चरौटा ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान, चीन, जापान, ताईवान, मलेशिया तक जा रहा

Anchalik News - इस बार देर से हुई और देर तक हुई बारिश के बाद चरौटा की लुवाई (कटाई) में अब तेजी आने वाली है। मौसम ने जो करवट बदली है,...

Jan 16, 2020, 06:30 AM IST
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इस बार देर से हुई और देर तक हुई बारिश के बाद चरौटा की लुवाई (कटाई) में अब तेजी आने वाली है। मौसम ने जो करवट बदली है, उसके बाद छत्तीसगढ़ का चरौटा 400 रुपए की तेजी के बाद 1600 रुपए क्विंटल पर जा पहुंचा है।

इधर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहली बार झारखंड के बढ़ते दबदबे के बाद प्रदेश के चरौटा की पूछपरख कम होती नजर आ रही है लेकिन सरगुजा ने अपनी दमदार मौजूदगी से छत्तीसगढ़ को प्रतिस्पर्धा में बरकरार रखा हुआ है। चीन, जापान, ताईवान और मलेशिया ऐसे देश हैं, जहां चरौटा से हर्बल चाय और हर्बल काफी बनाई जाती है इसलिए ये चारों देश अपनी घरेलू मांग की आपूर्ति करने के लिए भारतीय चरौटा की खरीदी करते हैं। मध्य दिसंबर में इसकी फसल तैयार हो जाती है और इसी के साथ खुलता है निर्यात का द्वार और संग्राहकों के लिए भरपूर कमाई का मौका। औषधीय गुणों की पहचान होने के बाद पहली बार 90 के दशक में छत्तीसगढ़ के चरौटा को दुनिया में जगह मिली और एक ऐसा बाजार मिला जिसने प्रदेश के चरौटा संग्राहकों की तकदीर बदल दी। आज यह दुनिया के चीन, ताईवान, मलेशिया और जापान तक में खरीदा जा रहा है और प्रमुख निर्यातक देश भारत के छत्तीसगढ़ को पहचान मिल चुकी है। साल-दर-साल बढ़ती मांग और बढ़तेेे भाव के बाद अब चरौटा भाव में धान के भाव की बराबरी कर रहा है।

15 दिन में Rs.300 की तेजी

निर्यात इस साल देर से खुला है। इसके पहले ही संभावना को देखते हुए बाजार में तेजी का आना चालू हो चुका था। पखवाड़े भर पहले प्रदेश में जो चरौटा 1200 से 1300 रुपए क्विंटल पर बिक रहा था वह अब 300 रुपए तेज हो चुका है। कारोबारी सप्ताह के पहले दिन से यह 300 रुपए की छलांग लगाकर 1600 रुपए क्विंटल पर मजबूती के साथ जमा हुआ है। निर्यात की मात्रा बढ़ने के बाद इसमें और तेजी की संभावना है।

झारखंड का बढ़ा दबदबा

चरौटा में औषधीय गुणों की पहचान के बाद झारखंड ने मजबूती से कदम बढ़ाया और अब यह चरौटा उत्पादन में छत्तीसगढ़ को पछाड़कर निर्यात के क्षेत्र में आगे आ चुका है। इसके बावजूद सरगुजा के चरौटा ने विदेशों में छत्तीसगढ़ को मजबूती से बरकरार रखा हुआ है। वैसे तो अपने प्रदेश का हर जिला चरौटा के लिए जाना जाता है लेकिन जो गुण सरगुजा के चरौटा में है,वह दूसरे जिले के चरौटा में नहीं है।

निर्यात खुलते ही पहली मांग चीन से

चरौटा में नई फसल की आवक चालू हो चुकी है। मौसम भले ही रुकावट डाल रहा हो लेकिन संग्राहक काम में बराबर लगे हुए हैं। निर्यात के द्वार खुलने के बाद पहली मांग चीन से निकली है। फसल की जैसी स्थिति दिखाई दे रही है, उसे देखते हुए मानकर चला जा रहा है कि इस बार प्रदेश में 10 हजार टन चरौटा का उत्पादन हो सकता है।

एक लाख क्विंटल का निर्यात, 25 साल से खरीदी-बिक्री

छत्तीसगढ़ में चरोटा बीज की खरीदी नवंबर से फरवरी तक की जाती है जिसकी मांग चीन में सबसे ज्यादा है लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका उत्पादन लगभग एक लाख क्विंटल के आसपास ही होता है और यह पूरा का पूरा निर्यात भी हो जाता है। छत्तीसगढ़ में चरौटा की खरीदी एवं बिक्री लगभग 25 साल से हो रही है, पहले इसकी मांग कम थी लेकिन अब मांग अधिक होने से भाव भी अच्छा मिल रहा है।

एक्सपोर्ट खुलते ही मांग बढ़ी : सुभाष अग्रवाल

इस संबंध में सुभाष अग्रवाल, संचालक, एसपी इंडस्ट्रीज रायपुर ने बताया कि चीन से कारोबारी रिश्ते में सुधार के बाद एक्सपोर्ट खुल चुका है। प्रतिकूल मौसम में क्वालिटी डैमेज जरूर हो सकती है लेकिन मांग को देखते हुए भाव में तेजी की संभावना है। इस समय 1600 रुपए क्विंटल पर चरौटा की खरीदी चल रही है।

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