चौरा म गोंदा, रसिया मोर बारी... गीत पर झूमे दर्शक

Anchalik News - राजिम माघी पुन्नी मेले के मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम में पांचवें दिन ननकी ठाकुर के गीत पुन्नी का चंदा ने...

Feb 15, 2020, 07:25 AM IST
Nayapara Rajim News - chhattisgarh news chaura ma gonda rasiya mor bari audience swinging on song

राजिम माघी पुन्नी मेले के मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम में पांचवें दिन ननकी ठाकुर के गीत पुन्नी का चंदा ने दर्शकों को खूब झूमाया। उनके गीतों की शुरुआत ओ गजानंद स्वामी जय हो..., छत्तीसगढ़ महतारी ओ पाईया परव..., चांदी के मुंदरी ने दर्शकों को बांधे रखा। पुन्नी के चंदा के समूह में उभरते कलाकार के रूप में चंपा निषाद और प्रदीप तिवारी की आवाज में छुनुर छुनुर पैरी बाजे... आकाशवाणी पर चलने वाले गीतों में एक था। इसके बाद लोकप्रिय गीत पुन्नी के चंदा मोर गांव म... की प्रस्तुति दी गई। बाल-विवाह पर आधारित गीत ऐसो गवना दे बुढ़ी दाई..., छम-छम बोले मोर पांव के पैरी... गीत सुनकर दर्शक भावविभोर हो गए। इसी के साथ दर्शकों को और अधिक पसंद आने वाले गीत मन में बांधे के राखे हावा गा... सुनकर दर्शक थिरकने लगे। इसी के साथ कर्मा गीत कर्मा सुने बर आबे... की प्रस्तुति दी गई। इसी कडी में गौरी-गौरा, लोकनाचा आदि की भी प्रस्तुत किया गया।

मंच पर महेश यादव ने राउत नृत्य की प्रस्तुति पारंपरिक वेषभूषा में दी, जिन्हें देखकर दीपावली के समय गोवर्धन पूजा की याद आ गई। दर्शक भी इस अवसर दोहा पारने लगे। दिनेश जागड़े ने साथी कलाकारों के साथ विभिन्न करतब दिखाते हुए पंथी नृत्य प्रस्तुत किया। जिसमें गुरु घासीदास का वंदना करते हुए जय-जय जयकारा किया गया। इसके बाद शिवा सुर दास ने पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुती दी। अंचल शर्मा ने छत्तीसगढ़ी और हिंदी गीत, जिसमें देशभक्ति गीत को गाकर पुलवामा के शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम का संचालन निरंजन साहू, रूपा साहू ने किया गया। सभी कलाकारों का सम्मान गरियाबंद एसपी एमआर आहिरे, ओएसडी एवं समन्वयक गिरीश बिस्सा एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने किया।

दीपक चंद्राकर का लोक रंग कार्यक्रम आज: राजिम माघी पुन्नी में शनिवार को मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोक संध्या जाकिर हुसैन और लोक रंग अर्जुन्दा के दीपक चंद्राकर का कार्यक्रम मुख्य आकर्षण होगा।

मूर्ति ले जाते वक्त कांकेर के राजा की नाव डूबी, कुलेश्वर मंदिर से लगी, र|पुर के महाराज ने बनवाया मंदिर

राजिम नगरी के नामकरण के संबंध में जनश्रुति के अनुसार राजा जगतपाल इस क्षेत्र पर राज कर रहे थे, तभी कांकेर के कंडरा राजा ने इस मंदिर के दर्शन किए और उसके मन में लोभ जागा कि यह मूर्ति तो उसके राज्य में स्थापित होनी चाहिए। वे सेना की सहायता से इस मूर्ति को बलपूर्वक ले चले। मूर्ति को एक नाव में रखकर वे महानदी के जलमार्ग से कांकेर रवाना हुए पर धमतरी के पास रुद्री नामक गांव के समीप नाव डूब गई और मूर्ति शिला में बदल गई। डूबी नाव वर्तमान राजिम में महानदी के बीच में स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर की सीढ़ी से आ लगी। राजिम नामक तेलिन महिला को यहां नदी में विष्णु की अधबनी मूर्ति मिली, जिसे उसने अपने पास रख लिया। इसी समय र|पुर के राजा वीरवल जयपाल को स्वप्न हुआ, फलस्वरूप उसने एक विशाल मंदिर बनवाया। राजा ने तेलिन से मंदिर में स्थापना के लिए विष्णु मूर्ति देने का अनुरोध किया। तेलिन ने राजा को इस शर्त पर मूर्ति दी कि भगवान के साथ उनका भी नाम जोड़ा जाए। इस कारण इस मंदिर का नाम राजिम लोचन पड़ा, जो कालांतर में राजीव लोचन कहलाने लगा।


