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तारा-रामानुजनगर के बीच छह महीने में सड़क खोदकर मिट्टी व गिट्टी डाल भूले

भास्कर संवाददाता | प्रेमनगर तारा से रामानुजनगर के बीच डेढ़ अरब से करीब 50 किमी लंबी सड़क को बनाने छह महीने पहले काम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 19, 2018, 03:20 AM IST

भास्कर संवाददाता | प्रेमनगर

तारा से रामानुजनगर के बीच डेढ़ अरब से करीब 50 किमी लंबी सड़क को बनाने छह महीने पहले काम शुरू हुआ था लेकिन अभी तक कुछ हिस्से में सड़क खोदकर सिर्फ मिट्‌टी डालने के अलावा कुछ नहीं हो पाया है। बारिश से पहले बेस तैयार नहीं होने से लोगों को मुसीबत हो सकती है।

सड़क विकास निगम द्वारा सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इससे पहले तारा से कृष्णपुर के बीच सड़क बनाई गई थी पर कोयला लोड गाड़ियां चलने से यह उखड़ गई। फिर से तारा से रामानुजनगर के बीच करीब 50 किमी तक सड़क बनाने शासन से स्वीकृति मिली है। करीब छह महीने पहले अभयपुर से रामानुजनगर के बीच सड़क खुदाई का काम शुरू किया था। कुछ जगहों पर काम के नाम पर गिट्टी डालकर छोड़ दिया है। पूरे हिस्से में मिट्‌टी व गिट्‌टी के फैलने से अब तक कई लोग हादसे का शिकार हो चुके हैं। सूखे में धूल की मार झेल रहे लोगों को बारिश में होने वाली चिंता सता रही है। इस बार तारा से रामानुजनगर के बीच करीब पचास किमी तक सड़क बनाने की स्वीकृति मिली है।

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खराब सड़क के कारण लंबे रास्ते से जाना मजबूरी

सड़क बनाने में लेटलतीफी से लोगांे की फजीहत हो रही है। लाेगों को प्रेमनगर से जिला मुख्यालय सूरजपुर जाने दूसरा रूट अपनाना पड़ रहा है। मेन रोड की हालत खराब है। कोयला लोड वाहनों के कारण सड़क चलने लायक नहीं बीच है। इसलिए लोगों को सूरजपुर जाने के लिए रघुनाथपुर से उमेश्वरपुर होते हुए जाना पड़ता है। इस चक्कर मेंे 20 किमी और लंबा सफर तय करना पड़ता है।

तारा से मेंड्रा तक सड़क में दो-दो फीट के गड्‌ढे

तारा से रामानुजगंज के बीच सड़क विकास निगम को निर्माण का जिम्मा मिलने के बाद से पीडब्ल्यूडी भी पैच रिपेयरिंग या अन्य मरम्मत के कार्य नहीं कराता। इस चक्कर में तारा से मेंड्रा के बीच की सड़क मेंे दो-दो फीट के गड्‌ढे बन गए हैं। करीब दस किमी लंबे इस रूट को तय करने में घंटे भर से ज्यादा का समय लग जाता है।

वन विभाग की जमीन का पेच भी परेशानी का कारण

सड़क निर्माण में वन विभाग का पेच फंसा है। तारा से रामानुजनगर के बीच करीब 15 किमी का हिस्सा वन विभाग के अधीन होने से निर्माण की स्वीकृति नहीं मिल रही है। इसी कारण विभाग के हिस्से को छोड़ बाकी हिस्से में काम शुरू किया गया है। विभाग से जमीन का मामला क्लीयर नहीं होने से निर्माण शुरू करने का मामला लटका है। इससे सड़क पूरी तरह तैयार होने में देर हो सकती है।

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