करंट ने तबाह की जिंदगी पर अशोक नहीं हारा हौसला और बना मां का सहारा

Anchalik News - आठ साल पहले गरियाबंद में पुताई के दौरान 11 केवी तार की चपेट में आने से देवभोग ब्लॉक से 6 किमी दूर ग्राम लाटापारा...

Dec 04, 2019, 07:51 AM IST
Devbhog News - chhattisgarh news current did not lose ashok on the life of the ruined and made the support of his mother
आठ साल पहले गरियाबंद में पुताई के दौरान 11 केवी तार की चपेट में आने से देवभोग ब्लॉक से 6 किमी दूर ग्राम लाटापारा निवासी अशोक सोनी की जिंदगी तबाह हो गई थी। हादसे में उसका एक हाथ काटना पड़ा था। बाएं हाथ की हथेली काम नहीं करती है अौर दायां पैर भी आकड़ा है। बावजूद इसके उसने विकलांगता को कमजोरी बनने नहीं दिया अौर आज अपने घर के सामने एक छोटी सी किराना दुकान खोलकर फोटो कॉपी मशीन लगाकर मां का गुजारते हुए विकलांगता को मात दे रहा है।

अशोक ने बताया कि मेरे दुख से परेशान होकर हताश पिता ने आत्महत्या कर ली थी। प|ी भी छोड़कर चली गई है। अब बूढ़ी मां के लिए सहारा बनकर बची जिंदगी को जिंदादिली से जीना है। विकलांगता सर्टिफिकेट का उसे कोई फायदा नहीं मिला है, इसलिए खुद के प्रयास से किराना दुकान से रोजाना 200 से 250 रुपए कमाकर गुजारा चल रहा है। अशोक की जिद्द है कि हादसे में गई संपति को हासिल कर मां को पूरी खुशियां देगा।

देवभोग. लाटापारा में मां के साथ दुकान में बैठा दिव्यांग अशोक सोनी।

इकलौते बेटे के गम में पिता ने दे दी जान, प|ी भी छोड़ गई

पेंटिंग, पुट्टी अौर प्लंबरिंग का काम कर अशोक चंद्रध्वज अौर शोभा बाई का अशोक इकलौता सहारा बना था। 13 जून 2011 को गरियाबंद के शिक्षक नगर में रघुनाथ साहू के घर में पुट्टी करने के दौरान छत से गुजरे 11 केवी के हाईटेंशन तार की चपेट में आ गया था। इस हादसे में उसकी जिंदगी खराब कर दी। हादसे के वक्त मकान मालिक ने बिना रिपोर्ट दर्ज कराया इलाज के नाम पर 30 हजार देकर पल्ला झाड़ लिया था। करंट लगने से दाहिने हाथ को काटना पड़ा था। 2011 से 2014 तक बूढ़े मां-बाप ने अपनी सारी संपति बेटे के इलाज में फूंक दी थी। करंट के घाव इतने गंभीर थे कि इलाज के लिए और पैसों की जरूरत पड़ थी पर इस समय अशोक के दर्द को भगाने लाचार पिता के सामने शराब देने के अलावा कोई चारा नहीं था। कर्ज व दर्द से जूझ रहे बेटे से परेशान पिता ने 26 मार्च 2016 को घर के सामने आत्महत्या कर जान दे दी थी।

गरियाबंद के भाजपा नेताअों की मदद से बना आत्मनिर्भर

पिता की मौत के बाद तत्कालीन सरकार ने अशोक के इलाज के लिए 2 लाख रुपए अनुदान दिया था। गरियाबंद के भाजपा नेता गफ्फू मेमन अौर स्थानीय जनपद अध्यक्ष नेहा सिंघल, आसलम मेमन की मदद के बाद उसकी सेहत सुधरी, तब तक बिस्तर पर 5 साल गुजार गए। इसके बाद अशोक ने बिना सहारे चलना शुरू किया तो आज उसने अपने मित्रों से कर्ज लेकर घर के सामने दुकान रख ली है।

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