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जवान कहता रहा कि तबीयत खराब हो रही साथी चिल्लाते रहे पर नहीं मिला इलाज, मौत

भास्कर न्यू | दंतेवाड़ा/जगदलपुर जंगलों में नक्सलियों के लिए खौफ का पर्याय माने जाने वाले डीआरजी के एक जवान की मौत...

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 03:45 AM IST
भास्कर न्यू | दंतेवाड़ा/जगदलपुर

जंगलों में नक्सलियों के लिए खौफ का पर्याय माने जाने वाले डीआरजी के एक जवान की मौत सरकारी सिस्टम की निष्क्रियता के चलते हो गई। जो जवान जंगलों में नक्सलियों की लाशें गिराकर उन्हें भागने को मजबूर कर देता था, वही जवान मलेरिया की चपेट में आने के बाद मौत के आगोश में चला गया। साथी जवानों ने बताया कि उसकी मौत के लिए जितना जिम्मेदार मलेरिया है उतनी ही जिम्मेदार सरकारी हास्पिटल में तैनात डॉक्टर और स्टाफ भी। जवान रात भर कहता रहा कि उसकी तबीयत खराब हो रही है पेशाब भी बंद हो गई पर किसी ने उसकी नहीं सुनी। बीमार जवान और उसके साथी स्टाफ नर्सों को बताते रहे कि तबीयत बिगड़ती जा रही है, पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और अंतत: जवान ने दम तोड़ दिया।

आईजी बोले-मामले की जांच के लिए बोलूंगा : इधर इस मामले में आईजी विवेकानंद सिन्हा ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि जवान के इलाज में किसी प्रकार की कोताही बरती गई होगी तो पुलिस मामले में विभागीय जांच की मांग करेगी। उन्होंने कहा कि जवानों के इलाज के लिए रायपुर और जगदलपुर में भी व्यवस्था की गई है। यदि कोई जवान ज्यादा गंभीर होता है तो उसे हेलिकाप्टर से रायपुर तक पहुंचाने की सुविधा भी है। ऐसे में यदि जवान की मौत लापरवाही से हुई तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से बात कर संबंधित की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

नक्सलियों को मार गिराने वाले जवान ने सरकारी सिस्टम से मानी हार

दंतेवाड़ा. मलेरिया से मृत एएसआई भीष्म कतलम

दंतेवाड़ा के जिला हास्पिटल में दम तोड़ने वाला भीष्म कतलम मूलत: राजनांदगांव के बेलटिकरी का रहने वाला है। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। एक साल पहले उसने आरक्षक के रूप में डीआरजी में ज्वाइनिंग दी थी। साल भर में उसे उसकी बहादुरी के लिए दो बार प्रमोशन मिला। हाल ही में भीष्म की डीआरजी ने पड़ोसी जिले सुकमा के गादीरास के नजदीक गोंडेरास के जंगलों में घुसकर नक्सलियों का कैंप ध्वस्त किया था। करीब 2 घंटे चली मुठभेड़ में 6 नक्सलियों को इस टीम ने मार गिराया था। मुठभेड़ में डीआरजी की टीम में बतौर प्रधान आरक्षक भीष्म कतलम भी शामिल था, जिसे इस बहादुरी के इनाम स्वरूप महीने भर पहले ही आउट आफ टर्न प्रमोशन देकर एएसआई बनाया गया था। इसके पहले नागलगुड़ा मुठभेड़ में 4 नक्सलियों को मार गिराने वाली डीआरजी टीम में शामिल रहने की वजह से आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी मिला था, जिसमें वह आरक्षक से प्रधान आरक्षक और गोंडेरास मुठभेड़ के बाद उसे पदोन्नत कर एएसआई बना दिया गया था।

इकलौता बेटा था भीष्म, आरक्षक बना और नक्सलियों को मार गिराया तो एक साल में मिले दो प्रमोशन

दस दिन पहले भी मलेरिया चेकअप करवाया पर तब पता नहीं चला

भीष्म की तबीयत पिछले कई दिनों से खराब थी। रविवार को उसे हास्पिटल में भर्ती करने के दस दिन पहले भी उसे इलाज के लिए हास्पिटल लाया गया था। तब मलेरिया नहीं होने की पुष्टि होने के बाद वह लौट गया था। इसके बाद फिर तबीयत बिगड़ी तो उसे हास्पिटल में भर्ती करवाया गया।

आपातकाल में डॉक्टर थे पर देखने नहीं आए

राजनांदगांव जिले में रहने वाले एएसआई भीष्म कतलम रविवार को तबीयत खराब हो गई। इसके बाद उसे दंतेवाड़ा के जिला हास्पिटल लाया गया था। जांच में पता चला कि उसे मलेरिया है। डॉक्टरों ने उसे हास्पिटल में ही भर्ती कर लिया। भीष्म की तबीयत रविवार रात को अचानक बिगड़ने लगी तो भीष्म के साथ आए जवानों ने वार्ड में तैनात स्टाफ नर्सों को इसकी जानकारी दी। साथी जवानों के अनुसार भीष्म रात में पेट में जलन और पेशाब बंद होने की शिकायत करता रहा लेकिन नर्सों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। बताया जा रहा है कि आपातकाल में एक डॉक्टर भी पूरी रात तैनात रहा लेकिन वह जवान को देखने नहीं आया।

साथी जवानों ने किया हंगामा, एसपी को आना पड़ा हाॅस्पिटल

इधर भीष्म की मौत के उसके साथी जवानों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हास्पिटल में जमकर हंगामा किया। जवानों का कहना था कि जान की बाजी लगाकर नक्सलियों से लड़ने जंगल में जाते हैं तो वहां मच्छरों का भी सामना करना पड़ता है। कई जवान मलेरिया पीड़ित भी हो जाते हैं लेकिन हास्पिटल में इलाज में लापरवाही से जान गंवाना दुर्भाग्यजनक है। जवानों को रोष को देखते हुए तुरंत ही मौके पर एसपी कमलोचन कश्यप, एएसपी गोरखनाथ बघेल पहुंचे और जवानों को शांत कराया।

डॉक्टर बोले-मुझे तो किसी ने बताया ही नहीं

इधर एएसआई की मौत की जानकारी मिलने पर ड्यूटी पर तैनात मेडिकल आफिसर डॉ. अविनाश का कहना था कि ड्यूटी रूम से किसी ने मरीज की तबीयत बिगड़ने के बारे में उन्हें नहीं बताया।

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