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प्रेमनगर नगर पंचायत को फिर से ग्राम पंचायत बनाने की मांग एक वोट से हार गई

प्रेमनगर| सूरजपुर जिले के नगर पंचायत प्रेमनगर को भंग कर फिर से ग्राम पंचायत का दर्जा देने की मांग पर कराई गई वोटिंग...

Dainik Bhaskar

Mar 25, 2018, 03:40 AM IST
प्रेमनगर| सूरजपुर जिले के नगर पंचायत प्रेमनगर को भंग कर फिर से ग्राम पंचायत का दर्जा देने की मांग पर कराई गई वोटिंग में नगर पंचायत के पक्ष में खड़े लोग जीत गए हैं।

नगर पचंायत के पक्ष में पार्षदों के 8 जबकि ग्राम पचंायत के पक्ष में सात वोट पड़े। इस तरह से एक वोट से ग्राम पंचायत के सर्मथन में खड़े लोग हार गए। क्राॅस वोटिंग के कारण यह स्थिति बनी। भाजपा यहां नगर पंचायत में सत्ता में जबकि कांग्रेस और झोपड़ी पार्टी विपक्ष में हैं। वोटिंग में हार के बाद दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर क्राॅस वोटिंग का आरोप लगा रहे हैं। लंबे समय से चल रही इस मांग पर राज्य शासन ने अध्यक्ष व पार्षदों की वोटिंग कराने के निर्देश दिए थे। एसडीएम विजेंद्र पाटले की मौज्ूदगी में शनिवार को वोटिंग हुई, जिसमें नगर पंचायत के समर्थन में जीत हासिल हुई। यहां अध्यक्ष के अलावा 5 पार्षद भाजपा के हैं पर नपं के समर्थन में 8 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 7 वोट पड़े। एक वोट रिजेक्ट हो गया। वोटिंग के बाद एसडीएम ने परिणाम की घोषणा की। कांग्रेस विधायक खेलसाय सिंह व सूरजपुर जिपं अध्यक्ष अशाेक जगते व भाजपा की ओर से मंडल अध्यक्ष सहित क्षेत्र के बड़े नेता सक्रिय रहे। दुलर बाई यहां नपं अध्यक्ष हैं। ग्राम पंचायत से नगर पंचायत का 2009 में दर्जा दिया गया था और वे तब सरपंच थी। नगर पंचायत बनने के बाद उन्हें अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद हुए चुनाव में उनके पति अध्यक्ष बने और इसके बाद वे अध्यक्ष चुनी गई।

कांग्रेस और झोपड़ी पार्टी का एक-दूसरे पर क्राॅस वोटिंग का आरोप

नगर पंचायत में कांग्रेस और झोपड़ी पार्टी एकसाथ थे और दोनों ने मिलकर उपाध्यक्ष बनाया था। तय हुआ था कि ढाई-ढाई साल दोनों दल के उपाध्यक्ष रहेंगे लेकिन नगर पंचायत के पक्ष और विपक्ष को लेकर कराए गए वोटिंग में दोनों दल एक दूसरे पर क्रास वोटिंग का आरोप लगा रहे हैं। सूरजपुर के जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक जगते इसी क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि हम शुरू से नगर पंचायत के विरोध में हैं। हमारे तीनों पार्षदों ने इसके विरोध में मतदान किया। झोपड़ी पार्टी वालों ने धोखा दे दिया। इधर झोपड़ी पार्टी के नगर पंचायत उपाध्यक्ष आलोक ने बताया कि हम शुरू से नगर पंचायत को ग्राम पंचायत किए जाने की मांग कर रहे हैं।

मनरेगा का लाभ नहीं मिलने व नगर पंचायत टैक्स से होता रहा विरोध

ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बनने के बाद से यहां के लोग विरोध करते आ रहे हैं। पिछले साल नगर पंचायत के चुनाव से पहले स्थानीय लोगों ने झोपड़ी पार्टी बना छह माह इसके विरोध में धरना दिया था। लोगों का कहना है कि नगर पंचायत के लायक प्रेमनगर नहीं है। नपं बनने के बाद लोग वन अधिकार पत्र, मनरेगा जैसी योजनाओं से दूर हो गए है, जबकि नगर पंचायत के टैक्स लगने लगा है।

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