हाथी उत्पात मचाने लगे, टेमरी में कच्चे मकान तोड़े, 10 एकड़ की बाड़ी रौंद दी

Anchalik News - 17 जंगली हाथियों के झुंड ने 14 अक्टूबर को महानदी पार कर बारनवापारा के घने जंगल से मैदानी इलाकों में धमनी जंगल के...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:36 AM IST
Palari News - chhattisgarh news elephants rage demolish raw houses in temri trample 10 acres of fence
17 जंगली हाथियों के झुंड ने 14 अक्टूबर को महानदी पार कर बारनवापारा के घने जंगल से मैदानी इलाकों में धमनी जंगल के रास्ते प्रवेश किया। हाथियों के मैदानी इलाके में 21 दिनों से डेरा डालने से स्थानीय लोग और वन विभाग काफी चिंतित है। पिछले 26 दिनों से यहां ठहरे हाथियों ने अब उत्पात मचाना भी शुरू कर दिया है । हाथियों ने दो दिन पहले रोहांसी जंगल से लगे गांव टेमरी में किसानों के खेतों में लगे सोलर पैनल को तोड़ा तो वहीं शुक्रवार की रात गांव में सब्जी बाड़ी लगाने वाले किसानों के बाड़ी में बने कच्चे मकानों को भी तोड़ दिया। पिछले दो दिनों में 5 से 6 कच्चे मकानों को हाथियों ने रात में गांव में घुसकर तोड़ दिया और करीब 10 एकड़ की सब्जी बाड़ी को भी रौंदकर नुकसान पहुंचाया है।

हाथियों का यह दल शुरुआती 5 दिनों तक करीब 30 से अधिक गांवों में उत्पात मचाते हुए राजधानी के करीब के गांवों तक जा पहुंचा था जो वापस आकर रोहांसी गांव में स्थित बांस की नर्सरी में पिछले 21 दिनों से डेरा जमाए हुए है। तब से हाथी आसपास के गांवों टेमरी, खेलवारी, रोहांसी, खैरा, अमेठी के खेतों में लगी धान के फसल को रौंद रहे हैं तो कहीं खड़ी फसल चट कर भूख मिटा रहे हैं।

शुक्रवार रात टेमरी के जिन ग्रामीणों के मकान टूटे उनमें लेखराम निषाद, रामा पटेल, टेकराम पटेल, जानू पटेल आदि शामिल हैं। हाथी टेमरी गांव में अंदर तक घुसकर वहां के तालाब में पानी पी रहे हैं जिससे तालाब की पचरी भी टूट गई है। तालाब के आबादी क्षेत्र से लगे होने से रात्रि में लोग दिशा मैदान जाने के लिए जाने से डरने लगे हैं वहीं जिन गरीबों के कच्चा मकान हैं, वे मारे भय के रात में सो नही‌ं पा रहे हैं। उन्हें भय है कि कहीं रात में हाथी मकान न तोड़ दें इसलिए वे रतजगा कर रहे हैं।

पलारी. शुक्रवार रात को टेमरी में मकान तोड़नेे के बाद सुबह-सुबह रोहांसी की बांस नर्सरी में घुसते हाथी।

पलारी. टेमरी गांव में बाड़ी में बने कच्चे घरों हाथियों ने तोड़ दिया।

फसल नुकसान का मुआवजा 9 हजार रुपए प्रति एकड़ जबकि समर्थन मूल्य मिलता है 40 हजार

वही हाथियों के उत्पात से करीब 1200 एकड़ जमीन पर लगी धान की फसल बर्बाद हुई है जिसमें 700 से अधिक किसानों का मुआवजा प्रकरण बनाया जा रहा है , जिन्हें 9 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा मिलेगा। इधर किसान दुविधा में भी हैं क्योंकि नियमत: जिन किसानों को मुआवजा मिलेगा, उनका धान मंडियों में नहीं खरीदा जाएगा। वही सम्पत्ति नुकसान का भी अलग प्रकरण बनता है जिसका सर्वे अभी बाकी है। इस संबंध में डीएफओ आलोक तिवारी का कहना है कि हाथियों का इतने लंबे समय तक एक छोटी जगह पर टिके रहना समझ से परे है, उन्होंने बताया कि पिछले 26 दिनों से मैदानी इलाकों में हाथियों ने जो नुकसान किया है उसमें करीब 700 किसानों की 1200 एकड़ के फसल का क्षतिपूर्ति प्रकरण बनाया जा रहा है। वहीं संपत्ति हानि का भी सर्वे कराया जा रहा है। किसानों की पूरी जमीन का मुआवजा प्रकरण नहीं बनाया जा रहा है, इसलिए वे अपना धान मंडी में भी बेच सकते हैं। मुआवजा और धान बेचना दोनों अलग विषय हैं। बताना जरूरी है कि समर्थन मूल्य पर किसान को धान बेचने पर करीब 40 हजार रुपए मिलते हैं जबकि वन विभाग मुआवजा के रूप में 9 हजार ही देगा, जिससे सीधे-सीधे किसानों 36 हजार का नुकसान है।

छोटी जगह पर इतने लंबे समय क्यों रुके हाथी

पिछले 21 दिनों से रोहांसी के बहुत ही छोटे सी बांस की नर्सरी में हाथियों के इतने लंबे समय तक ठहरने की वजह ढूंढने में भी अधिकारी लगे हैं। विशेषज्ञों और विभाग के अधिकारियों का मानना है कि हाथियों को खदेड़ने के सारे उपाय किए गए और इतना भारी मात्रा में पटाखा फोड़कर मिर्ची का धुआं कर मशाल भी जलाई गई पर हाथियों का झुंड टस से मस नहीं हो रहा है। संभवत: बच्चों (शावकों) और क्षेत्र में उपलब्ध चारा (फसल) पानी की वजह से हाथी इतना लंबा टिके हैं।

Palari News - chhattisgarh news elephants rage demolish raw houses in temri trample 10 acres of fence
X
Palari News - chhattisgarh news elephants rage demolish raw houses in temri trample 10 acres of fence
Palari News - chhattisgarh news elephants rage demolish raw houses in temri trample 10 acres of fence
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना