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बस स्टैंड के टॉयलेट का काम सालों से अधूरा, गंदगी से संक्रमण की आशंका

Surajpur News - मुख्यालय के बस स्टैंड के इकलौते टायलेट का काम सालों से अधूरा पड़ा है। नगर पालिका बनने के बाद यहां कई काम हुए लेकिन...

Dainik Bhaskar

May 24, 2018, 02:45 PM IST
बस स्टैंड के टॉयलेट का काम सालों से अधूरा, गंदगी से संक्रमण की आशंका
मुख्यालय के बस स्टैंड के इकलौते टायलेट का काम सालों से अधूरा पड़ा है। नगर पालिका बनने के बाद यहां कई काम हुए लेकिन जनहित से जुड़े काम अब तक अधूरे पड़े हैं। बस स्टैंड जैसी जगह मेंे जहां रोज सैकड़ों लोगों का आना-जाना लगा रहता है, वहां आधे-अधूरे टायलेट के कारण लोगोंे को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। इतना सब कुछ होते हुए भी नगर पालिका इसकी मरम्मत कराने दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।

नगर के मुख्य बस स्टैंड की बदहाली की तस्वीरें जो सामने आई हैं उससे नगर में स्वच्छ भारत अभियान की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। नगर को साफ-सुथरा बनाने के लिए हाल के वर्षों में कई काम हुए, लोगोंे में इसे लेकर जागरुकता भी आई लेकिन किसी काम या योजना की सही मानिटरिंग नहीं होने से उसका लाभ लोगों को नहीं मिल पाता। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण बस स्टैंड का टायलेट है जिसे मरम्मत कराने के नाम पर सालों से बदहाल स्थिति मेंे छोड़ दिया गया है। यदि कोई यात्री बस स्टैंउ के इस टायलेट का उपयोग करता है तो उसे संक्रमण होने की पूरी आशंका बनी रहती है।

जिला मुख्यालय के भीतर साफ सफाई की यह दशा है तो इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि दूर दराज के क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान की क्या तस्वीर होगी। जिस टायलेट का सुधार कार्य बरसोंे से लटका हुआ है उसे ठेके पर कराया जा रहा है।

टॉयलेट की मरम्मत कराने के लिए नगर पालिका नहीं दिखा रहा दिलचस्पी

बस स्टैंड का बदहाल टाॅयलेट।

भास्कर संवाददाता|सूरजपुर

मुख्यालय के बस स्टैंड के इकलौते टायलेट का काम सालों से अधूरा पड़ा है। नगर पालिका बनने के बाद यहां कई काम हुए लेकिन जनहित से जुड़े काम अब तक अधूरे पड़े हैं। बस स्टैंड जैसी जगह मेंे जहां रोज सैकड़ों लोगों का आना-जाना लगा रहता है, वहां आधे-अधूरे टायलेट के कारण लोगोंे को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। इतना सब कुछ होते हुए भी नगर पालिका इसकी मरम्मत कराने दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।

नगर के मुख्य बस स्टैंड की बदहाली की तस्वीरें जो सामने आई हैं उससे नगर में स्वच्छ भारत अभियान की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। नगर को साफ-सुथरा बनाने के लिए हाल के वर्षों में कई काम हुए, लोगोंे में इसे लेकर जागरुकता भी आई लेकिन किसी काम या योजना की सही मानिटरिंग नहीं होने से उसका लाभ लोगों को नहीं मिल पाता। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण बस स्टैंड का टायलेट है जिसे मरम्मत कराने के नाम पर सालों से बदहाल स्थिति मेंे छोड़ दिया गया है। यदि कोई यात्री बस स्टैंउ के इस टायलेट का उपयोग करता है तो उसे संक्रमण होने की पूरी आशंका बनी रहती है।

जिला मुख्यालय के भीतर साफ सफाई की यह दशा है तो इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि दूर दराज के क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान की क्या तस्वीर होगी। जिस टायलेट का सुधार कार्य बरसोंे से लटका हुआ है उसे ठेके पर कराया जा रहा है।

मुख्यालय होने के बाद भी अधिकारी नहीं देते ध्यान

जिला मुख्यालय होने के कारण लोगों को उम्मीद थी कि जल्दी से टायलेट का काम पूरा हो जाएगा लेकिन अधिकारी भी इसे लेकर ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। जहां एक ओर सरकार घर-घर टायलेट बनाने की बात कह रहा है वहीं जिले से इस तरह की तस्वीरंें सामने आने से सरकार की कार्यप्रणाली पर एक सवाल उठता है।

सीएमओ ने समस्या को लेकर नहीं दिए जवाब

इस संबंध में नगर पालिका के सीएमओ घनश्याम शर्मा से टॉयलेट के अधूरे निर्माण के संबंध में पूछने पर उन्होंने कहा कि ठेके पर काम दिया गया है। कितनी राशि इस पर खर्च हो रही है तो उन्होंने कहा कि इसका पता नहीं है। सब इंजीनियर ही बता पाएगा। जब उसका मोबाइल नंबर मांगा गया तो उन्होंने टाल मटोल कर नंबर भी नहीं दिया।

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