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बैकुंठपुर और रामानुजगंज के ईई की आपसी खींचतान से अटका पुनर्वास का 70 करोड़ का प्रोजेक्ट, 6 माह से काम बंद
03 गांव अमवार डैम परियोजना से हो रहे प्रभावित
कन्हर नदी में अंतरराज्यीय अमवार डैम परियोजना में छत्तीसगढ़ के प्रभावित किसानों के विस्थापन और पुनर्वास के लिए यूपी सरकार ने दो साल पहले ही राज्य सरकार को 70 करोड़ रुपए दे दिए, लेकिन यहां जल संसाधन विभाग के दो अधिकारियों के बीच आपसी खींचतान के कारण पुनर्वास का काम अधूरा पड़ा हुआ है। इस प्रोजेक्ट को मार्च 2020 तक पूरा हो जाना था।
यह काम पहले बैकुंठपुर स्थित विभाग के कार्यपालन अभियंता के जिम्मे था, लेकिन काम में गति नहीं आने से इसकी जिम्मेदारी रामानुजगंज के ईई को दे दी गई। हद तो यह है कि अब बैकुंठपुर कार्यालय के ईई का कहना है कि हमनें काम के बाद शेष 45 करोड़ रुपए रामानुजगंज के ईई को भेज दिया है तो रामानुजगंज में पदस्थ ईई यूएस राम कह रहे हैं कि हमें न तो पैसा मिला है और न ही कांट्रेक्टर का वर्क आर्डर, इसके कारण काम में हाथ नहीं लगा रहे हैं। भास्कर पड़ताल में खुलासा हुआ है कि दो साल पहले यूपी और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों के बीच अंतरराज्यीय डैम निर्माण पर समझौता के बाद इससे प्रभावित लोगों के नुकसान का आंकलन कराया गया। इस पर अधिकारियों ने यूपी सरकार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद वहां से 70 करोड़ रुपए से अधिक की राशि छत्तीसगढ़ सरकार को दी। पैसा मिलने के बाद यहां से प्रभावित होने वाले 32 परिवारों के पुनर्वास और पुनर्बसाहट के लिए जल संसाधन विभाग के कोरिया जिला के कार्यपालन अभियंता को काम दिया गया। काम में गुणवत्ता न होने पर सरकार ने इस काम को कराने की जिम्मेदारी पिछले साल मार्च महीने में ही रामानुजगंज के कार्यपालन अभियंता को दे दिया। इसके बाद इस काम को लेने के लिए रामानुजगंज के ईई कई बार पत्र लिखते रहे, लेकिन हस्तांतरण की प्रकिया पूरी नहीं हो पाई। इसके बाद अक्टूबर 2020 में बसाहट के लिए किए जा रहे कार्यों से खर्च के बाद बचे 45 करोड़ रुपए रामानुजगंज के ईई को भेजा गया, लेकिन उन्होंने उसे लेने से इंकार कर दिया।
77 किसानों की डूब रही जमीन, मुआवजा सिर्फ 3 को
डैम की वजह से छह गांवों के 77 किसानों की जमीन प्रभावित हो रही है, लेकिन अधिकारियों के विवाद के कारण अब तक महज तीन किसानों को ही मुआवजा की राशि मिल सकी है। डूब प्रभावित गांव में त्रिशुली, झारा, कुशफर, सेमरवा, कमलेश्वरपुर व धौली के किसान हैं।
वो जाने और उनका काम जानें, मैं नहीं जानता
{अमवार डैम परियोजना के विस्थापितों के लिए पुनर्बसाहट और विस्थापन का काम अब तक अधूरा है?
- अब हम यह काम नहीं देख रहे हैं, रामानुजगंज ईई से पूछिए, सरकार ने उन्हीं को जिम्मा दिला दिया है।
{वहां के ईई राम का कहना है कि उन्हें अब तक बैकुंठपुर ईई न तो पैसे दिए हैं और न ही दस्तावेज, ऐसे में काम कैसे करवाएं?
- हमनें 45 करोड़ दिए हैं, अक्टूबर महीने में ही।
{उनका कहना है कि कई दस्तावेज नहीं दिए गए हैं, इसकी वजह से प्रोजेक्ट पर काम नहीं हो रहा?
- अब उनका स्टेटमेंट क्या है, वो जाने और उनका काम जानें, मैं नहीं जानता
अब तक पैसा और वर्क ऑर्डर दोनों ही नहीं मिले
{अमवार डैम परियोजना के विस्थापितों के लिए पुनर्बसाहट की योजना पर काम नहीं हो रहा हैं?
- काम को बैकुंठपुर के ईई करा रहे थे, सरकार ने इस काम को हमें कराने कहा, लेकिन अब तक पैसा मिला है और न ही दस्तावेज।
{बैकुंठपुर ईई का कहना है कि आपको 45 करोड़ और दस्तावेज दे चुके हैं?
- उन्होंने पैसे भेजे थे, लेकिन न तो वर्क आर्डर था और न ही अनुबंध पत्र के साथ ऑनलाइन हिसाब का आईडी पासवर्ड, ऐसे में पैसा वापस उन्हीं के पास चला गया।
{इससे तो प्रोजेक्ट में देरी हो रही है?
- उन्हें कई बार पत्र लिखा है, लेकिन जब तक वे पूरे दस्तावेज नहीं देंगे, तब तक हम किस आधार पर काम शुरू करवा सकते हैं।
एक नजर में
डैम
कन्हर नदी पर निर्माणाधीन अंतरराज्यीय अमवार डैम।
यूपी और छग सरकार ने मिलकर शुरू की परियोजना
1995 में यूपी सरकार ने कन्हर नदी पर बांध बनाने की बात शुरू की। दोनों राज्यों के बीच 2015 में सहमति बन पाई। इसके तहत यूपी सरकार यह परियोजना दो अरब 57 करोड़ की लागत से शुरू की है। इससे छत्तीसगढ़ के त्रिशुली, सेमरवा और झारा गांव के लोग प्रभावित हो रहे हैं।
पुनर्वास की बसाहट में
ये कार्य हुए हैं मंजूर
32 परिवारों के पुनवार्स के लिए बनाए जा रहे कॉलोनी में उप स्वास्थ केन्द्र, आंगनबाड़ी भवन, श्मशाट, दुकानें, हैंडपंप, बोरवेल के अलावा अन्य सुविधाएं विकसित करना है। इसके साथ ही वहां विद्युतिकरण करना है। ये निर्माण कार्य पिछले छह महीने से बंद हैं।
विनय कुमार साहू, ईई, बैकुंठपुर
यूएस राम, ईई, रामानुजगंज
सीधी बात**
45 करोड़ और दस्तावेज नहीं देने पर रुका है पुनर्वास का काम
26 करोड़ का काम करने का दावा कर रहे अफसर
70 करोड़ यूपी सरकार ने दिए थे पुनर्वास के लिए
भास्कर पड़ताल**