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गोबर, गोमूूत्र का महत्व बताने अभियान

एक वर्ष पहले
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भारतीय गोधन का गोबर, गोमूत्र ही जैविक खेती का आधार है। इससे भूमि को बंजर होने से बचाया जा सकता है। जैविक खेती से उत्पन्न अनाज, फल, फूल, सब्जी के सेवन से जन स्वास्थ्य की रक्षा, पर्यावरण की सुरक्षा होती है। गोधन के गोबर व गौमूत्र से अनेक प्रकार की बीमारियों का सफल इलाज होता है। गाय हमारे लिए सर्व उपयोगी है, हमारी अज्ञानता से ही वह आज उपेक्षा की शिकार हो गई है। गाय से हमें बहुत कुछ मिलता है, वह हमारे लिए बहुत कुछ देती है, मनुष्य होने के नाते हम भी उसके सेवा में कुछ देना सीखें।

यह बातें मानस मंदिर छुरा में गो ग्राम स्वावलंबन अभियान की बैठक में जिला संयोजक डाॅ. चन्द्रशेखर हरित ने कही। उन्होंने कहा कि किसान सब कुछ जानते हैं, परंतु रासायनिक खेती के मोह व स्वार्थ में पड़कर अज्ञानतावश गोधन को निरर्थक अनुपयोगी समझ बैठे हैं। अब गोबर, गोमूत्र की उपयोगिता से भलीभांति परिचित कराने हस्ताक्षर अभियान चलाकर गोबर को 5 रुपए किलो व गोमूत्र को 10 रुपए लीटर के भाव से खरीदी की मांग को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। यदि हमारी मांगे
पूर्ण होती है तो इससे धरती बंजर होने से बचेगी। जन स्वास्थ्य व पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चत होगा। रोजगार व स्वावलंबन की दिशा में भी मार्ग खुलेगा।

छुरा ग्रामीण. गो ग्राम स्वावलंबन अभियान की बैठक में उपस्थित पदाधिकारी।

अभियान में ग्रामीणों
को जोड़ना होगा


डॉ. हरित ने कहा इसके लिए कार्यकर्ताओं को गांव-गांव तक अपना स्वयं का नेटवर्क तैयार करना होगा। उन्होंने इस लोकहित अभियान में सभी को सहयोग करने की अपील की। बैठक में द्वारका सिन्हा, पेमसिंघ दीवान, डालचंद सोनकर, ठाकुर राम यादव, सालिक राम नेताम, आला राम ठाकुर को संयोजक का दायित्व सौंपा गया। बैठक में छुरा संयोजक तेजराम साहू, जिला सहसंयोजक टीकमचंद साहू, नगर संयोजक जितेंद्र ध्रुव, मनीष सारदा, वेदराम नंदे आदि उपस्थित रहे।
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