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लक्ष्मी का उपयोग भक्त के भाव से करिए, उपभोग के लिए नहीं

सिर्री | लक्ष्मी का उपयोग भक्त के भाव से उसे माता मानकर करो, न कि उपभोग करने की वस्तु मानकर। हमेशा संयमित जीवन जीयो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 08, 2018, 02:50 AM IST

सिर्री | लक्ष्मी का उपयोग भक्त के भाव से उसे माता मानकर करो, न कि उपभोग करने की वस्तु मानकर। हमेशा संयमित जीवन जीयो और सदा नम्र रहो। द्रौपदी के केवल इतना कहने से कि अंधे का पुत्र अंधा, महाभारत हो गया। असंतुलन में ही महाभारत है संतुलन में रामायण।

उक्त बातें कामदगिरी चित्रकूट से आए रामानंदाचार्य ने सिर्री के बाजार चौक में सिन्हा परिवार द्वारा आयोजित रामकथा महोत्सव के तृतीय दिवस पर कहीं। भरत ने संपत्ति को भगवान का आशीर्वाद बताया। इसलिए उसे पूजनीय माता माना। इसलिए लक्ष्मी हम सबकी, भक्तों की पूज्या है। बस प्रार्थना करो कि मां लक्ष्मी हमें आशिर्वाद देती रहे। लक्ष्मी को पूज्या के रूप में स्वीकारो, भोग्या के रूप में कभी उपयोग नहीं करना चाहिए। संयमित जीवन जीना सीखो ।

संबंधों का सबसे ज्यादा महत्व केवल भारत में

रामानंदाचार्य ने आगे यह भी कहा कि भारत में संबंधों का जितना निर्वाह होता है उतना अन्य देशों में नहीं। हनुमान जी ने रामकाज के बिना कही भी विश्राम न किया केवल न ही जल पिया।

जानकी जी का दर्शन कर ही फल खाया। इस अवसर पर केबिनेट मंत्री अजय चन्द्राकर की धर्मप|ी प्रतिभा चन्द्राकर, जिला पंचायत अध्यक्ष रघुनंदन साहू, एलपी गोस्वामी, सौहेन्द्रसिंह गुरु दत्ता, गौरीशंकर शुक्ला, बसंत साहू, रामाराम साहू, आरपी सिन्हा, देवा साहू, घनश्याम साहू आदि श्रद्धालु उपस्थित थे।

सिर्री में श्रीरामकथा महोत्सव के तीसरे दिन उमड़े श्रद्धालु।

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