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सिंचित व असिंचित को दिया जा रहा समान मुआवजा

सुहेला| शासन द्वारा सूखाग्रस्त सिंचित रकबा वाले पीड़ित किसानों को भी असिंचित रकबे के बराबर क्षतिपूर्ति दी जा रही...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:30 AM IST

सुहेला| शासन द्वारा सूखाग्रस्त सिंचित रकबा वाले पीड़ित किसानों को भी असिंचित रकबे के बराबर क्षतिपूर्ति दी जा रही है। सिंचित व असिंचित एक हेक्टेयर के लिए बराबर राशि 68 सौ रुपए दी जा रही है। दस हेक्टेयर से अधिक भूमि वालों को क्षतिपूर्ति 68 हजार रुपए से अधिक नहीं दिया जा रही है।

भटभेरा के ललित चंद्राकर, शैलेष चंद्राकर, हैल चंद्राकर, अशोक चंद्राकर दस हेक्टेयर से अधिक भूमि के मालिक हैं, लेकिन उन्हें केवल दस हेक्टेयर की ही क्षतिपूर्ति राशि दी गई है। संतोष चंद्राकर, दिनेश्वर, हरीश, नंदू वर्मा आदि किसानों ने कहा कि विडंबना है कि शासन की गलत नीतियों की सजा किसान ऋण लेते समय बीमा राशि कटवाकर फिर भोगेंगे। उनका कहना है कि बीते सत्र के प्रधानमंत्री फसल बीमा की राशि अब तक मिल नहीं पाई है और आने वाले खरीफ फसल बीमा के लिए उससे सोसायटियों से निर्देश आ गए हैं कि जो किसान ऋण लेेंगे, बीमा राशि काट दी जाएगी। यदि दस एकड़ भूमि स्वामी एक एकड़ के लिए भी कृषि ऋण लेता है तो उसे दस एकड़ के लिए फसल बीमा करना पड़ेगा। संघर्ष समिति के भरत लाल वर्मा, रिकेश साहू, प्रीतम साहू ने फसल बीमा को सरकारी लूट बताते हुए कहा कि फिर ऋण बांटने व बीमा काटने का समय आ गया है।

मध्यप्रदेश की तरह प्रदेश में भी भावांतर योजना

खरीफ फसल बीमा के लिए सोसायटियों से निर्देश आ गए हैं कि जो किसान ऋण लेेंगे, बीमा राशि काट दी जाएगी। यदि दस एकड़ भूमि स्वामी एक एकड़ के लिए भी कृषि ऋण लेता है तो उसे दस एकड़ के लिए फसल बीमा करना पड़ेगा। नियमों से बेहद असंतुष्ट किसानों सहित भारतीय किसान संघ के प्रदेश प्रवक्ता नवीन शेष ने कहा कि रबी फसल की बुआई के समय धान फसल पर प्रतिबंध लगने से अधिकांश किसानों ने गेहूूं, सरसो, चना और मटर आदि फसल लिया है। इस फसलों को मंडियों में काफी कम दाम पर लिया जा रहा है, जबकि सरकार द्वारा केवल चना पर प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। किसानों ने सरकार से आग्रह किया कि मध्यप्रदेश की तरह भावांतर योजना लागू करें और किसानों को समर्थन मूल्य की अंतर राशि और प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा करें।

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