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बिल्डिंग-टीचर्स के लिए छात्र गए कोर्ट...

बिल्डिंग-टीचर्स के लिए छात्र गए कोर्ट... दिल्ली में पटाखों को लेकर कोर्ट में याचिका दायर करने वाली बच्ची से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 28, 2018, 09:50 PM IST

बिल्डिंग-टीचर्स के लिए छात्र गए कोर्ट...

दिल्ली में पटाखों को लेकर कोर्ट में याचिका दायर करने वाली बच्ची से प्रेरित सभी स्टूडेंट्स ने अपने गांव से ही पढ़े वकील प्रदीप रापड़िया की मदद भी ली जिन्होंने बिना किसी फीस के इस केस को लड़ा। अब इसी गांव के करीब 15 बुजुर्गों और विकलांग मरीजों ने अस्पताल के लिए भी यही राह अपनाई है। गांव के ही समाज सेवक गुरदेव सिंह कहते हैं कि स्कूल के मामले में सफलता मिली तो हमने सोचा कि क्यों ना अस्पताल में डॉक्टर के लिए भी सरकार को इसी तरह याद कराएं। हरियाणा के कलायत को शिक्षा के मामले में सबसे पिछड़ा इलाका माना जाता है। यहां पर स्कूल में पिछले सात साल से साइंस का कोई टीचर नहीं है। 1992 में स्कूल सीनियर सेकेंडरी कर दिया गया लेकिन अब तक रैगुलर प्रिंसिपल नहीं है। 15 कमरे कंडम घोषित हो चुके हैं और आरएमएस स्कीम के तहत बने पांच कमरे ही उनके पास हैं जिसमें ऑफिस भी शामिल है। 12 वीं तक के इस स्कूल में बच्चों को बाहर बैठकर पढ़ना पड़ता था। स्कूली बच्चों सौरभ, अंकुश, मनजीत, अजय, अभिषेक, संजीत और मोहित ने पहले तो इस बारे में रिप्रजेंटेशन दी। जब बात बनती नहीं दिखी तो पेरेंट्स और इसी स्कूल के पूर्व स्टूडेंट व वकील रापड़िया की मदद ली। रापड़िया आठवीं तक इसी स्कूल से पढ़े हैं। कोर्ट ने डीसी और डीईओ को अपनी निगरानी में काम कराने को कहा। अब इस स्कूल के पुराने कमरे तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है और नवनिर्माण भी होगा। सरकार ने लिख दिया है कि वह इमारत बनाने के लिए पूरी रकम देंगे। कांट्रेक्ट पर टीचर भी दे दिए गए हैं। हालांकि एक पद अब भी खाली है। यही नहीं उनके इस केस की वजह से कोर्ट ने पूरे हरियाणा में टीचरों के खाली पड़े पद ही जानकारी मांगी है। इसके लिए उनको 30 जनवरी को जवाब देना है। इस सफलता से प्रेरित गांव के 13 बीमारों और बुर्जुर्गों ने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसमें 65 साल की संतो से लेकर 32 साल के जयवीर तक शामिल हैं। गांव ने वर्ष 2000 में सरकार को अपनी जमीन दी थी कि यहां पर अस्पताल बनाया जाए। सरकार ने अस्पताल तो बना दिया लेकिन इतने साल बाद भी इसमें 25 में से 22 पद खाली है। इनमें एक भी डॉक्टर नहीं है। आसपास के गांवों का भी यही हाल है। कलायत ब्लॉक लेवल के अस्पताल में आठ में से छह पद डॉक्टर्स के खाली हैं। रोजाना गांव में दो से ढाई तक ओपीडी मरीज 15 से 40 किलोमीटर का सफर तय करके अस्पताल तक पहुंचते हैं। बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की समस्या ज्यादा है। ग्रामीणों ने सिर्फ सरकार ही नहीं सभी पॉलिटिकल पार्टियों को भी लेटर लिखा था। इस केस में भी प्रदीप रापड़िया ही उनकी मदद कर रहे हैं। वह कहते हैं कि गांव का बेटा हूं इसलिए लोग जब मेरे पास आते हैं तो हरसंभव मदद करना मेरी जिम्मेदारी बन जाती है। इस केस में हरियाणा सरकार के साथ-साथ मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर को भी पार्टी बनाया गया है।

किसानों की आय दोगुनी होना तो दूर 2 वर्ष में रिपोर्ट ही आधी

मसलन नेशनल सेंपल सर्वे आर्गनाइजेशन एनएसएसओ के 2012-13 के आंकड़ों के अनुसान देश में किसान की औसत सालाना आय 77,976 हजार रुपए है वहीं 2011-12 के इंडियन ह्यूमन डेवलपमेंट सर्वे के मुताबिक किसानों की सालाना आय 97,779 रुपये है। कमेटी ने एनएसएसओ के आंकड़ों को ही आधार माना है।

