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सफाईकर्मियों को भुगतान नहीं आज से काम बंद का ऐलान

भास्कर न्यूज|भंवरपुर (सराईपाली) सरकार की एक और महत्वाकांक्षी योजना श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय रूर्बन...

Danik Bhaskar | Feb 07, 2018, 06:55 AM IST
भास्कर न्यूज|भंवरपुर (सराईपाली)

सरकार की एक और महत्वाकांक्षी योजना श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय रूर्बन मिशन के तहत लापरवाही बरती जा रही है। बसना ब्लॉक से भंवरपुर क्लस्टर के 14 ग्राम पंचायतों के 32 गांवों का चयन रूर्बन विकास के लिए मिशन के दूसरे चरण में जनवरी 2017 में किया गया था। जिसका उद्देश्य क्लस्टर के तहत आने वाले गांवों को शहरी सुविधाओं से युक्त बनाते हुए रूर्बन गांव के रूप में विकसित करना था। इसी के चलते गांवों में दिसंबर 2017 से डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का कार्य भी शुरू किया गया। लेकिन डेढ़ माह बाद भी भुगतान नहीं होने के कारण सफाईकर्मियों ने 7 फरवरी से भंवरपुर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन बंद करने का फैसला लिया है।

भंवरपुर में 23 दिसंबर से कचरा कलेक्शन शुरू किया गया था। इसके लिए 900 घरों में 1800 और 150 दुकानों में 150 डस्टबिन बांटे गए थे। 9 रिक्शों के जरिए कचरा कलेक्शन की जिम्मेदारी महिला स्व सहायता समूह की 18 महिलाओं को दिया गया। जिन्हें 172 रुपए प्रतिदिन के दर पर मजदूरी भुगतान पंचायत से किया जाना था, लेकिन योजना शुरू होने के 45 दिनों के बाद भी महिलाओं को भुगतान नहीं किया गया।

भंंवरपुर. महिला समिति को दिया गया है कचरा कलेक्शन का काम।

सफाईकर्मियों ने कहा- भुगतान होगा तभी काम शुरू करेंगे

सफाईकर्मी तुलसीबाई सागर ने बताया कि हमें घर-घर से कचरा इकठ्ठा करने का काम शुरू करने के दौरान बाहर से आए अफसर ने कहा था कि महीना पूरा होते ही 172 रुपए प्रतिदिन की दर से हर महिला को भुगतान किया जाएगा। इसलिए 9 रिक्शों के जरिए भंवरपुर में महिला समूह द्वारा कचरा कलेक्शन का कार्य किया जा रहा था। लेकिन डेढ़ महीने बाद भी हमें मजदूरी का भुगतान नहीं मिला है। इसलिए भुगतान होने के बाद ही फिर काम शुरू करेंगे।

सरपंच ने कहा- बिना तैयारी के शुरू कराया गया था काम

सरपंच कृष्ण कुमार पटेल ने बताया कि दबाव के चलते विभागीय अधिकारियों ने बिना पूर्व तैयारी के काम शुरू करा दिया। लेकिन अब भुगतान के लिए फंड की स्वीकृति नहीं मिली है कहकर बिल को रोक दिया गया है। योजना लगभग 8 माह पूर्व की है। अभी तक डीपीआर अपूर्ण है, पंचायत में इतना फंड नहीं है कि हम मजदूरी भुगतान कर सकें। जनपद पंचायत के पूर्व सीईओ एनसी साव ने बताया कि डीपीआर को स्वीकृति नहीं मिली है, स्वीकृति मिलते ही भुगतान हो जाएगा।