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स्वीकृति के बाद भी लोन लेने को बैंक के चक्कर काट रहे किसान

भास्कर न्यूज|लंबर (सराईपाली) सहकारी समितियों से जुड़े किसानों को लोन मिलने में परेशानी हो रही है। जिन किसानों की...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 24, 2018, 02:45 PM IST

भास्कर न्यूज|लंबर (सराईपाली)

सहकारी समितियों से जुड़े किसानों को लोन मिलने में परेशानी हो रही है। जिन किसानों की ऋण स्वीकृत हो चुकी है अब उन्हें बैंक से नकदी प्राप्त करने के लिए चक्कर काटना पड़ रहा है। जिला सहकारी बैंक में रोजाना सैकड़ों किसान ऋण राशि प्राप्त करने पहुंच रहे हैं, मगर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है,

बैंक प्रबंधन का कहना है कि जितने किसानों के लिए ऋण स्वीकृत हो रही है, उतनी मात्रा में राशि बैंक को नहीं मिल पा रही है। अब खरीफ सीजन की तैयारी में जुटे किसानों को ऋण राशि की सख्त जरूरत है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्या भंवरपुर के अंतर्गत भंवरपुर, लंबर, बिछियां, बड़ेसाजापाली, उड़ेला, बाराडोली सहकारी समिति संचालित है, जहां लगभग 7300 किसान पंजीकृत हैं।

पिछले वर्ष किसानों की 20 करोड़ 81 लाख 22 हजार रुपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष अब तक मात्र 785 किसानों को ऋण की स्वीकृति मिल पाई है जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। इस वर्ष सूखा प्रभावित होने के कारण किसानों का ऋण वसूली को स्थगित करा दिया गया है। राशि को परिवर्तन कर इस वर्ष उन किसानों का ऋण प्रकरण तैयार किया जा रहा है जिस गांव की आनावारी रिपोर्ट 0.37 पैसा है, उन गांवों के किसानों का तीन वर्ष के लिए परिवर्तन किया गया है। 38-50 पैसा वाले गांव के किसानों का ऋण एक वर्ष के लिए स्थगित किया गया है। किसान खरीफ सीजन की तैयारी में जुट गये हैं, ऋण राशि से ही खेतों की जुताई कृषि उपकरण, खेत तैयार करने, मेड़ बंदी जैसे कार्यों के लिए नगदी की सख्त जरूरत पड़ रही है।

इधर, सहकारी बैंक के माध्यम से किसानों को ऋण राशि का वितरण किया जा रहा है, पर्याप्त मात्रा में नगद राशि नहीं होने से परेशानी बढ़ गई है।करीब 21 करोड़ रुपए का ऋण वितरण किया जाना है, जिसमें 50 प्रतिशत नगद और 50 प्रतिशत में खाद, बीज का वितरण किया जाना है। कुछ किसानों को एटीएम का भी वितरण किया गया है, मगर अभी भी कई किसान एटीएम से वंचित हैं। नया खरीफ सीजन अप्रैल से शुरू हो जाता है। बताया जा रहा है कि ऋण स्वीकृति के लिए जटिल प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। 6 समितियों के 7300 किसानों के ऋण प्रकरण की जांच के लिए एकमात्र पर्यवेक्षक पदस्थ होने के कारण विलंब हो रहा है।

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