लेकिन सबसे विचित्र बात यह है कि 2011 के अांकड़ों पर किसानों की आमदनी दुगनी करने की रिपोर्ट तैयार हो रही है, जबकि उसके बाद से किसानों के हालात में बहुत उतार चढ़ाव अाया है। देश के प्रमुख कृषि अर्थशास्त्री कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज के पूर्व अध्यक्ष अशोक गुलाटी ने किसानों की आमदनी दुगनी करने पर दैनिक भास्कर को यह प्रतिक्रिया दी, न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी। दुर्भाग्य की बात है कि जिस सरकार से सबसे ज्यादा उम्मीद थी, उसके कार्यकाल मंे भी यह काम नहीं पाएगा।- गुलाटी ने बताया कि अगर पांच साल में किसानों की आमदनी दुगनी करनी है तो हर साल कृषि विकास दर 10.4 फीसदी सालाना चाहिए थी, जबकि पिछले चाल साल में कृषि विकास दर घटकर 1.9 फीसदी रह गई है। यानी किसानों की आमदनी दुगनी करने तो क्या बढ़ाने के दिशा में भी कुछ भी काम नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि 2017-18 में किसानों की आमदनी 2.5 फीसदी घटी है।- किसानों की माली हालत पर नजर डालें तो जुलाई 2012 से जून 2013 के बीच भारत के किसान की औसत मासिक आय 6426 रुपये और आैसत मासिक खर्च 6223 रुपए था। यानी किसान हर महीने महज 203 रुपये की बजत करनी की हालत में था। वहीं इस सर्वे के बाद से कृषि विकास दर में गिरावट आई है, यानी किसान की आमदनी भी घटी ही होगी।

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कमेटी के अध्यक्ष दलवई ने बताया, हमारी कोशिश है कि फरवरी के अंत तक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाए। रिपोर्ट में देर होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार होने के साथ ही इस पर अमल का काम भी चल रहा है। उन्होंने बताया कि कृषि मंडियों को लेकर कानून का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। हालांकि रिपोर्ट लागू होने के सवाल पर उन्होंने कहा कहा कि, कमेटी सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी, उसके बाद कब और कैसे अमल करना है यह सरकार का काम है।

चार साल में 50 हजार से अधिक किसानों ने की आत्महत्या

नरेंद्र मोदी सरकार लगातार किसानों के लिए बड़े पैमाने पर काम करने का दावा करती रही है। लेकिन किसानों की आत्महत्या की दर में कोई खास कमी नहीं आई है। क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक देश में 2012 में 13754, 2013 में 11772, 2014 में 12360 और 2015 में 12602 किसानों ने आत्महत्या की।

पद्मावत की कमाई चार दिन में 100 करोड़ ...

हालांकि दूसरी तरफ फिल्म ट्रेड विश्लेषक गिरीश जौहर को बिजनेस से ज्यादा चिंता लोगों की सुरक्षा की है। वे कहते हैं- फिल्म की कमाई को लेकर एक अनुमान था कि यह पहले ही दिन 20 करोड़ कमाएगी, लेकिन इससे मिले सिर्फ 5 करोड़ रुपए। हमारी चिंता दर्शकों की सुरक्षा और सरकार के मूक दर्शक बने रहने को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक का पालन नहीं हो रहा है। हालांकि वे कहते हैं कि फिल्म विदेशी धरती पर अच्छा कर सकती है। पाकिस्तान में भी इसके प्रदर्शन को अनुमति मिल गई है। यूएसए और यूके में भी फिल्म को अच्छे स्क्रिन मिले हैं। यहां से अच्छे मुनाफे कीउम्मीद फिल्म को है। मेहरा भी इस बात से सहमत हैं। वे कहते हैं उम्मीद है कि विशेष रूप से यूरोपीय देशों में फिल्म अच्छा कर सकती है। मैंने सुना है 21 देशों में फिल्म प्रदर्शित हो रही है। जबकि नाहटा को भरोस है कि फिल्म विदेशों में कमाई के मामले में पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी।

