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बारिश से उन्हारी फसल 50% तक बर्बाद

एक वर्ष पहले
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फागुन के महीने में सावन भादो की तरह हर रोज होने वाली बरसात से अंचल में बोई गई तिवरा, मटर, चना, धनिया, मूंग, उड़द, मक्का जैसी उन्हारी फसल खराब होनी की कगार पर है। आलम यह है कि बारिश के कारण कटी हुई फसल खेत खलिहान और मकान की छतों पर खुले में पड़ी-पड़ी सड़ रही है लेकिन किसानों के पास उसे बचा पाने का कोई साधन अथवा उपाय नहीं है। औसतन प्रति एकड़ ₹20000 का उत्पादन भी माना जाए तो किसानों को 50% यानी ₹10000 प्रति एकड़ का नुकसान हो रहा है।

कृषकों के अनुसार फसल चाहे तिवरा, चना, मटर, सरसों अथवा गेहूं की ही क्यों न हो, बारिश ने नुकसान पहुंचाने में कसर नहीं छोड़ी है। भारतीय किसान संघ के जिला संयोजक दिनेश्वर वर्मा ने बताया कि हुए नुकसान से फसल तो दूर किसानों को मवेशियों को खिलाने हेतु भूसा तक के लाले पड़ जाएंगे। भंवरगढ़ के किसान शोभाराम साहू ,कैलाश साहू, जांगड़ा के रमेश वर्मा, जोधा के रोहित वर्मा आदि ने बताया कि मवेशी से तो फसल को मचान बनाकर दिन-रात रखवाली करते हुए बचा लिया था परंतु सावन भादो की तरह होने वाली बारिश पर हमारा वश नहीं है।

उन्होंने अकेले अमेरी गांव में ही लगभग 200 एकड़ में उन्हारी फसल लगाई थी। उन्होंने बताया कि औसतन प्रति एकड़ ₹20000 का उत्पादन भी माना जाए तो किसानों को 50% यानी कि ₹10000 प्रति एकड़ का नुकसान हो रहा है। खासकर मसूर, मटर व तिवरा की फसल लगाने वाले किसानों में नुकसान के चलते बेहद मायूसी है। डिग्गी के चैनदास अनंत की छत पर कटाई के बाद सुखाई गई तिवरा की फसल बार-बार भीगने के कारण सड़ जाने से बदबू आने लगी है। वहीं मटर व सरसों की फसल ट्रैक्टर ट्राली में ही सड़ रही है। किसान ने बताया कि चना पूरी तरह बर्बाद हो जाने के कारण काटने की आवश्यकता नहीं है, उन्हें 5 एकड़ में लगभग ₹50000 का नुकसान हो गया है।

इसी तरह चंदन प्रसाद ने 2 एकड़ में, सुशील अनंत ने 4 एकड़ में, संतोष धृतलहरे ने 2 एकड़ में, सुखचंद जोगी ने 3 एकड़ की उन्हारी फसल सड़ जाने से हजारों रुपए का नुकसान हो गया। सभी ने कहा कि नुकसान के सर्वे हेतु अभी तक कोई भी अधिकारी कर्मचारी नहीं पहुंचे हैं। कृष्ण ने बताया कि पकने की कगार पर पहुंच चुकी गेहूं की बालियों में दाने छोटे आ रहे हैं तथा काले पड़ चुके हैं।

अंधड़-बारिश से पेड़ अौर पोल गिरे, बिजली गुल


मुड़ागाव (कोरासी)| अंचल में बीते दिनों अंधड़ बारिश ने ऐसी तबाही मचाई कि सभी हैरान हो गए। कई जगह पेड़ तथा बिजली के खंभे उखड़ गए। कीट प्रकोप के कारण धान के पौधों को बीमारी ने घेर लिया है। बेमौसम हुई बारिश ने सबको रुलाकर रख दिया है।

