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सिंचाई के लिए दो साल से पेंडिंग हैं कई प्रस्ताव, नहीं बढ़ रहा सिंचाई का रकबा
पानी मिला तो किसान कर सकेंगे रबी तथा ग्रीष्मकालीन खेती
जल संसाधन विभाग ने वित्तीय खेती के लिए सिंचाई का रकबा बढ़ाने दो साल पहले सरकार को प्लान भेजा था, लेकिन उसे अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
इस पर अधिकारियों का कहना है कि अगर 31 मार्च तक उसे स्वीकृति नहीं मिलती है तो इन प्रोजेक्ट को फिर से तैयार करना पड़ेगा और इनकी लागत भी 25 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। ऐसे में करीब 12 करोड़ से अधिक के कार्यों पर करीब 15 करोड़ खर्च होंगे तो 42 सौ हेक्टेयर जमीन सिंचित नहीं हो पाएगी।
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता ने बताया कि वर्ष 2018-19 में सिंचाई की कुछ परियोजनाओं पर काम करने के लिए प्लान तैयार किया गया था, इस पर दो साल के भीतर प्रशासकीय अनुमति मिलना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर इसके लिए नए सिरे से प्लान तैयार करना पड़ेगा और क्रियान्वयन में देरी होगी। नए प्लान के बाद कार्यों की लगात भी बढ़ जाएगी। दूसरी तरफ क्षेत्रीय विधायक बृहस्पति सिंह ने कहा है कि उन्हें इसकी जानकारी है और भले ही सभी प्रस्ताव को प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिल पाएगी, लेकिन कोशिश है कि कुछ को मिल जाए ताकि किसानों के खेत सिंचित हो सकें। बता दें कि जल संसाधन विभाग ने व्यावर्तन नहर कार्य के लिए 297 लाख, खुटपाली परियोजना के नहर विस्तार के लिए 18 लाख, सेमरनाला नहर निर्माण के लिए 510 लाख, सतबहिनी नाला नहर के लिए 401 लाख सहित दूसरे कामों के लिए प्रस्ताव लंबित है।
अधिकारियों का कहना है कि इन प्रस्तावों पर प्रशासकीय स्वीकृति मिलती है तो बलरामपुर जिले में 4287 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा प्राप्त हो जाएगी। वहीं फिलहाल बलरामपुर जिले में सिंचित जमीन का रकबा महज 16 प्रतिशत है।