हालांकि आंकड़ों के लिहाज से देखें तो भारत में पद्मावत 3500 स्क्रीन पर आई है, और विदेशों में 800 स्क्रीन पर लगी है। जबकि संजय लीला भंसाली की ही इसी स्टार कास्ट के साथ आई फिल्म बाजी राव मस्तानी को देखें तो वह भारत में 2700 स्क्रीन पर लगी थी, जबकि विदेशों में 850 स्क्रीन पर। यानी विदेशों में पद्मावत को उससे कम स्क्रीन मिले हैं। जबकि बाजीराव मस्तानी के साथ तो शाहरुख की दिलवाले भी प्रदर्शित हुई थी।

डिजिटल और सैटेलाइट राइट्स को देखें तो डिजिटल राइट्स के मामले में यह बाहुबली के करीब पहुंच गई है। बाहुबली के डिजिटल राइट्स नेटफ्लिक्स ने 25.5 करोड़ रुपए में खरीदे थे। जबकि पद्मावत के राइट्स अमेजन प्राइम ने 25 करोड़ रुपए में लिए हैं। फिल्म के सैटेलाइट राइट्स अभी बेचे नहीं गए हैं।

ट्रांसफर न हो जाए इस डर से 35 साल से किसी ने नहीं करवाया मंदिर निर्माण

2009 से 2010 तक यहां सीआई रहे वीरेंद्र सिंह बताते है कि मेरी तैनाती के दौरान मंदिर में मूर्ति स्थापित नहीं थी। मैंने साफ-सफाई के साथ आसपास तारबंदी करवाई। फिर मंदिर का निर्माण पूरा करवाने का भी सोचा, लेकिन इतने में ही मेरा पोकरण ट्रांसफर हो गया। वहीं हाल में पाली के पदस्थापित बंशीलाल रामावत ने बताया कि मैं पहले 2006 और बाद में जनवरी 2013 से जून 2013 तक शेरगढ़ में थानाधिकारी रहा। स्टाफ का सहयोग नहीं मिलने के कारण मंदिर नहीं बनवा पाया। दूसरी बार फिर जब तैनाती हुई तो कोशिश भी की, लेकिन फिर तबादला हो गया। अब वर्तमान थानाधिकारी भवानीसिंह का कहना है कि मैं अभी यहां नया आया हूं। मैं ऐसी किसी मान्यता को नहीं मानता। यदि मेरे कार्यकाल में मंदिर का निर्माण शुरू हुआ तो हर संभव सहयोग दिया जाएगा। समाजसेवी खीमाराम परमार का कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए पुलिस अधिकारियों व समाजसेवियों को आगे आने चाहिए।

जगन्नाथ मंदिर को 160 टन स्टील से दे रहे हैं सहारा

मंदिर का काम देख रहे एएसआई के सीनियर कंजर्वेटिव ऑफिसर जेसी दाश ने बताया कि जगन्नाथ प्रभु के गर्भगृह और जगमोहन मंडप जुड़े हुए हैं। इसके बाद नाट्य मंडप और भोग मंडप है। गर्भगृह के सामने ही जगमोहन हॉल है, जिसमें मरम्मत और सुधार का काम किया जा रहा है। मंदिर के भार और कहीं-कहीं से पानी के रिसाव के कारण पिलर्स और उसके बेस में दरार आ गई। साथ ही जगह-जगह से पत्थर के टुकड़े गिर गए। इसे सुधारने के लिए बेस तो नहीं हटा सकते, क्योंकि मंदिर का भार एक हजार टन से ज्यादा है। इसलिए जिन जगहों में दरार थी, वहां ट्रीटमेंट किया गया है। इसके साथ जहां पत्थर टूट गए हैं या क्रेक हो गए हैं, वहां उस साइज का ही दूसरा पत्थर बनाकर उसे फिट किया गया है। मंदिर के भार से पिलर्स में पड़ी दरारों को भरा गया है और इसकी मरम्मत की गई है। गर्भगृह के सामने जगमोहन मंडप में लगे चारों स्तंभ (पिलर्स) से जोड़ते हुए डेढ़-दो फीट का स्टेनलेस स्टील का बेस तैयार किया गया है। इस तरह से स्टील के पिलर्स खड़े किए गए हैं कि पुराने पत्थरों के पिलर्स से अलग न दिखाई दें। स्टील और मंदिर के पुराने पत्थर के पिलर्स अलग-अलग न दिखाई दें, इसलिए नए पिलर्स को स्टोन से कवर किया जा रहा है। 30 फीट ऊंचे हॉल में करीब 15 फीट पिलर्स को स्टोन से ढंका जाएगा। हॉल में ऊपर किए गए स्टील के काम और बेस न दिखाई दे, इसलिए 15 फीट की ऊंचाई में लकड़ी की सीलिंग लगाई जा रही है। इस लकड़ी के फ्रेम में पद्मविभूषण शिल्पकार रघुनाथ महापात्रा के कारीगर ओडिशा की सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी कलाकृति दर्शाएंगे। इस रेनोवेशन में करीब 6 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इससे पहले हुए बाहर के काम में 1.5 करोड़ रुपए लगे थे।

