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रायपुर, जगदलपुर में डॉक्टरों का वेतन सवा लाख, सुकमा में दिया 2.10 लाख का ऑफर

प्रदेश के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने बीजापुर जिले की तर्ज पर सुकमा...

Dainik Bhaskar

Mar 02, 2018, 03:20 AM IST
प्रदेश के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने बीजापुर जिले की तर्ज पर सुकमा जिला प्रशासन ने डॉक्टरों के लिए नया ऑफर निकाला है। इन पदों पर नियुक्ति संविदा के आधार पर होगी। दो दिन पहले ही सुकमा जिला प्रशासन ने जिला हास्पिटल,सीएचसी और पीएचसी में काम करने वाले डाॅक्टरों को दो लाख दस हजार रुपए सैलरी देने का ऑफर दिया है। इसके अलावा कई अन्य पदों के लिए भी कुछ इसी तरह के वेतन की घोषणा भी की गई है। जिला प्रशासन आने वाले डॉक्टरों को डीएमएफटी मद से वेतन का भुगतान करेगा। इस मामले में खास बात यह है कि डॉक्टरों का यह वेतन रायपुर और जगदलपुर में काम कर रहे डॉक्टरों से दोगुना है। रायपुर मेडिकल कॉलेज में संविदा के तौर पर काम करने वाले प्रोफेसर की सैलरी 1 लाख 20 हजार हैं। इसके अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर को 65 और एसोसिएट प्रोफेसर को 90 हजार वेतन दिया जा रहा है। इतना ही वेतन जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत डॉक्टरों को भी दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में केजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर(सीएमओ) को करीब 85 हजार का वेतन दिया जा रहा है।

डॉक्टरों की कमी को पूरा करने प्रशासन ने निकाला नया फार्मूला

इन पदों के लिए दिया है ऑफर

सुकमा के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी ने 24 फरवरी को डॉक्टर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन,ड्राइवर सहित अन्य पदों पर भर्ती के लिए एक आदेश निकाला है। इसमें उन्होंने डाक्टरों के लिए विशेष पैकेज देने की घोषणा की है जो इस प्रकार है।

मेडिसिन विशेषज्ञ 2,10,000

शिशु रोग विशेषज्ञ 2,10,000

स्त्री रोग विशेषज्ञ 2,10,000

निश्चेतना विशेषज्ञ 2,10,000

रेडियोलाजिस्ट 2,10,000

सर्जरी विशेषज्ञ 2,10,000

नाक कान गला व नेत्र 2,10,000

चिकित्सा अधिकारी 84,000

स्टाफ नर्स 13,000

लैब टेक्नीशियन 13,000

महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता 10,000

ड्राइवर 10,000

ये वो कारण जिसके चलते मोटी सैलरी पर भी डॉक्टर यहां आने को तैयार नहीं

हास्पिटलों में पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं।

रोड कनेक्टिविटी भी बेहद खराब।

इंटरनेट और दूसरे कनेक्टिविटी भी नहीं।

राज्य का सबसे आखिरी छोर ऐसे में रायपुर पहुंचने के लिए कम से कम 12 घंटे समय लगना।

ये तीन बड़े कारण जिनके कारण डॉक्टर यहां नहीं आना चाहते

नक्सली फैक्टर हर दूसरे दिन बड़ी नक्सली वारदातें।

मोटी सैलरी का ऑफर सिर्फ संविदा नियुक्ति पर स्थायी नौकरी के लिए कोई विकल्प नहीं।

प्राइवेट प्रैक्टिस का कोई विकल्प नहीं, एमडी किये हुए डॉक्टर यदि सेवा देते हैं तो सिर्फ सैलरी पर ही गुजारा करना मजबूरी जबकि दूसरे शहरों में प्राइवेट प्रैक्टिस की जमकर गुंजाइश

इसलिए दे रहे ऑफर क्योंकि डाक्टरों की भारी कमी

सुकमा जिले में जरूरत के हिसाब से आधे कम स्वास्थ्य कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन कोशिश कर रहा है कि मोटी सैलरी में ही सही पर कोई तो यहां काम करे।

एक नजर में जरूरत और तैनात स्टाफ की स्थिति

पद का नाम, स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त पदाें की संख्या

मेडिसिन विशेषज्ञ 4 0 4

शिशु रोग विशेषज्ञ 4 1 3

स्त्री रोग विशेषज्ञ 4 1 3

निश्चेतना विशेषज्ञ 4 1 3

रेडियोलाजिस्ट 1 0 1

सर्जरी विशेषज्ञ 4 2 2

नाक कान गला विशेषज्ञ 1 0 1

नेत्र विशेषज्ञ 1 0 1

चिकित्सा अधिकारी 39 18 21

स्टाफ नर्स 70 49 21

लैब टेक्नीशियन 25 08 17

महिला स्व कार्यकर्ता 114 63 51

ड्राइवर 8 5 3

अन्य स्टाफ के लिए सामान्य वेतन



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