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सीआरपीएफ करवाएगी जांच, पांच सदस्य टीम गठित यूबीजीएल क्यों नहीं फूटे इसे लेकर भी चल रहा मंंथन

किस्टाराम हमले में 9 जवानों की शहादत के बाद सीआरपीएफ ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। खबर है कि सीआरपीएफ के दिल्ली...

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2018, 03:15 AM IST
सीआरपीएफ करवाएगी जांच, पांच सदस्य टीम गठित 
 यूबीजीएल क्यों नहीं फूटे इसे लेकर भी चल रहा मंंथन
किस्टाराम हमले में 9 जवानों की शहादत के बाद सीआरपीएफ ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। खबर है कि सीआरपीएफ के दिल्ली हेडक्वार्टर से इस जांच के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि सुकमा में तैनात सीआरपीएफ डीआईजी ई इंगलो का कहना है कि उन्हें ऐसी किसी जांच की जानकारी नहीं है, संभवत: हेडक्वार्टर से ऐसे आदेश जारी हुए हों। इसके अलावा फोर्स के अलग-अलग अफसर यह भी पता करने में जुटे हैं कि आखिर किस्टाराम में नदी किनारे घिरे जवानों की ओर से दागे गए यूबीजीएल क्यों नहीं फूटे। मिली जानकारी के अनुसार किस्टाराम हमले के बाद स्टेट पुलिस और सीआरपीएफ इसे गंभीरता से ले रही है।

खबर है कि सीआरपीएफ ने तो हमले की बारीकी से जांच के आदेश जारी किए हैं और जांच के लिए जो टीम बनाई गई है उसमें सुरक्षा सलाहकार विजय कुमार को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा आईजी और डीआईजी स्तर के अफसरों को इस टीम में रखा गया है। पांच सदस्यीय टीम सुबह पहली मुठभेड़ से लेकर माइन प्रोटेक्टेड वीकल को उड़ाने तक की घटना की जांच करेगी। जांच टीम यह भी पता लगाएगी कि रोजाना इस मार्ग पर आरओपी लगाने और सर्चिंग करने के बाद भी नक्सली पांच-पांच आईईडी यहां कैसे लगा गए और इसकी खबर जवानों को क्यों नहीं लगी। वहीं जिला पुलिस बल से सीआरपीएफ का काेऑर्डिनेशन कैसा है इसकी भी जांच की जाएगी। इसके अलावा भी कई अन्य जांच होगी।

पोटकपल्ली में कैंप खोलने की योजना के बाद ही तय हो गया था कि नक्सली कुछ न कुछ करेंगे

इधर किस्टाराम में जवानों पर हमले से पहले ही यह तय था कि नक्सली यहां कोई बड़ी वारदात करेंगे। दरअसल फोर्स ने किस्टाराम के बाद पालोदी में कैंप खोला। यहां कैप खोलने के साथ ही पोटकपल्ली में भी नया कैंप खोलने की कवायद शुरू कर दी गई थी। ऐसे में खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया था कि नक्सली यहां कोई बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं।

पालोदी नक्सली हमले की तह में क्या-क्या

यूबीजीएल नहीं फूटने के कई कारण बताए अफसरों ने, कहा- गंभीर मामला नहीं

इधर किस्टाराम में सीआरपीएफ के जवानों को नक्सलियों ने सबसे पहले नदी किनारे घेरा था। यहां जवानों की सूझबूझ से नक्सलियों को पीछे हटना पड़ा था। इस दौरान जवानों ने यूबीजीएल के तीन गोले नक्सलियों पर दागे थे लेकिन ये नहीं फूटे। इसके बाद इस मामले को इसलिए गंभीर माना जा रहा था और जवानों से इस संबंध में पूछताछ भी गई है। डीआईजी पी सुंदरराज का कहना है कि यूबीजीएल का गोला तब तक नहीं फटेगा जब तक वह सख्त सरफेस से न टकराए। उन्होंने बताया कि दलदली मिट्‌टी, रेत या शाफ्ट सरफेस पर गिरेगा तो यह गोला नहीं फटेगा। उन्होंने बताया कि किस्टाराम में जवानों को नक्सलियों ने नदी के आसपास घेरा था। ऐसे में कठोर सरफेस नहीं होने की वजह से यह फूट नहीं पाए होंगे। उन्होंने बताया कि दो दिनों पहले दंतेवाड़ा जिले में जो यूबीजीएल के गोले फूटे वे सफाई के दौरान सिर्फ दो फीट ऊंचाई से गिरे थे लेकिन सख्त सरफेस होने की वजह से वह फट गए।

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 यूबीजीएल क्यों नहीं फूटे इसे लेकर भी चल रहा मंंथन
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