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आबादी भूमि की रजिस्ट्री बंद, जमीन बेचने व बंटवारे में आ रहीं दिक्कतें

सराईपाली| नगरीय क्षेत्र में एक बार फिर आबादी भूमि के मलबे की रजिस्ट्री पर अघोषित रोक लगी हुई है, क्योंकि इसका नजरी...

Danik Bhaskar | Jun 02, 2018, 03:25 AM IST
सराईपाली| नगरीय क्षेत्र में एक बार फिर आबादी भूमि के मलबे की रजिस्ट्री पर अघोषित रोक लगी हुई है, क्योंकि इसका नजरी नक्शा जारी नहीं किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के विकास यात्रा में जिस मुद्दे की सर्वाधिक चर्चा रही वह आबादी भूमि का था। विधायक से लेकर मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष से लेकर बात कलेक्टर तक पहुंची, सबने आश्चर्य व्यक्त किया कि यह नियम कैसे लागू हुआ है। प्रदेश में कहीं भी आबादी भूमि के मलबे की रजिस्ट्री पर रोक नहीं है। इस रोक से जरूरतमंद लोग अपनी जमीन बेचने, बंटवारा करने में परेशानी महसूूस कर रहे हैं।

पहले भी लगी थी रोक

इसके पहले भी 2003-04 में आबादी भूमि का नजरी नक्शा देना बंद किया गया था। तब कुछ लोगों ने इसकी शिकायत उच्च स्तर पर की थी तत्कालीन कलेक्टर एसके तिवारी ने तत्कालीन एसडीएम एमके गुप्ता को लिखित में आदेश दिया था कि आबादी भूमि के मलबे की रजिस्ट्री जन सुविधा को देखते हुए न रोका जाए, उसमें किसी प्रकार का विवाद न हो यह सुनिश्चित करते हुए नजरी नक्शा जारी किया जाए।

विधायक ने दिया मुख्यमंत्री को ज्ञापन

आबादी भूमि को लेकर विधायक रामलाल चौहान ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है। इसके अलावा इस बात को चैंबर ऑफ कामर्स ने और भाजपा के पूर्व विधायक ने भी मुख्यमंत्री के सामने उठाया है। जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा-समस्या रहती है उसका समाधान किया जाएगा। इस संबंध में एसडीएम नूपुर राशि पन्ना का कहना है कि कुछ दिन पहले ही जानकारी में यह बात आई है। वे सभी खसरा का स्वयं सत्यापन करेंगी और रजिस्ट्रार से भी पता करेंगी कि पहले कैसे रजिस्ट्री होती थी। स्थिति साफ होने पर सर्वे भी किया जाएगा।

जानिए, कैसे होती आबादी भूमि की रजिस्ट्री

आबादी भूमि की रजिस्ट्री का व्यवहार में जो अब तक होता था, उसमें उक्त भूमि का नजरी नक्शा पटवारी से लेने के बाद मलबा की रजिस्ट्री की जाती थी, जिससे शासन को बेहतर राजस्व की प्राप्ति होती थी। आबादी भूमि की पट्टा देने का सर्वे भी ग्रामीण क्षेत्र में चल रहा है। आबादी भूमि की रजिस्ट्री न होने से परेशान एक कर्मचारी ने रायपुर के मुख्यमंत्री जनदर्शन में आवेदन लगाया तो उन्हें जवाब मिला कि आपकी जमीन की रजिस्ट्री होगी, लेकिन वे स्थानीय तहसील आफिस गए तो उन्हें जो नक्शा दिया गया, उसमें भूमि को शासकीय बताया गया है। यहां के पूर्व पटवारी सुरेश कुमार सामल ने बताया कि पूर्व एसडीएम ने आबादी भूमि को सरकारी भूमि बताते हुए उसका नजरी नक्शा देने पर मेरे खिलाफ कार्रवाई की थी और भविष्य में नहीं देने का निर्देश दिया था।