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पूरी रात पैदल चलकर जवान पहुंचे नक्सलियों के सेफ जोन वाले पहाड़ पर, महिला नक्सली ढेर

भास्कर न्यूज | दोरनापाल/जगदलपुर सुकमा जिले में केरलापाल के गोरगुंडा पहाड़ पर मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने एक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 29, 2018, 03:15 AM IST

भास्कर न्यूज | दोरनापाल/जगदलपुर

सुकमा जिले में केरलापाल के गोरगुंडा पहाड़ पर मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने एक महिला नक्सली को मार गिराया। महिला का शव बरामद कर लिया गया है। कई नक्सली घायल भी हुए हैं। समाचार लिखे जाने तक मुठभेड़ जारी थी। गोरगुंडा पहाड़ को नक्सली अपना सुरक्षित गढ़ मानते हैं। यहां सालोंभर पानी की उपलब्धता रहती है। साथ यहां का तापमान हमेशा जिले के बाकी भाग से 10 से 15 डिग्री कम रहता है। चूंकि सुकमा जिले में कई स्थानों पर पारा 50 डिग्री तक पहुंचता है ऐसे में नक्सली इस पहाड़ी पर चढ़ जाते हैं। शेष|पेज 7





यहां फोर्स का पहुंचना नामुमकिन सा रहता है लेकिन नक्सलियों की बड़ी मौजूदगी की खबर मिलने के बाद मंगलवार देर रात डीआरजी के जवान इस पहाड़ पर चढ़ गए और बुधवार को इनका सामना नक्सलियों से हुआ। सुरक्षाबलों के मुताबिक यहां कई नक्सली ढेर हुए और कुछ घायल भी हुए। लेकिन नक्सली इनका शव ले भागने में सफल रहे। अभी सिर्फ एक महिला नक्सली का शव बरामद मिला है। इसके अलावा जवानों ने 312 बोर बंदूक, एक भरमार, एक नग पाइप बम, अाधा दर्जन से ज्यादा पिट्‌ठू व अन्य सामान बरामद किया है। सुकमा एसपी अभिषेक मीणा ने बताया कि जवान अभी भी पहाड़ियों पर मौजूद हैं और एनकाउंटर जारी है। माना जा रहा है कि इस एनकाउंटर में आधा दर्जन नक्सली ढेर हुए हैं।

उधर दंतेवाड़ा में मेला देखने पहुंचे बर्खास्त आरक्षक की नक्सलियों ने की हत्या

दंतेवाड़ा जिले के मुस्केल गांव में मेले के दौरान नक्सलियों ने आरक्षक बामन मंडावी की हत्या कर दी। मंडावी को हाल ही में ड्यूटी से नदारद रहने के कारण बर्खास्त किया गया था। मंडावी आरक्षक बनने से पहले खुद नक्सली था। पुलिस के अनुसार मंगलवार रात दो बजे मेले में नाच-गाना चल रहा था। मेले में बामन मंडावी भी नाच-गाने में मशगूल था। इसी बीच 20 से 25 नक्सली मेले में पहुंचे और उसे पकड़ लिया। पहले तो उसकी पिटाई की गई इसके बाद उसे तीन स्थानों से बांधा गया और कुल्हाड़ी से उसकी हत्या कर दी गई। इस दौरान उसकी दोनों आंखें भी फूट गई। बताया जा रहा है कि बामन ने 2015 में नक्सलवाद छोड़कर आरक्षक बन गया था। तब से ही वह नक्सलियों के निशाने पर था।

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