जगन्नाथ मंदिर पुरी के जनसंपर्क अधिकारी लक्ष्मीधर पूजा पंडा ने बताया कि जगन्नाथ मंदिर परिसर में भगवानों के करीब 137 छोटे-बड़े मंडप हैं। इनमें से गर्भगृह के ऊपरी मंदिर के हिस्से का 1976 और 1996 तक काम किया गया है। उस दौरान मंदिर के अंदर कोई काम नहीं हुआ, बल्कि बाहर आई दरार और चक्र को लेकर ट्रीटमेंट किया गया। इसके बाद एएसआई के नियमित होने वाले सर्वे में दो साल पहले जगमोहन मंडप के अंदर लगे पिलर्स में आई दरार और उसके बेस का पत्थर टूट कर खिसकना पाया गया। इसके सुधार के लिए काम जनवरी 2016 में शुरू हुआ।

सबसे महंगे नीलाम हुए टॉप-10 खिलाड़ियों में सिर्फ एक 30 साल से अधिक का ...

टीमों का जोर ऐसे खिलाड़ियों पर रहा जो अपने फन में माहिर तो हों, साथ ही अगले कुछ साल तक टीम को संभाल कर रख सकें। इस बात की झलक शनिवार को नीलाम हुए खिलाड़ियों में टॉप-10 पर लगी बोली से मिलती है। इन खिलाड़ियों की औसत उम्र 26 साल है और इनमें सिर्फ एक (केदार जाधव) ही 30 साल के ज्यादा के हैं।

नकुलनार में कांग्रेस नेता अवधेश के घर नक्सलियों का दिनदहाड़े हमला ...

उसी रास्ते पर जवानों को भेजा गया है।

बड़ी चूक : सुरक्षा में लगे कुछ जवान बाजार घूमने गए थे तो कुछ छत पर खाना बना रहे थे :

अवधेश गौतम को करीब 18 सुरक्षाकर्मी दिए गए हैं इनमें 6 पीएसओ सीएफ से हैं। जिला बल के भी 12 जवान इनकी सुरक्षा में लगाए गए हैं। सभी जवानों के पास स्वचालित हथियार हैं। ज्यादातर के पास एके-47 और इंसास हैं। घटना के दौरान ड्यूटी शिफ्टिंग का समय था। यहां तैनात 18 जवानों में से कुछ बाजार घूमने गए थे। कुछ अवधेश गौतम के घर की छत पर थे और कुछ खाना बनाने में मशगूल थे। घटना के दौरान ड्यूटी शिफ्टिंग के लिए तीन जवान उपर छत में जाने के लिए निकले दो जवान आगे बढ़ गया तीसरा नीचे था। दो जवान जैसे ही उपर चढ़े तो नक्सलियों ने इसे पकड़ लिया। चूंकि इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से कोई जवान तैयार नहीं था। सभी दीगर कामों में मशगूल थे। ऐसे में नक्सली बड़े ही आराम से हथियार लूट ले गए।

कई सवाल जिनकी जांच जरूरी

अवधेश की सुरक्षा में लगे जवान सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं कर रहे थे।

किसके आदेश पर जवान बाजार घूमने गए थे।

नक्सलियों की स्माल एक्शन टीम ने जवान को पकड़ा उससे हथियार लूटा पर उसे बड़ा नुकसान क्यों नहीं पहुंचाया।

नक्सलियों ने अवधेश के घर के कुछ गेट भी बंद किए ऐसे में सवाल यह है कि नक्सली घर के अंदर कैसे आए।

हथियार लूटने के बाद नक्सलियों के पास जवान को गोली मारने और घर पर फायरिंग करने का पर्याप्त समय था पर उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया।

नक्सली हथियार लूटने पहुंचे थे या उनके निशाने पर अवधेश थे। यदि निशाने पर अवधेश थे तो उन्होंने आगे की कार्रवाई को क्यों अंजाम नहीं दिया।

नक्सलियों को पता था कि अवधेश को जेड सुरक्षा मिली है, फिर भी वे सिर्फ हथियार लूटने ही यहां क्यों आए।

घटना के 12 घंटों बाद भी चार लोग एक-47 लेकर घूमते हैं लेकिन इसकी खबर पुलिस तक क्यों नहीं पहुंचती।

सुकमा में मुठभेड़ के दौरान एक महिला समेत दो नक्सली ढेर ...