बिजली के तार टूटने से रात भर लाइट गुल रही। आए दिन बदली, बारिश अौर तूफान से लोग घबराए हुए हैं। खरीफ की फसलों को व्यापक नुकसान हो रहा है। महुआ, तेंदू, चार अौर आम की फसल इस बार देखने को नहीं मिलेगी। कहीं-कहीं ओलावृष्टि भी हुई। कई जगहों पर बड़े-बड़े पेड़ गिरने से रास्ता जाम रहा। वनांचल ग्राम में ओलावृष्टि अौर तेज बारिश से बिजली आपूर्ति ठप हो गई है, जिसे सुधारने के लिए खड़मा, मड़ेली सब स्टेशन के लाइनमैन सहित अन्य कर्मचारी दिन-रात सुधार कार्य में लगे हैं। वही अटल ज्योति कई गांव की बंद हो चुकी है, जिससे किसानों को धान की सिंचाई में परेशानी हो रही है। किसानों ने तत्काल अटल ज्योति सप्लाई ठीक करने की मांग शासन-प्रशासन से की है।

लवन व आसपास 3 घंटे जमकर बारिश हुई, रबी फसल खराब होने की आशंका

लवन। लवन नगर व क्षेत्र में 14 मार्च को प्रातः 5 से 8 बजे तक 3 घंटे की तेज बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया, सुबह दुकानें भी देर से खुलीं। इससे पहले 12 व 13 मार्च को भी रात में दो 2 घंटे बारिश हुई जिससे गांवों की गलियों में पानी भर गया, नालियां जाम होने की वजह से निकासी न होने से गलियां लबालब हैं।

ग्राम अहिल्दा के सरपंच झबूलाल साहू ने बताया कि अहिल्दा के होलेपारा वार्ड व सतनामी पारा में सीसी रोड बनी है, उसके बावजूद पानी भर गया है । फिलहाल गली में 1 फीट पानी होने से ग्रामवासियों को आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है। लगातार हो रही बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को रबी फसल का हो रहा है। लवन क्षेत्र के ग्राम करदा, मर्दा, सिरियाडीह, कोयदा, पेसर, चंगोरी में सैकड़ों किसानों ने धान व गेहूं की फसल लगाई है। इस वर्ष बारिश के चलते गेहूं व धान की फसलों में कीड़ा लगने लगा है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की बीमारियां भी होने लगी हैं। कोयदा के किसान श्रवण कुमार साहू ने बताया कि गांव के 60 प्रतिशत किसानों ने धान व गेहूं की फसल लगाई है लेकिन इस वर्ष लगातार बारिश से धान पीला पड़ने लगा है। गेहूं की बालियों काला पीला की रंग चढ़ रहा है, जो फसल के खराब होने का संकेत है। किसान नंदेलाल ने बताया कि इस वर्ष लगातार बारिश से रबी फसल को भारी नुकसान हो रहा है।

मुड़ागांव. आंधी-तूफान से बड़े-बड़े पेड़ इस तरह धराशायी हो गए।

किसी किसान ने बीमा नहीं कराया: अखिलेश

सिमगा विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अखिलेश दत्त दुबे ने इस संबंध में बताया कि लगातार बारिश होने से नुकसान का आंकड़ा प्रतिदिन बदल रहा है परंतु क्षेत्र के किसानों द्वारा किसी भी फसल का बीमा नहीं कराया गया है। अलबत्ता राजस्व विभाग द्वारा आरबीसी 64 के तहत मुआवजा किस प्रकार दिलाया जाए, इस संबंध में राजस्व विभाग के अधिकारियों से चर्चा चल रही है।

ग्राम अहिल्दा के गलियों में भरा पानी

भंवरगढ़ के खेतों में काटने के बाद पानी में भीगती ितवरा की फसल।


सुहेला. डिग्गी के चैनदास अनंत की छत पर कटाई के बाद सुखाया गया तिवरा बार-बार भीगने के कारण सड़ गया है और बदबू आने लगी है।
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