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गुदुम-भानुप्रतापपुर रेललाइन पर ग्रामीणों का फिर धरना... रायपुर रेलवे विभाग के केके यादव का कहना है कि इनकी मांग...

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2018, 06:05 AM IST
गुदुम-भानुप्रतापपुर रेललाइन पर ग्रामीणों का फिर धरना...

रायपुर रेलवे विभाग के केके यादव का कहना है कि इनकी मांग उच्च अफसरों को भी मालूम है। गुरुवार को इस संबंध में चर्चा भी की गई थी। अब उच्च अफसर ही अपने स्तर पर कार्रवाई करेंगे। भानुप्रतापपुर विधायक मनोज मंडावी का कहना है कि रावघाट रेल परियोजना से प्रभावित लोगों की मांग जायज है।

रायपुर के टिंबर मार्केट में आग लगने से बेटे के साथ पति-प|ी जिंदा जले...

निवासी नीतेश बाड़देर व तेलीबांधा के पवन लाल को किराए पर दिया है। दोनों पार्टनर हैं। उन्होंने पटेल के मकान को बिजली सामान का गोदाम बना दिया है। इसी गोदाम में जय रजवाड़े सात-आठ साल से चौकीदार का काम कर रहा था। वह दुकान में काम करने भी जाता था। उनकी प|ी भी मजदूरी करने जाती थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बीती रात जय अपने परिवार के साथ रात साढ़े 10 बजे के आसपास सोया था। जय जिस मकान में रहता था, वह टिन शेड का था। घर के बाहर खाना पकाने के लिए लकड़ी रखा गया था। लोगों को आशंका है कि इसी लकड़ी की वजह से जय व उसके पूरे परिवार की मौत हुई। एक आशंका यह भी है कि चूल्हा में कोयला बुरी तरह बुझ नहीं पाया होगा और इसी से लकड़ी पर आग लग गई हो। जय के आस-पास के सर्वेंट क्वार्टर में शंकर कोर्राम काेंडागांव, मदन जगत राजा खरियार, गमेंद्र कांसी नगरी व जगदीश बुदेली कांकेर रहते हैं।

जन पर्यटन योजना- 15 महीने में रोजाना औसतन 5 लोग भी सैर के लिए नहीं मिले

राजधानी में करीब 15 महीने में 2157 लोगों ने रायपुर देखा। यानी एक दिन में औसतन 5 लोग ही रायपुर देखने के लिए पहुंचे। यही वजह है कि योजना की शुरुआत रोजाना बस चलाने से हुई, अब यह केवल शनिवार और रविवार को ही चल रही हैं। शहर के बीच घासीदास संग्रहालय से छूटने वाली यह बस पर्यटक नहीं होने पर इन दिनों कैंसिल की जा रही है। पर्यटन सूचना केंद्र के अफसरों का कहना है कि लोगों की संख्या के अनुसार ही बस मंगवाई जाती है। कम पर्यटक रहें तो बुकिंग कैंसिल करनी पड़ती है।

थाने और बाजारों में लगाए जाएंगे नक्सलियों के पोस्टर

का मास्टरमाइंड हिड़मा को ही माना जा रहा है। ऐसे में अब अफसर सीधे हिड़मा को टारगेट कर रहे हैं।

समर्पण किया तो फोटो पर हरा कट, एनकाउंटर पर लाल निशान :पुलिस की हिटलिस्ट में शामिल नक्सलियों के समर्पण करने या एनकाउंटर होने पर लिस्ट से फोटो नहीं हटाई जा रही है बल्कि समर्पण वाले नक्सली के फोटो के ऊपर हरा निशान और एनकाउंटर होने पर लाल कट का निशान लगाई जा रही है।

हिड़मा सुकमा में ही लेकिन हर दिन बदल रहा ठिकाना :

सुकमा में लगातार वारदातों को अंजाम देने के बाद भी हिड़मा ने जिला नहीं छोड़ा है। खुफिया रिपोर्टों की मानें तो वह सुकमा की भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठा रहा है। जंगल में अपने तगड़े नेटवर्क के कारण उसे फोर्स की हर गतिविधि पता रहती है। ऐसे में वह जवानों के पहुंचने से पहले ही अपना ठिकाना बदल रहा है। बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द बने हिड़मा को ट्रैप करने एक बड़ी प्लानिंग पर काम किया जा रहा है। इसके लिए डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा कमांडो को जंगलों में उतारा जाएगा।

हिड़मा की प|ी राजक्का भी लिस्ट में शामिल, भाई माड़वी नक्सलियों को पढ़ाता है :

