सरगुजा में एक लाख महिलाओं व किशोरियों में खून की कमी

Ambikapur News - सरगुजा जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुपोषण से निपटने करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी 896 ऐसी महिलाओं व...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:25 AM IST
Ambikapur News - chhattisgarh news anemia of one lakh women and adolescent girls in surguja
सरगुजा जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुपोषण से निपटने करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी 896 ऐसी महिलाओं व बालिकाओं के बारे में पता चला है जो गंभीर रूप से खून की कमी से जूझ रही हैं।

इनकी हालत ऐसी है कि अगर इलाज न मिले तो इनकी जान कभी भी जा सकती है। इसका खुलासा स्वास्थ विभाग द्वारा करवाए गए एक सर्वे में हुआ है। इस सर्वे में इनके अतिरिक्त एक लाख ऐसी भी महिलाएं हैं जो एनीमिया से पीड़ित हैं। उन्हें स्वास्थ विभाग ने पौष्टिक आहर सेवन करने के निर्देश दिए हैं। इससे महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किशोरी बालिकाओं व महिलाओं को वितरित किए जाने वाले पौष्टिक आहर पर सवाल उठने लगा है। स्वास्थ विभाग द्वारा कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त अभियान के तहत सरगुजा जिले में अक्टूबर महीने में 15 से 45 वर्ष की महिलाओं की जांच के लिए अभियान चलाया। इसमें 2.74 लाख महिलाओं, युवतियों व किशोरियों की एनीमिया जांच करने की प्लानिंग की गई थी,लेकिन इसमें महज 1.44 लाख ही शामिल हो सके। इसके बाद भी ऐसी 896 बालिकाएं और महिलाएं मिलीं, जिनके शरीर में 7 यूनिट से भी कम खून है। वहीं 99550 महिलाओं के शरीर में 7 से 11 यूनिट ही ब्लड मिला। इस तरह 44 हजार महिलाएं सर्वे में ऐसी मिली जिनके शरीर में सही मात्रा में खून था। इस पर सीएमएचओ डाॅ. पीएस सिसोदिया का कहना है की गंभीर हालत में मिली महिलाओं व युवतियों का इलाज कराया जा रहा है।

मैनपाट में सबसे ज्यादा खराब स्थिति

रिपोर्ट के मुताबिक मैनपाट में 57 बूथों में 13714 का जांच की गई, जिसमें औसत सबसे अधिक 188 महिलाएं गंभीर हालत में मिलीं। वहीं यहां आठ प्रतिशत ही ऐसी थीं जिनके शरीर में सही मात्रा में खून था। बता दें कि सरगुजा जिले के आंगनबाड़ियों के माध्यम से शाला त्यागी किशोरियों के अलावा गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक गर्म भोजन देने का दावा किया जाता है। तात्कालीन कलेक्टर ऋतु सेन ने कुपोषण से निपटने तमाम अभियान चलाए लेकिन, स्थिति अब भी खराब है।

भास्कर न्यूज|अंबिकापुर

सरगुजा जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुपोषण से निपटने करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी 896 ऐसी महिलाओं व बालिकाओं के बारे में पता चला है जो गंभीर रूप से खून की कमी से जूझ रही हैं।

इनकी हालत ऐसी है कि अगर इलाज न मिले तो इनकी जान कभी भी जा सकती है। इसका खुलासा स्वास्थ विभाग द्वारा करवाए गए एक सर्वे में हुआ है। इस सर्वे में इनके अतिरिक्त एक लाख ऐसी भी महिलाएं हैं जो एनीमिया से पीड़ित हैं। उन्हें स्वास्थ विभाग ने पौष्टिक आहर सेवन करने के निर्देश दिए हैं। इससे महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किशोरी बालिकाओं व महिलाओं को वितरित किए जाने वाले पौष्टिक आहर पर सवाल उठने लगा है। स्वास्थ विभाग द्वारा कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त अभियान के तहत सरगुजा जिले में अक्टूबर महीने में 15 से 45 वर्ष की महिलाओं की जांच के लिए अभियान चलाया। इसमें 2.74 लाख महिलाओं, युवतियों व किशोरियों की एनीमिया जांच करने की प्लानिंग की गई थी,लेकिन इसमें महज 1.44 लाख ही शामिल हो सके। इसके बाद भी ऐसी 896 बालिकाएं और महिलाएं मिलीं, जिनके शरीर में 7 यूनिट से भी कम खून है। वहीं 99550 महिलाओं के शरीर में 7 से 11 यूनिट ही ब्लड मिला। इस तरह 44 हजार महिलाएं सर्वे में ऐसी मिली जिनके शरीर में सही मात्रा में खून था। इस पर सीएमएचओ डाॅ. पीएस सिसोदिया का कहना है की गंभीर हालत में मिली महिलाओं व युवतियों का इलाज कराया जा रहा है।

पीड़ितों का आंकड़ा दोगुना हो जाएगा

सीएमएचओ ने बताया कि जिले के भफौली, बतौली, धौरपुर, सीतापुर, लखनपुर, उदयपुर व मैनपाट इलाके में पोलियो की खुराक पिलाने के लिए बनाए गए कुल 687 बूथों में महिलाओं, युवतियों व किशोरियों को बुलाया गया और यह जांच की गई। बता दें कि सर्वे में 1.30 लाख ने अपनी जांच नहीं करवाई है। ऐसे में आशंका है कि जितने एनीमिया पीड़ित पाए गए हैं, अगर पूरे की जांच हो जाए तो यह आकड़ा दोगुना हो सकता है।

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