते जा रहे है और कैचमेंट एरिया में रुकावटें आने से और कम होने से बांध भर नहीं पा रहा है। साथ ही बांध का क्षेत्र पटाव झेल रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार बताया जाता है कि तालाब और बांधों के जल ग्रहण क्षेत्र पर अवैध कब्जा पुरी तरह से रोका जाना चाहिए पर यहां तो लोगों के साथ साथ शासकीय भवन ही बना दिए गए है।

इस बांध से किनको मिलता है लाभ: इस बांध से बालसी सहित पतेरापाली के कृषकों को यह सिंचाई के साथ वार्ड नं 1, 2 व 3 के रहवासियों के निस्तार के लिए काम आता है। बांध में 1987 से ही कब्जा होना आरंभ हो गया था। 12 जनवरी 1987 को तहसीलदार सराईपाली को पत्र लिखकर बांध के क्षेत्र में कब्जा होने की शिकायत सिंचाई विभाग ने की थी। उसके बाद सिंचाई विभाग लगातार कब्जा रोकने के लिए पत्र लिखती रही।

शहर का गंदा पानी बहका बंाध में जा रही है: साथ ही नगर पालिका द्वारा तो यहां सड़क, बिजली और नल का कनेक्शन देने पर अपनी आपत्ति भी जताई मगर पालिका ने मनमाने ढंग से सड़क बनाने के साथ साथ स्ट्रीट लाईट भी लगाई व नाली भी बनाई है। जिसका गंदा पानी बह कर इसी बांध में जा रहा है। सिंचाई विभाग ने बिजली विभाग को यहां कनेक्शन न देने व दिए हुए कनेक्शन को काटने के लिए कई पत्र लिखा है। तहसील कार्यालय मे 1987 से लेकर 2016 तक लगातार पत्र लिखा गया लेकिन अवैध कब्जे उसी तेजी बढ़ते रहे।

19 अप्रैल 2010 को कुछ जागरूक लोगों ने एसडीएस सहित सिंचाई विभाग में पत्र लिखकर बांध को बचाने की गुहार लगायी सिंचाई विभाग ने 9 सितंबर 2011 को डायरेक्ट कब्जाधारियों को नोटिस भी दी।

सराईपाली| बांध के कैचमेंट एरिया में अवैध कब्जे होने से जल भराव कम हो रहा है।

बांध से है किनको-किनको लाभ

इस बांध से बालसी 195 और पतेरापाली के 43 किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। बालसी के 375. 56 एकड़ और पतेरापाली के 70.53 एकड़ भूमि की सिंचाई के लिए उपरोक्त किसानों से अनुबंध किया गया है। अधिकारी और पुराने जानकार बताते हैं 100 बिस्तर अस्पताल से लेकर राजमहल के एक पिछले छोर और सड़क से नीचे की तरफ पुरा पानी बहकर इस बांध में आता है। पहली जमकर हुई बारिश में यह बांध पूरी तरह भर जाता है। बांध का निर्माण 50. 03 एकड़ में किया गया है तथा इसका कैचमेंट एरिया 318 एकड़ है। इस बांध से उलट के द्वारा नहर निकाली गई है।

कैचमेंट एरिया में किसी प्रकार का कब्जा गलत

सिंचाई विभाग के एसडीओ टीआर वर्मा का कहना है कि बांध में कब्जा हटवाने के लिए पूरी तरह राजस्व विभाग को लिखते रहे है मगर उन्होंने कभी ध्यान नहीं दिया। नियमत: बांध के कैचमेंट एरिया में किसी प्रकार का शासकीय या अशासकीय कब्जा नहीं होना चाहिए। यह सुप्रीम कोर्ट के नियम का उल्लंघन भी है इससे पानी का संग्रहण भी प्रभावित हुआ है। अब सिंचाई के लिए हम उतना पानी नहीं दे पाते है। नगर पालिका और विद्युत विभाग को आपत्ति करते हुए पत्र लिखा गया था कि अवैध जगह पर बिजली पानी, सड़क की सुविधा न दी जाए।

किनका-किनका है कब्जा

सिंचाई विभाग के अनुसार वर्तमान में यहां पर लगभग 180 लोगों का कब्जा है। कैचमेंट एरिया में पीडब्लूडी, पीएचई, तहसील कार्यालय, न्यायालय भवन, न्यायधीश आवास, वन डीपो आदि बने है इनमें आधा हिस्सा जिसका खसरा नंबर 109/1 च है, वहां बनी कालोनी भी इसमें शामिल है जिसका खसरा नंबर 109/1 ज है। इसके अलावा छिंद पार जो कि बांध के दूसरे तरफ है जिस पर पुरी तरह अवैध कब्जा हो चुका है। बांध के भीतर खसरा नंबर 112, 113 और 114 के साथ उलट के पास 109/1 ख व 109/1 ब में भी कब्जा है। कैचमेंट एरिया जिसे तकनीकी भाषा में एफटीएल कहा जाता है। ये सभी भवन व कब्जे उसी हुए हैं जो कि सीधा सीधा सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है।