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57 साल से संचालित बिश्रामपुर ओसीएम खदान में इसी माह खत्म हो जाएगा कोयला

भास्कर संवाददाता|बिश्रामपुर एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के सबसे पहली व पुरानी खदान ओसीएम मंे कोयले का भण्डार...

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2018, 04:30 AM IST
57 साल से संचालित बिश्रामपुर ओसीएम खदान में इसी माह खत्म हो जाएगा कोयला
भास्कर संवाददाता|बिश्रामपुर

एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के सबसे पहली व पुरानी खदान ओसीएम मंे कोयले का भण्डार समाप्ति के कगार पर पहंुच गया है। बताया जाता है कि उक्त खदान पखवाड़े भर या फिर अप्रैल अंत तक ही कोयला उत्पाद में क्षेत्र को सहयोग कर पाएगा।

बिश्रामपुर क्षेत्र में कोयला खदानों की शुरुआत 1961 में हुई थी। 21 जनवरी 1961 को ओसीएम खदान शुरू हुआ। नवंबर 1964 में ड्रग लाइन मैरियन शिव व शक्ति बिश्रामपुर पहंुची। उक्त दोनों ड्रग लाइन मशीन कोल प्रबंधन ने अमेरिका से खरीदी थी। दैत्याकार ड्रग लाइन शिवा 47 वर्ष तक क्षेत्र को कोयला उत्पादन में सहयोग देकर विश्रामपुर क्षेत्र के अलग पहचान स्थापित की। 2017 में शिवा को प्रबंधन ने सर्वे अाफ घोषित कर दिया जबकि शक्ति निरंतर क्षेत्र को कोयला उत्पादन से मदद प्रदान कर रही है। गौरतलब है कि ओसीएम खदान में अनुमानित कोयले का भंडार 36 मिलियन टन था। 1961 से संचालित उक्त खदान 57 वर्षों से निरंतर कोयले का उत्पादन करते हुए अब तक 38 मिलियन टन कोयला प्रोडक्शन कर चुकी है। एक मिलियन टन करीब दस लाख टन के बराबर होता है।

वर्तमान में विश्रामपुर ओसीएम मंे दस नंबर क्वारी से कोयला प्रोडक्शन चल रहा

सोलर प्लांट से लोगांे को काफी उम्मीदें

ऊर्जा के लिए कोयले पर निर्भरता कम करने के सरकारी प्रयास के तहत कोल इंडिया ने देश भर में चार राज्यों मंे सौर उर्जा प्लांट लगाने की कार्य योजना को मंजूरी प्रदान कर दिया है । इस पर कोल इंडिया सात हजार करोड़ राशि खर्च करने का प्रस्ताव है । अभी छत्तीसढ़ मेंे जमीन फाइनल करने की प्रक्रिया चल रही है। छत्तीसगढ़ में लगने वाले सोलर पावर प्लांट बिश्रामपुर क्षेत्र में स्थापित हाेगा। यहां 662 मेगावाट का प्लांट तैयार किये जाने की योजना है। सोलर पावर प्लांट के लिए साढ़े तेरह सौ हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। खुली खदानों की उबड़ खाबड़ भूमि को समतल कर इस योजना को मूर्तरूप दिया जाएगा।

सात नम्बर क्वारी चलाने परीक्षण के लिए चल रही है प्रक्रिया

बताया गया है कि आेसीएम खदान के क्वारी नम्बर सात में करीब पांच लाख टन कोयले का भण्डार है लेकिन उसकी गुणवत्ता को लेकर संशय की स्थिति है। क्वालिटी को लेकर क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा सीएमडीपीआई को पत्र लिखकर इसका सर्वे करने का अनुरोध किया गया है । प्रबंधन के मुताबित अगर कोयले की गुणवत्ता ठीक मिली तो प्रबंधन बचे हुए पैच से कोयला निकालेगा वरना खदान को बंद कर दिया जाएगा ।

लक्ष्य से अधिक होता रहा कोयला उत्पादन

बिश्रामपुर ओसीएम खदान क्षेत्र की सबसे पुरानी खदान होने के बावजूद अपने अंतिम पड़ाव में भी लक्ष्य से अधिक उत्पादन कर क्षेत्र की लाज बचाने कई बार मददगार साबित हुई । वित्तीय वर्ष मंे उक्त खदान ने एक लाख टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा पार कर दिया है। अब कोयले का रिजर्व समाप्त होने से यहां के कर्मचारी व मशीनी उपकरणोंं को प्रबंधन धीरे.धीरे दूसरे खदानों में शिफ्ट करनें की योजना पर विचार कर रहा। कभी हजारों कामगारों वाले ओसीएम में वर्तमान मंे शिफ्ट के महज 230 कामगार बचे हैं।

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