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पूर्व मंत्री के ओएसडी सहित दोनों अफसरों ने लगाई जमानत याचिका, कांग्रेस नेता की आपत्ति पर हो गई खारिज
रतनजोत प्लांटेशन में 112 लाख रुपए घोटाले के मामले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के ओएसडी रहे कृषि विभाग के तत्कालीन ज्वाइंट डायरेक्टर व सर्वेयर ने यहां जमानत के लिए याचिका लगाई है। सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया गया।
डीजे कोर्ट में जामनत के लिए याचिका लगाई गई थी, जिसे सुनवाई के लिए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश जयदीप गर्ग की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया है। जमानत याचिका में अधिकारियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। दोनों ने जमानत के लिए अपनी अधिक उम्र का भी हवाला दिया है।
वहीं मामले में कुसमी इलाके के एक पूर्व कांग्रेस नेता शोभनाथ भगत ने वकील के माध्यम से उसी कोर्ट में अधिकारियों की जमानत याचिका के खिलाफ आपत्ति लगाई है जिसमें जमानत निरस्त करने का आग्रह करते हुए कहा है कि जमानत मिलने पर अधिकारी साक्ष्य को मिटाएंगे। वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। दस साल तक अपने प्रभाव के कारण अधिकारियों ने मामले को दबाए रखा, जिससे गिरफ्तारी नहीं हो पा रही थी। बता दें कि मामले में कोर्ट के आदेश पर लुंड्रा पुलिस ने अधिकारियों पर 420, 409, 467, 468, 471 व 34 के तहत मामला दर्ज किया है। यहां की पुलिस ने दोनों अधिकारियों को दो दिन पहले ही रायपुर में गिरफ्तार किया था। दोनों रिमांड पर जेल में हैं।
करोड़ों खर्च के बाद भी फेल हो गई थी योजना
डीजल नहीं खाड़ी से अब डीजल मिलेगा बाड़ी से अभियान तहत भाजपा शासन में रतनजोत के पौधे लगाए गए थे। 2005-06 में पौधे लगाए गए थे। जिले का उस समय बंटवारा नहीं हुआ था और सूरजपुर और बलरामपुर भी सरगुजा जिले शामिल थे। योजना के तहत 19 ब्लाॅकों में पौधे लगाए गए थे, लेकिन यह योजना पूरी तरह से फेल हो गई। कई इलाकों में रकबा से अधिक एरिया में रतनजोत के पौधे लगा दिए गए थे। कृषि विभाग, वन विभाग सहित कई विभाग एजेंसी थे।
जहां 127 लाख रतनजोत प्लांटेशन पर हुए थे खर्च, वहां अब सिर्फ ठूंठ
सरगुजा जिले के लुंड्रा के बटवाही और कर्रा में रतनजोत प्लांटेशन में गड़बड़ी के मामले में पूर्व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के ओएसडी आरके कश्यप, सर्वेयर राणा प्रताप सिंह की गिरफ्तारी हुई वहां 127 लाख के काम में महज 15 लाख रुपए ही खर्च हुए थे। कागजों में प्लांटेशन बताकर 1 करोड़ 12 लाख रुपए की हेराफेरी हुई थी। तत्कालीन कलेक्टर ने शिकायत पर इसकी राजस्व व वन विभाग के अधिकारियों से जांच कराई थी, जिसमें गड़बड़ी का खुलासा हुआ था। अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद उस इलाके की स्थिति की पड़ताल में पता चला कि जहां रतनजोत का प्लांटेशन हुआ था वहां अब केवल ठूंठ नजर आ रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष मधु सिंह इसी इलाके की सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि पूरे इलाके में इसी तरह की गड़बड़ी हुई थी। राष्ट्रीय काम के बदले अनाज योजना के तहत रतनजोत प्लांटेशन पर करोड़ों रुपए खर्च हुए थे।
शिकायत के दस साल बाद हुई है गिरफ्तारी
मामले कृषि विभाग के अधिकारियों की दस साल बाद गिरफ्तारी हुई है। अधिवक्ता अमरनाथ पांडेय ने इस मामले में कोर्ट में परिवाद दायर किया था और सुनवाई के बाद कोर्ट के आदेश पर मामले में लुंड्रा थाने में अपराध दर्ज किया गया था, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई। जिस वर्ष यह गड़बड़ी हुई थी तब आरके कश्यप कृषि विभाग के जिले के उपसंचालक और आरपी सिंह भूमि संरक्षण अधिकारी थे। वर्तमान में आरके कश्यप प्रमोट होकर रायपुर में ज्वाइंट डायरेक्टर व आरपी सिंह डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदस्थ हैं।
अफसरों ने खुद को बताया निर्दोष, नेता ने आपत्ति में कहा- जमानत मिली तो अफसर साक्ष्य मिटा देंगे
कारण अधिकारियों ने मामले को दबाए रखा, जिससे गिरफ्तारी नहीं हो पा रही थी। बता दें कि मामले में कोर्ट के आदेश पर लुंड्रा पुलिस ने अधिकारियों पर 420, 409, 467, 468, 471 व 34 के तहत मामला दर्ज किया है। यहां की पुलिस ने दोनों अधिकारियों को दो दिन पहले ही रायपुर में गिरफ्तार किया था। दोनों रिमांड पर जेल में हैं।
यह तस्वीर लुंड्रा के बटवाही और कर्रा इलाके की है, जहां 127 लाख के काम में 112 लाख की गड़बड़ी हुई।