दिग्गजों को पहले लड़ना होगा पार्षद का चुनाव इसके बाद कर सकेंगे महापौर की दावेदारी

Ambikapur News - नगरीय निकाय चुनाव में मेयर, नगरपालिका और नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद के लिए होने वाला चुनाव सीधे न होकर पार्षदों के...

Oct 13, 2019, 06:25 AM IST
नगरीय निकाय चुनाव में मेयर, नगरपालिका और नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद के लिए होने वाला चुनाव सीधे न होकर पार्षदों के जरिए चुने जाने की सुगबुगाहट के बाद राजनीतिक दलों की सरगर्मी तेज हो गई है। सरकार ने इसके लिए सब कमेटी का गठन कर दिया है और ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मध्य प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह से मेयर और अध्यक्ष का चुनाव पार्षद करेंगे। अगर ऐसा हुआ तो मेयर के लिए दिग्गजों को भी पार्षद का चुनाव जीतना होगा।

कांग्रेस से मेयर डाॅ. अजय तिर्की जबकि भाजपा से पूर्व सांसद कमलभान सिंह और पूर्व मेयर सहित दावेदार हैं। दोनों मेयर अगल-बगल के वार्ड में रहते हैं और एक दूसरे के खिलाफ भी मैदान में उतरने से इंकार नहीं कर रहे हैं। मेयर सीट के लिए आरक्षण के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई थी और दावेदार टिकट के लिए जुगाड़ बैठाने सक्रिय थे। सीधे चुनाव नहीं हुआ तो मेयर के दावेदारों को पार्षद के लिए चुनाव लड़ना पड़ेगा। इसके लिए उन्हें सुरक्षित वार्ड तलाशने पड़ेंगे। मेयर का सीट एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है। सीधे चुनाव होता है तो आरक्षण पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इस वर्ग के दावेदार ही मेयर बनेंगे लेकिन उसके लिए उन्हें किसी वार्ड से पार्षद का चुनाव जीतना होगा।

महापौर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से हुआ तो दिग्गजों की बढ़ जाएगी मुश्किल

सरकार के निर्णय पर अमल हुआ तो 25 साल बाद मेयर की कुर्सी के लिए पार्षद करेंगे चुनाव।

शहरी सत्ता की राह में दोनों के सामने चुनौती

शहरी सत्ता के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच ही अब तक के चुनाव में सीधा मुकाबला हुआ है और इस बार भी जो समीकरण दिख रहे हैं उसके अनुसार भाजपा और कांग्रेस ही आमने-सामने होंगे। कांग्रेस के सामने निगम की सत्ता बचाने तो भाजपा के सामने निगम में वापसी की चुनौती है। कांग्रेस के लिए इस बार प्लस प्वाइंट यह है कि निगम के अलाव प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार है। हालांकि पिछले चुनाव में यही स्थिति भाजपा के साथ थी।

अभी कांग्रेस के 28 व भाजपा के 18 पार्षद हैं

48 वार्डों वाले निगम में वर्तमान में 28 पार्षद कांग्रेस के जबकि 18 पार्षद भाजपा के पार्षद हैं। दो पार्षद निर्दलीय हैं। कांग्रेस की कोशिश यही होगी कम से कम वर्तमान वार्डों में जहां कांग्रेस का कब्जा है वहां जीते ताकि निगम में काबिज हो सके। वहीं भाजपा उन वर्तमान कब्जे वाले वार्डों के अलावा उन वार्डों फोकस कर रही है जहां पिछली बार कम अंतर से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए दोनों ही पार्टियों के लिए एक-एक सीट महत्वपूर्ण होगी।

चुनाव में पार्षदों का बढ़ जाएगा महत्व

निगम में मेयर व नगरपालिका और नगर पंचायतों के अध्यक्ष के लिए सीधे चुनाव नहीं होने पर जीतकर आने वाले पार्षदों का महत्व बढ़ जाएगा। पार्षद ही मेयर अौर अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। बहुमत कम होने पर निर्दलीय जीतकर आने वाले दो तीन पार्षद निर्णायक साबित होंगे। इसलिए दोनों पार्टियों में सुगबुगाहट है कि चुनाव जीतने में सक्षम व्यक्तियों को ही टिकट दिया जाएगा। वहीं निर्दलीय चुनाव जीतकर आने वालों को अपने पक्ष में करने की भी प्लानिंग रहेगी।

दिग्गजों को तलाशने पड़ेंगे अपने लिए ये वार्ड

कांग्रेस से मेयर डाॅ. अजय तिर्की वर्तमान में वार्ड क्रमांक 4 संत मदर टेरेसा वार्ड के निवासी हैं। यह वार्ड एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है और यहां से कांग्रेस से जॉन लकड़ा पार्षद हैं। परिसीमन में मेयर वार्ड क्रमांक 8 फंुदरडिहारी आ गए हैं और यहां भी कांग्रेस से रोजालिया एक्का पार्षद हैं। मेयर डाॅ. अजय तिर्की ने कहा कि अगर पार्षद के लिए चुनाव लड़ना पड़ा तो वे अपने वार्ड से ही लड़ना चाहेंगे। बाकी संगठन जहां से भी कहेगा वहां के लिए तैयार हैं। यही स्थिति भाजपा के सामने हैं। भाजपा से पूर्व मेयर प्रबोध मिंज का नाम सामने आ रहा है। उन्हें भी अपने लिए सुरक्षित वार्ड तलाशना पड़ेगा। मिंज वार्ड क्रमांक 9 के निवासी हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी जहां से लड़ाएगी वहां से लड़ जाएंगे। आठ नंबर से भी लड़ना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे। कांग्रेस से मेयर के दावेदार डाॅ. अजय तिर्की भी इसी वार्ड के हैं।

25 साल पहले इसी तरह सिंहदेव बने थे मेयर

मेयर का चुनाव सीधे नहीं हुआ तो निकाय चुनाव में ढाई दशक पहले वाला नजारा इस बार के चुनाव में भी दिखेगा। वर्तमान कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव भी 1994 में उस समय के रफी अहमद किदवाई वार्ड क्रमांक 20 से पार्षद का चुनाव जीतकर नगर पालिका के अध्यक्ष बने थे। वे इससे पहले 1983 में भी नगर पालिका अध्यक्ष रह चुके थे। यदि पुरानी व्यवस्था लागू होती है तो पार्टियों को पहले से ही पूरी रणनीति बनानी होगी, ताकि महापौर का चुनाव जीत सकें।

48 वार्डों में 16 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित

48 वार्डों वाले शहर में एक तिहाई यानि 16 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। बाकी 32 वार्डों में 8 ओबीसी और एक एक एससी के आरक्षित है। इसके बाद जो 23 वार्ड बच रहे हैं उनमें से ही मेयर के दावेदारों को पार्षद के लिए लड़ना पड़ेगा। ऐसे में मेयर के दावेदारों को उस वार्ड के सिटिंग पार्षद को बैठना पड़ेगा या फिर दूसरे वार्ड तलाशने पड़ेंगे। अंबिकापुर नगर निगम के अलावा सरगुजा जिले की दो नगर पंचायतों सीतापुर व लखनपुर के लिए चुनाव होगा।

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