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पुलिस ने मुझे और मेरे दोस्त को मारी गोली, मौके पर कोई नक्सली नहीं था, न ही कोई मुठभेड़ हुई

घायल बालक की जुबानी बीजापुर जिले के करका के जंगलों में फोर्स के जवानों पर एक 11 साल के मासूम को गोली मारने के...

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2018, 03:01 AM IST
घायल बालक की जुबानी

बीजापुर जिले के करका के जंगलों में फोर्स के जवानों पर एक 11 साल के मासूम को गोली मारने के आरोप लगे हैं। घटना में 11 वर्षीय बोटीराम को कूल्हे में गोली लगी है उसे इलाज के लिए देर रात मेडिकल कॉलेज के आपातकाल में भर्ती किया गया है। यहां डॉक्टर उसके इलाज में जुटे हैं। डाक्टरों के अनुसार बोटीराम को कूल्हे में गोली लगी तो सामने के हिस्से से बाहर निकल गई।

महारानी हास्पिटल में रविवार की मध्यरात्रि एक्सरे के लिए इंतजार करने के दौरान बोटीराम ने घटना की जानकारी दी। बोटीराम ठीक से हिंदी नहीं बोल पाता हैं। गोंडी भाषा में उसने कहा कि वह अपने दोस्त सोमारू के साथ जंगल की तरफ गया था कि अचानक ही जवान दिखे और गोली चल गई। बोटी ने कहा कि घटना के दौरान आसपास कोई नक्सली नहीं था। उसने बताया कि एक गोली उसे लगी उसके दोस्त सोमारू को भी गोली लगी चूंकि वह उस समय डरा हुआ था ऐसे में वह देख नहीं पाया कि सोमारू का क्या हुआ।

डॉक्टर उसका इलाज करने में लगे हैं। इधर हास्पिटल में भर्ती होने के बाद बोटीराम ने भास्कर से चर्चा करते हुए पुलिस की गोली से घायल होने की बात कही और साथ में ये भी कहा कि मौके पर कोई नक्सली नहीं था।

बच्चे का चाचा बोला-खून से लथपथ पहुंचा तब पता चला : बोटी के साथ उसका इलाज करवाने के लिए उसके चाचा लिंगा साथ आए हुए हैं। उन्होंने टूटी-फूटी हिंदी में बताया कि बोटी जब घर पहुंचा तो लहूलुहान था। उन्होंने कहा कि उसके घर पहुंचने के बाद ही परिवार के सदस्यों को घटना का पता चल पाया। उसके चाचा ने भी इलाके में नक्सली मूवमेंट जैसी बात से इंकार किया है।

हाल ही में दूसरी वारदात : इधर संभाग में कुछ ही दिनों के अंदर दूसरी बार जवानों पर गोली मारने के आरोप लगे हैं। इससे पहले सुकमा जिले में भी सोनी सोरी ने रामे नाम की युवती को गोली मारने का आरोप लगाया था। उस दौरान पुलिस ने दावा किया था कि वह नक्सली है और सोनी ने दावा किया था कि तालाब में मछली पकड़ने के दौरान उसे गोली मारी गई।

डीआईजी बोले- मुठभेड़ हुई थी, शव भी बरामद किया, आत्मसमर्पितों से करवा रहे पहचान

इधर मामले पर डीआईजी सुंदरराज पी ने कहा जिस दिन बोटी को गोली लगी उस दिन पुलिस नक्सली मुठभेड़ हुई थी। मौके से एक शव भी बरामद किया गया था। उन्होंने कहा कि बोटी वहां क्या कर रहा था इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि नक्सली कई बार बच्चों से संतरी ड्यूटी के साथ दिगर काम करवाते हैं। ऐसे में बोटी की पहचान के लिए आत्मसमर्पित बाल संघम व दूसरे नक्सलियों की मदद ली जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले में हर एंगल से जांच की जा रही है। किसी भी निर्दोष को गोली मारने का अधिकार किसी को नहीं है और जवान इस मानसिकता के साथ जंगल में नहीं जाते हे कि किसी को भी गोली मार दी जाए।

घायल बालक बोटीराम

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