इसके बाद रुक-रुक कर यहां काफी देर तक फायरिंग होती रही। लेकिन जवानों को भारी पड़ता देख नक्सली भाग खड़े हुए। मौके पर सर्चिंग करने पर दो नक्सलियों के शव मिले। एसपी अभिषेक मीणा ने बताया बताया कि मारे गए नक्सलियों का शव पीएम के लिए रविवार को हेलिकॉप्‍टर से जिला मुख्यालय लाया जाएगा।

जशपुर में विषाक्त हड़िया पीने से 3 लोगों की मौत ...

बीएमओ को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही बीएमओ ने एंबुलेंस भेजकर सभी बीमार मजदूरों को अस्पताल पहुंचाया, जहां से दो की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हेंं अंबिकापुर के लिए रेफर कर दिया गया। रास्ते में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बतौली के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां दोनों की मौत हो गई। इसी बीच बगीचा के अस्पताल में भी एक व्यक्ति की मौत हो गई।

अफगानिस्तान : तालिबान आतंकी ने एंबुलेंस में विस्फोटक लेकर चौराहे पर किया धमाका, 95 की मौत, 151 घायल

कि वह मरीज को अस्पताल ले जा रहा है और दूसरे चेकप्वाइंट से पहले भीड़भाड़ वाले स्थान पर विस्फोट कर दिया। धमाके की आवाज कई किमी दूर तक सुनाई दी और आसपास धुआं भर गया। सरकारी मीडिया सेंटर के बर्यालई हिलाली ने कहा कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि अस्पताल में भर्ती कई घायलों की हालत गंभीर है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली बोले- जीएसटी प्रणाली में स्थिरता आई ...

काउंसिल के सदस्य और बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने संकेत दिए थे कि भविष्य में 12% और 18% की टैक्स स्लैब को मिलाकर नया स्लैब बनाया जा सकता है। नई दर इनके बीच की हो सकती है। इससे पहले नवंबर में वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन भी कह चुके हैं कि भविष्य में 12% और 18% के जीएसटी स्लैब मिलाए जा सकते हैं।

तिरंगा यात्रा पर भिड़े दो समुदाय ...

आगजनी और तोड़फोड़ होती रही। शनिवार को चंदन के अंतिम संस्कार के बाद एक बार फिर हिंसा भड़क गई। भीड़ ने दो बसें और चार दुकानें जला दीं। दो दिनों में में 50 से ज्यादा वाहनों में तोड़फोड़ हुई। हिंसा में पुलिसकर्मियों सहित छह लोग घायल हो गए।

ट्रम्प को गिफ्ट किया गोल्डन टॉयलेट अमीरों के शौक पर व्यंग्य का प्रतीक है

ये गोल्डन टॉयलेट 18 कैरेट सोने से बना है। व्हाइट हाउस ने अब तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। गुगेनहाइम म्यूज़ियम की अध्यक्ष नैंसी स्पेकटर ने व्हाइट हाउस को किए अपने ई-मेल में लिखा- ‘हमें खेद है कि हम आपको लैंडस्केप विद स्नो पेंटिंग तो नहीं दे सकते। हम इस पेंटिंग को कुछ खास मौकों के अलावा कभी म्यूजियम से बाहर नहीं निकालते। इसके बदले में हम व्हाइट हाउस को गोल्डन टॉयलेट ऑफर कर रहे हैं। इटली के कलाकार मॉरिटिज्यो कैटेलान का बनाया ये गोल्डन टॉयलेट हम व्हाइट हाउस को लंबे समय के लिए दे सकते हैं। अगर व्हाइट हाउस चाहे तो हम इसे फिट कराने और इसकी देखभाल करने की जानकारी भी उन्हें दे सकते हैं।’ वेन गॉग की ये पेंटिग 1888 में बनाई गई थी। इसे म्यूजियम के सहयोगी संस्थानों में गेगनहाइम के मालिकों की अनुमति से ही प्रदर्शित किया जाता है।

वहीं गोल्डन टॉयलेट को अमेरिका में अमीरों के तमाम महंगे और गैरजरूरी शौक पर व्यंग्य के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। म्यूजियम में इस टॉयलेट का नाम भी व्यंग्यात्मक अंदाज में अमेरिका रखा गया है। म्यूजियम में इस गोल्डन टॉयलेट को चालू हालत में रखा गया है। अब तक अमेरिका के एक लाख से ज्यादा अमीर लोग इस गोल्डन टॉयलेट का इस्तेमाल भी कर चुके हैं।

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