गाय के गोबर का पूजा में बड़ा महत्व इसलिए गो पालन करें: पं. उपेंद्र

Anchalik News - समीपस्थ ग्राम झीपन में भागवत कथा के छठवें दिन पंडित उपेंद्र शर्मा (खुड़मुड़ी तिल्दा वाले) ने ब्रह्मा का मोहभंग,...

Jan 24, 2020, 07:50 AM IST
Tilda News - chhattisgarh news cow cow dung is of great importance in worship so follow cow pt upendra
समीपस्थ ग्राम झीपन में भागवत कथा के छठवें दिन पंडित उपेंद्र शर्मा (खुड़मुड़ी तिल्दा वाले) ने ब्रह्मा का मोहभंग, नाग नाथन ऋषि प|ी उपदेश, चीरहरण, गोवर्धन, रासलीला, कृष्ण का मथुरा गमन, कंस वध, गुरुकुल जाना, बलराम विवाह आदि का प्रसंग सुनाया।

गोचरण कथा में महाराज ने कहा कि प्रभु ने संपत्ति और शरीर शक्ति तुम्हें सही दिया है तो जीवन में गाय रखो और गो पालन जरूर करो। गाय धर्म की मूल है। गाय मां का नाम है। गाय से ही पूरा जहान है। जिस दिन गोवंश समूल नष्ट हो गया तो प्राणी जगत भी नहीं रह पाएगा। गाय ही नरक जाने से बचाती है। गाय ही बैकुंठ और स्वर्ग दिलाती है। लोग आज गाय को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ रहे हैं। जबकि कुत्ते को 30 से 50 हजार में खरीदकर पालते हैं तो याद रखो कुत्ते का कोई अंग तुम्हारे धर्म जीवन में विशेष काम का नहीं है। गाय के गोबर का इतना महत्व है कि हमारे हर पूजा और संस्कार में इसे चाहिए।

पुराणों में भी प्रमाण मिलता है कि जिन की अंतिम सांस चल रही हो या मर गया हो, उसे भी गाय के गोबर से लिपी हुई जमीन पर ही लिटाया जाता है तभी सद्गति मिलती है। श्रीकृष्ण के वृंदावन जाने की कथा में महाराज ने कहा कि वृंदावन कोई स्थान मात्र नहीं है, वह भगवान कृष्ण का धाम है। एक बार तीर्थराज प्रयाग बुला श्रीकृष्ण ने सब तीर्थ मुझे कर देते हैं। आपके कहने पर वृंदावन ही नहीं देता तो श्री कृष्ण ने कहा कि यह मेरा धाम है। यह तुम्हें क्यों टैक्स कर देगा। मैंने तुम्हें तीर्थ का ही राजा बनाया, मेरे धाम का नहीं। श्रीकृष्ण ने तीनों लोक का मंथन कर अपने लिए वृंदावन धाम बनाया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

पंडित उपेंद्र शर्मा

सुहेला. झीपन में भागवत कथा सुनाते हुए श्रद्धालु।

ब्रह्मा भी नहीं समझ पाए कृष्ण का चरित्र

ब्रह्मा के मोहभंग की कथा में पंडित ने कहा कि भगवान को निर्गुण रूप से जानना या भजना जितना की आसान है, उतना ही समझ पाना कठिन है। 84 करोड़ योनियों को बनाने वाले ब्रह्मा भी सुकून अवतारी कृष्ण का चरित्र समझ नहीं पाए। वह भी अचंभित और भ्रमित हो गए। नाग नाथन की कथा में कहा कि कालिया माने हमारे अंदर का क्रोध भाव है। हमें क्रोध करके किसी को दुखी करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। क्रोधी हमारे व्यवहार को कठोर बना देता है। एकमात्र क्रोध के कारण आदमी अपने को सबसे दूर कर डालता है। इसलिए कहा भी जाता है कि क्रोध पाप कर मूल क्रोध में सोच समझ खत्म हो जाती है।

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