माघ पूर्णिमा के दिन प्रभु जगन्नाथ स्वयं राजीव लोचन आते हैं

मंदिर परिसर में आज भी एक स्थान राजिम के लिए सुरक्षित है। कहते हैं माघ पूर्णिमा के दिन स्वयं भगवान जगन्नाथपुरी से यहां आते हैं। उस दिन जगन्नाथ मंदिर के पट बंद रहते हैं और भक्तों को भी राजीव लोचन में ही जगन्नाथ के दर्शन होते हैं। पुन्नी मेले में विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में लोग आते हैं।


पुन्नी मेला आस्था, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी हिस्सा

मुख्य मंच पर कर्मा सुने बर आबे... की प्रस्तुति देते हुए कलाकार।

नवापारा/राजिम| राजिम माघी पुन्नी मेला माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक 15 दिनों लगता है। यहां तीन नदियों महानदी, पैरी तथा सोंढूर है। इस त्रिवेणी संगम में तीनों नदियां साक्षात प्रकट हैं। यहां का प्रसिद्ध राजीव लोचन मंदिर आठवीं या नौवीं सदी का बताया जाता है। कुलेश्वर महादेव मंदिर भी है, जो संगम स्थल पर स्थित है।

राजिम मेले की एक विशेषता यह भी है कि यह महानदी के किनारे और उसके सूखे हुए रेतीले भाग पर लगता है। जगह-जगह पानी भरे गड्ढे और नदी की पतली धाराएं मेले का अंग होती हैं। इन्ही धाराओं पर बने अस्थायी पुल से हजारों लोग श्री राजीव लोचन मंदिर से श्री कुलेश्वर महादेव मंदिर को आते-जाते हैं। तरह-तरह की सामानों की दुकानें, सरकारी विभागों की प्रदर्शनियां एवं खेल-तमाशों के बीच एक तरफ सत्संग तो दूसरी ओर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते रहते हैं। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग शादी की खरीदारी मेले में करते है।

चौबेबांधा के 51 छात्रों ने लोक खेलों को समझा

नवापारा/राजिम| माघी पुन्नी मेला के छठवें दिन मिडिल स्कूल चौबेबांधा के 51 छात्रों ने लोक खेल प्रदर्शनी एवं चित्र प्रदर्शनी को समझा तथा भौंरा, फल्ली, बग्गा, गांेटा, फुगड़ी, बांटी आदि को खेलकर प्रेरित हुए। छात्र युवराज, पीयूष, तेजेश्वर, लोमेश, कुंदन, डोमन, पोषण ने लकड़ी से बने भौंरे पर नेती लपेटकर मैदान पर छोड़ा तो भन करते हुए भौंरा रठ मार दिया। भौंरे की चाल को देखकर उपस्थित लोग खूब ताली बजाई। सातवीं के राहुल पटेल, जिन्हें 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन शौर्य वीरता पुरस्कार से राज्यपाल अनुसुइया उइके ने नवाजा था, वह गेंड़ी चढ़कर दूर तक चला। छात्रा वाणी सोनकर, कुसुम, वर्षा, ईशा, रितु, चांदनी, गुंजेश्वरी, ज्योति, केंवरा, धनेश्वरी ने देर तक फुगड़ी करते रहे। ईशु ने सात मिनट तक लगातार फुगड़ी पर हाथ-पैर मारे। भिर्री, पच्चीसा, तुवेलंगरची, घोटकूल, सोलह गोंटिया, बांटी, नौ गोंटिया, भारत, चिकलस, पिट्ठूल, मक्की मार खेलों की चित्र प्रदर्शनी छात्रों को दिखाई गई।

नवापारा/राजिम. राजिम पुन्नी मेले में लगी लोगों की भीड़।

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