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10 किलोमीटर तक गड्ढों में लकड़ी डालकर चलाई एंबुलेंस, तब मिला महिला को इलाज

मानव सेवा ही माधव सेवा है इस कहावत को चरितार्थ किया संजीवनी सेवा 108 में में काम करने वाले गाड़ी के चालक संजय दर्रो व...

Dainik Bhaskar

Jan 22, 2018, 08:20 PM IST
मानव सेवा ही माधव सेवा है इस कहावत को चरितार्थ किया संजीवनी सेवा 108 में में काम करने वाले गाड़ी के चालक संजय दर्रो व ईएमटी भरत ने। संंजीवनी सेवा में करने वाले दोनों कर्मचारी डायरिया से पीड़ित गोंडेरास की 45 वर्षीया आयते बाई की जान को बचाने के लिए कुआकोंडा से शाम 4 बजे निकले। पोटाली तक पहुंचने में कर्मचारियों को नहीं परेशानी नहीं हुई लेकिन यहां से 10 किमी दूरी तक जाने के लिए दोनों कर्मचारियों को दो घंटे से ज्यादा लग गया। गांव तक पहुंचने के लिए दोनों कर्मचारियों ने करीब 100 गड्ढों में जंगलों से लकड़ी तोड़-तोड़कर डाली और शाम सात बजे गांव पहुंचे। इसके बाद महिला का प्रारंभिक उपचार करने के बाद उसे गाड़ी में बिठाकर उसे उसके परिजनों की मौजूदगी में कुआकोंडा के सरकारी हास्पिटल तक लाकर भर्ती कराया। कुआकोंडा अस्पताल में महिला का उपचार चल रहा है। इलाज कर रहे डाक्टर्स के मुताबिक महिला की हालत अब सामान्य है। ईएमटी और चालक ने बताया कि पोटाली से गोंडेरास तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई थी लेकिन महिला की जान बचाने की जो जिम्मेदारी मिली थी उसे पूरा करना था। नतीजतन जान जोखिम में डाल गांव पहुंचे और महिला की जान बचाई।

पगडंडी ही है ग्रामीणों का सहारा : गौरतलब है कि गोंदेरास कुआकोंडा ब्लाक और सुकमा जिले के सीमा पर बसा हुआ गांव है। सुकमा से यहां तक पहुंचने के लिए कोई मार्ग नहीं है। ग्रामीण पगडंडी के सहारे आवाजाही कर रहे हैं। घोर नक्सल प्रभवित गांव में गांंदेरास तक जिला प्रशासन और जवान नहीं पहुंच सकें, इसलिए नक्सलियों ने सड़क को कई जगहाें पर काट दिया है।

भरत कुमार

संजय कुमार

8 साल में पहली बार गांव पहुंची थी संजीवनी 108

दंतेवाड़ा जिले में संजीवनी 108 की शुरूआत 8 साल पहले हुई थी लेकिन शनिवार की रात को एंबुलेंस पहली बार गांव पहुंची। एंबुलेंस के कर्मचारियों ने बताया कि जैसे ही गांव में एंबुलेंस पहुंची ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ग्रामीणों ने कहा कि अब उनके गांव में इस एंबुलेंस के पहुंचने से ग्रामीणों को सिरहा- गुनिया के भरोसे रहकर इलाज नहीं करवाना पड़ेगा। वे आसानी से हास्पिटल पहुंचकर उपचार करवा सकेंगे।

गड्ढे में ऐसे लकड़ियां डाल संजीवनी को गोंडेरास तक पहुंचाया।

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