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तालाब सिमट रहे, गहरीकरण कर हम बचा सकते हैं पानी

सराईपाली| नगर में तालाब तो बहुत है, चारों दिशाओं मे बड़े तालाब होना नगर के जल व्यवस्था की पुरानी सोच को बताता है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 26, 2018, 05:30 AM IST

सराईपाली| नगर में तालाब तो बहुत है, चारों दिशाओं मे बड़े तालाब होना नगर के जल व्यवस्था की पुरानी सोच को बताता है। मगर विकास की बेताहाशा और बेतरतीब दौड़ने तालाबों को ही संकट में ला दिया है। सरकारे तालाबों के संरक्षण की बात करती है सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कड़ा रूख अपना रखा मगर प्रशासन तंत्र का ध्यान न तालाबों के संरक्षण उनमे पानी भरने के लिए।

नगर के तालाब न सिर्फ सिमट रहे हैं बल्कि सूख भी रहे हैं। उनमें पानी आने के रास्ते धीरे धीरे बंद हो रहे हैं और कुछ तालाबों को तो प्रशासन ने ही खत्म कर दिया। पहले पानी की सभ्यता होती थी इसलिए नगर के साथ तालाबों का विकास होता था समय के साथ साथ तालाबों और कुओं का महत्व खत्म होते जा रहा है। पूर्व की ओर झिलमिला में पांच तालाब व डबरी है जिनके खसरा नं 39 का रकबा .84 एकड़ है, खसरा नं 135 तीन एकड़ का तालाब, बडा कांटा तालाब खसरा नं 169 जिसका रकबा 6.3 एकड़ है, पुराना तालाब जिसका खसरा नं 249 जिसका रकबा 2.44 एकड़ है, तथा एक डबरी खसरा नं 167 जिसका रकबा 0.69 है।

तालाबों में ही बन गए शासकीय भवन

उड़िया पारा स्थित डबरी में सामुदायिक भवन बनाया गया है। इसी तरह झिलमिला स्थित डबरी में कम्यूनिटी हाल बनाया गया है। जिसमें बरसात के दिनों भवन के अंदर ही तालाब बन जाता है। महलपारा के बांध में अवैध कब्जे कर कॉलोनी बन गई है नगर के ज्यादात्तर तालाब जनवरी से लेकर अप्रैल मे ही सूख जाते हैं।

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