हिड़मा की ज्यादा जानकारी किसी के पास नहीं है। लेकिन जानने वाले कहते हैं कि उसके परिवार के सदस्य भी नक्सलवाद को फैला रहे हैं। उसने दो शादियां की हैं। उसकी दूसरी प|ी राजक्का उर्फ राजे उसके साथ मिलिट्री अभियानों में हिस्सा लेती है। उसका एक भाई माड़वी नंदा नक्सलियों को पढ़ाता है। हिड़मा के दो अन्य भाई हैं पर वे इन कामों से दूर रहते हैं। उसके दूर के रिश्ते में आने वाले एक भाई ने नक्सलवाद से तौबा कर आंध्र में राइस मिल खोल ली है। हिड़मा पर छत्तीसगढ़ सरकार ने अलग-अलग वारदातों के बाद करीब 40 लाख रुपए का रखा है। टॉप वांटेड लिस्ट में उसका नाम पहले नंबर पर है।

छग के 11 संसदीय सचिवों की कांग्रेस ने की शिकायत, आयोग बोला- राज्यपाल से मिलें

अब कांग्रेस के पास कोई दूसरा मुद्दा बचा नहीं है। लिहाजा वह ऐसे विषयों को उठा रही है जिनका कोई औचित्य ही नहीं बचा है। निर्वाचन आयोग के रुख पर पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि समझ नहीं आता यहां एक देश और एक कानून क्यों नहीं है। दिल्ली के भीतर जब भाजपा वाले आम आदमी पार्टी के संसदीय सचिवों के खिलाफ शिकायत करते हैं तो राज्यपाल से लेकर चुनाव आयोग तक एक झटके में कार्रवाई कर देते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस मामले को लटका रखा गया है। मोदी एक देश, एक कर, एक कानून की बात करते जरूर हैं लेकिन भाजपा शासित राज्यों में इसका पालन कतई नहीं हो रहा है। बघेल ने कहा कि चुनाव आयोग ने जो कहा उसका पालन कांग्रेस करेगी। राज्यसभा प्रत्याशी लेखराम साहू के साथ कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलेगा और संसदीय सचिव मामले में शिकायत करेगा। दरअसल, मोदी सरकार और रमन सरकार को यह पता है कि यदि चुनाव आयोग ने संसदीय सचिवों को बर्खास्त कर दिया तो छत्तीसगढ़ सरकार अल्पमत में आ जाएगी। इसके साथ ही सरोज पाण्डेय चुनाव भी हार जाएंगी। साथ ही रमन सरकार भी गिर जाएगी। लिहाजा, दिल्ली से लेकर छत्तीसगढ़ तक हर स्तर पर संवैधानिक प्रक्रियाओं को दरकिनार राज्य सरकार को बचाने की साजिश रची जा रही है। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी की उम्मीदवार सरोज पाण्डेय की ओर से भरे गए नामांकन फार्म के सभी चार सेट में संसदीय सचिव प्रस्तावक हैं। ऐसे में भाजपा को घेरने के लिए कांग्रेस इनकी बर्खास्तगी की मांग कर रही है।

मतदान के बाद कांग्रेस को वास्तविक स्थिति समझ में आ जाएगी : मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने कांग्रेस की मांग पर कहा कि किसी भी तरह से इस मुद्दे को उठाना उचित नहीं है। संसदीय सचिवों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस पर फैसला जब आएगा, तब आएगा। राज्यसभा चुनाव को लेकर सीएम ने कहा कि जब-जब मतदान की स्थिति बनी है, बीजेपी को ही अतिरिक्त वोट मिले हैं। 23 मार्च को होने वाले निर्वाचन की प्रक्रिया के दौरान भी बीजेपी को ही अतिरिक्त वोट मिलेंगे। मतदान के बाद उन्हें भी वास्तविक स्थिति समझ आ जाएगी।

ये नेता रहे मौजूद : इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, कांग्रेस विधायक दल के नेता टीएस सिंहदेव, कार्यकारी अध्यक्ष शिवकुमार डहरिया, रामदयाल उईके, कांग्रेस विधायक दल के उपनेता कवासी लखमा, पूर्व मंत्री एवं विधायक सत्यनारायण शर्मा, सांसद ताम्रध्वज साहू, राज्यसभा सदस्य छाया वर्मा, कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार लेखराम साहू, पूर्व मंत्री अमितेश शुक्ल, विधायक अमरजीत भगत, मोहन मरकाम, संतकुमार नेताम, चुन्नी लाल साहू, बृहस्पति सिंह, पूर्व विधायक रमेश वर्ल्यानी, महंत रामसुंदर दास सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद थे।


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