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शराबी दूल्हे को लौटाने वाली आरती काे सामाजिक कार्यकर्ता ने चुना जीवनसाथी

एक वर्ष पहले
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25 फरवरी को क्षेत्र के ग्राम सुरसाबांधा में अभनपुर के ग्राम संकरी से आए शराबी दूल्हे को बिना विवाह के बाराती समेत वापस लौटना पड़ा था, जबकि शादी की आधी से ज्यादा रस्में पूरी हो चुकी थीं। मना करने पर भी जब दूल्हा व बारातियों ने शादी के दौरान नशा करना नहीं छोड़ा तथा मारपीट पर उतारू हो गए तो दुल्हन आरती ने शादी से इंकार कर दिया था। मामला समाज प्रमुखों तक पहुंचा तथा 7 मार्च को समाज ने फैसला सुनाया कि दोनों पक्ष स्वतंत्र हैं तथा अपनी मर्जी से अपने बच्चों का विवाह नए सिरे से कर सकते हैं। इस बैठक में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता सतीश साहू ने इसके बाद घर वालों की अनुमति से 8 मार्च को ही लड़की आरती साहू के पिता सूरज साहू के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा और आखिरकार 13 मार्च को दोनों परिवारों की रजामंदी से सतीश व आरती की शादी हो गई।

दरअसल नियत तिथि 25 फरवरी पर शादी की सभी रस्म अदायगी चल रही थी। ग्राम संकरी से बारात ग्राम सुरसाबांधा सामाजिक भवन पहुंची। बारातियों का औपचारिक आदर सत्कार किया गया और बारात परघनी की रस्म शांतिपूर्वक हो गई। यहां तक कि मंडवा छूने और दूल्हा के स्वागत के बाद वरमाला की रस्म भी हो चुकी थी लेकिन जैसे ही बारात दुल्हन के घर के सामने पहुंची तो नशे में चूर बाराती आपस में लड़ने लगे। जो भी व्यक्ति उन्हें समझाने जाता था, उसकी पिटाई हो जाती। ऐसे में लड़ाई और बढ़ती गई और बाराती और उग्र होकर लोगों को मारते रहे। और तो और लड़की पक्ष के सरजू साहू, प्रभु साहू, बिसरू साहू और सभी घर वालों को बारातियों ने जमकर पीटा। इससे लड़की पक्ष के लोग डर गए लेकिन फिर भी उन्होंने बारातियों को समझाने का प्रयास किया। बाराती नहीं माने और गुंडागर्दी पर उतर आए। जैसे-तैसे शांत कराकर बारातियों को भोजन कराया गया। भोजन के दौरान भी कुछ बाराती फिर से लड़ने लगे और खाना खाने से इंकार कर दिया, इस बीच लड़ाई और बढ़ गई।

दुल्हन छत से देखती रही मारपीट का नजारा


पूरा नजारा स्वयं दुल्हन आरती साहू अपने घर की छत से देख रही थी। उसने सोचा कि जब शादी से पहले दूल्हे का ये हाल है तो वे शादी के बाद उससे कैसा बर्ताव करेगा। उसने बिना देर किए समाज को निर्णय सुना दिया कि उसे ऐसे परिवार में बहू बनकर नहीं जाना है। पिता सरजू साहू ने भी बेटी के इस फैसले का स्वागत किया और अपनी बेटी को उस घर में भेजने से इंकार कर दिया। इसके बाद शादी की बाकी रस्मों की अदायगी रोक दी गईं और बारात बिना दुल्हन के बैरंग लौटा गई।

समाज ने पेश की नजीर, भावी दूल्हा भी बैठक में मौजूद था

मामला सामाजिक न्याय के लिये समाज में पहुंच गया और सरजू साहू सुरसाबांधा ने न्याय की अपील की। कोपरा परिक्षेत्र और अभनपुर परिक्षेत्र के साहू समाज के सामाजिकजनों ने बैठक कर काफी मंथन के बाद दोनों पक्षों को स्वतंत्र कर दिया और कहा कि दोनों अपने हिसाब से विवाह कर सकते हैं। समाज प्रमुखों की इस नजीर के बाद आखिरकार आरती साहू को न्याय मिल गया। सामाजिक पदाधिकारियों में भुनेश्वर साहू जिलाध्यक्ष, लाला साहू , प्रताप साहू, डॉ. भारत साहू, डॉ. टोमन साहू , रेवाराम साहू, महेंद्र साहू , तीजम साहू, सदारम साहू, नंद साहू, नंदकुमार साहू, गिरधारी साहू, जोहनूराम साहू आदि उपस्थित थे। 7 मार्च को हुई उस बैठक में उपस्थित सतीश साहू पिता रामकुमार साहू कसेरूडीह के सामाजिक कार्यकर्ता ने अपने परिवारजन से सलाह कर 8 मार्च को ही उस लड़की से शादी करने का फैसला किया। उनके परिजन सरजू साहू सुरसाबांधा पहुंचे और आरती को जीवन साथी बनने का प्रस्ताव रखा। दोनों परिवारों ने सहमत होकर आखिरकार 13 मार्च को दोनों की पूरे रस्मों रिवाज से शादी कर दी।

राजिम. विवाह के बाद प्रसन्नचित्त माहौल में दूल्हा-दुल्हन और परिजन।
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