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खबर चली कि नक्सलियों ने ग्रे हाउंड और सीएम के दौरे के बाद बदला ले लिया लेकिन सच यह है कि नक्सली 3 माह से इंतजार कर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 14, 2018, 04:35 AM IST

खबर चली कि नक्सलियों ने ग्रे हाउंड और सीएम के दौरे के बाद बदला ले लिया लेकिन सच यह है कि नक्सली 3 माह से इंतजार कर रहे थे


किस्टारम के निकट नक्सली हमले के बाद सोशल मीडिया में कई खबरों ने ट्रेंड किया। ज्यादातर लोगों ने घर पर बैठे-बैठे ही इस घटना को बीजापुर में ग्रे-हाउंड के हमले में मारे गए नक्सलियों का बदला तो कुछ लोगों ने इसे इंजरम में सीएम डॉ. रमन सिंह के बाइक से घूमने वाली घटना का जवाब बताया। इसके अलावा एक खबर यह भी चली कि आईबी ने पहले ही बड़े हमले का अलर्ट जारी किया था और यह हमला अलर्ट के बाद ही हुआ है लेकिन सोशल मीडिया में चली इन खबरों के अलावा भी हमले का एक बड़ा सच था जिसे लोग भूल रहे थे।

इसी सच को जानने के लिए भास्कर ने अपनी पूरी टीम को इस इलाके में लगाया और घटना के चार घंटे के अंदर ही जंगल से निकली खबरों की मानें तो यह हमला किसी भी घटना या एनकाउंटर के जवाब में की गई कार्रवाई नहीं थी बल्कि यह नक्सलियों का सुनियोजित हमला था। इस हमले के लिए नक्सली तीन माह से इंतजार कर रहे थे और मंगलवार को नक्सलियों ने अपॉरच्युनिटी एबेंस के तहत नौ जवानों को शहीद कर दिया।

भास्कर तत्काल

एमपीव्ही को उड़ाने के घटनाक्रम में घायल जवान विस्फोट में मृत जवानों के शव

एक क्विंटल से ज्यादा विस्फोटक से उड़ाया वाहन को

टनों वजनी माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल को नक्सलियों ने बारुदी विस्फोट से उड़ा दिया। वाहन को उड़ाने के लिए लगभग एक क्विंटल 40 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल किए जाने का अनुमान है जबकि वाहन 60 किलो विस्फोटक ही सह सकता है।

बालोदी में कैंप खुलने के बाद से नक्सली बेचैन थे

कोर एरिया में फोर्स ने कैंप खोला था, डर था कि फोर्स आगे बढ़ेगी तो जमीन खिसक जाएगी इसलिए ताक में थे हमले के किस्टारम में कैंप खोलने के बाद जिला पुलिस बल ने पलोदी में भी एक कैंप की स्थापना करवाई थी। इस कैंप को शुरू हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। जिस स्थान पर कैंप खोला गया है वह नक्सलियों का कोर एरिया माना जाता है। यहां कैंप स्थापित होने के बाद से ही नक्सलियों में बेचैनी बढ़ गई थी और उन्हें लग रहा था कि फोर्स अब आगे भी नए कैंप खोलेगी। ऐसे में नक्सली यहां बड़ी वारदात कर जवानों को बैकफुट पर डालना चाहते थे और वह इसके लिए मौके की तलाश में थे।

पहले जवानों को घेरा पर जवान बच निकले, फिर छुट्‌टी से लौटने वाले जवानों के लिए लगाया अपॉरच्युनिटी एंबुश

पालोदी में कैंप स्थापित होने के बाद से नक्सली जवानों को मुंहतोड़ जवाब देना चाह रहे थे। मंगलवार की सुबह भी नक्सलियों ने जवानों को नदी किनारे घेरने की कोशिश की लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो पाए। यहां से भागने के बाद नक्सलियों ने इस इलाके को नहीं छोड़ा था। इसी बीच नक्सलियों को पता चला कि जवान दोबारा कैंप से निकले हैं तो इन्होंने आॅपर्चुनिटी एंबुश लगाया और छुट्‌टी से लौटने वाले जवानों की एमपीव्ही को विस्फोट कर उड़ा दिया।

बारुदी विस्फोट के बाद एमपीव्ही के मलबे में अपने साथियों की टोह लेते जवान।

सुकमा जिले का नक्शा

डीआरजी जवानों को हटाकर सीआरपीएफ की हुई तैनाती

बीते साल दिसंबर में ही किस्टारम से लगभग साढ़े चार किमी दूर पुलिस ने पालोड़ी में नया कैंप स्थापित किया था। इस कैंप को खोलने में डीआरजी जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शुरुआत में यहां डीआरजी के जवानों की तैनाती थी। बाद में कैंप से डीआरजी जवानों को हटाकर सीआरपीएफ 212 बटालियन की कंपनी तैनात कर दी गई।

एक साल में 50 जवान शहीद हुए सुकमा जिले में

11 मार्च 2017 भेज्जी के पास निर्माणाधीन सड़क की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ की 219 बटालियन के जवानों की टुकड़ी पर हुए नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हुए।

24 अप्रैल 2017 को बुरकापाल के पुल निर्माण कार्य की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ 74 बटालियन के जवानों की टुकड़ी पर हुए नक्सली हमले में 24 जवान शहीद।

24 जून को ऑपरेशन प्रहार के दौरान तोंडामरका में हुई मुठभेड़ में डीआरजी के 3 जवान शहीद और 6 जवान घायल हुए।

18 फरवरी 2018 में भेज्जी के एलाड़मड़गू में सड़क निर्माण कार्य की सुरक्षा में तैनात डीआरजी व एसटीएफ जवानों की टुकड़ी पर हमला। हमले में 2 जवान शहीद 6 जवान घायल हुए। हमले के दौरान माओवादियों ने एक पोकलेन मशीन और 9 टैक्‍टर भी फूंक दिए।

13 मार्च 2018 छुट्टी से लौटे सीआरपीएफ 212 बटालियन के जवान माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल में सवार होकर किस्टाराम से पालोड़ी कैंप लौट रहे थे इसी दौरान नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट कर बंकर को उड़ा दिया। वारदात में 9 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए और दो जवान गंभीर रुप से घायल हो गए।

बालोदी सीआरपीएफ कैंप

किस्टारम

सुबह 7 बजे जवान यहां से निकले थे लेिकन ढाई किमी की दूरी पर मुठभेड़ के बाद सभी टुकड़ियां वापस आ गई। फिर सुबह 11 बजे यहीं से निकले। सवा 12 बजे के करीब 3 िकमी का फासला तय करने के बाद जवानों के वाहन को नक्सलियों ने विस्फोट से उड़ा दिया। बालोदी के सीआरपीएफ कैंप से घटना स्थल की दूरी लगभग 8 किमी है।

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