जामा मस्जिद में फजर नमाज पढ़ी, परचम कुशाई के साथ जुलूस निकाला, इमाम ने मांगी अमन की दुआ

Anchalik News - मुस्लिम समाज ने रसूल पैगंबर मोहम्मद सल्लाहो अलैहे वसल्लम का जन्मदिन जश्‍ने ईद मिलादुन्नबी शानो-शौकत के साथ...

Nov 11, 2019, 06:30 AM IST
मुस्लिम समाज ने रसूल पैगंबर मोहम्मद सल्लाहो अलैहे वसल्लम का जन्मदिन जश्‍ने ईद मिलादुन्नबी शानो-शौकत के साथ रविवार को मनाया। सुबह फजर की नमाज के बाद से ही त्योहार की रंगत बढ़ने लगी। सुबह 9 बजे ही सदर रोड स्थित जामा मस्जिद से जुलूस शहर में गश्त करते हुए मस्जिद पहुंचा। जुलूस के दौरान ही परचम कुशाई कराई गई। जुलूस का गांधी चौक, नेहरू चौक, लोहिया नगर, नयापारा, रजा चौक, ठाकुर देव चौक में लोगों ने इस्तकबाल किया। सलाम पेश हुआ, इमाम साहब ने अमन चैन की दुआ मांगी।

इस्लामी नारों के साथ सैकड़ों की संख्या में जुलूस में समस्त सुन्नी मुस्लिम भाई शरीक थे। जामा मस्जिद के अध्यक्ष सहित समस्त कमेटी के सदस्य शामिल थे। समाज ने जगह-जगह जुलूस में शामिल लोगों के लिए शर्बत, हलवा, पुलाव की व्यवस्था की थी। वहीं मस्जिद मोहल्ले को खूब सजाया गया। नई कमेटी ने शेख इमाम व मौलाना हाजियों का स्वागत किया। समाज के मुत्वल्ली, आरिफ अली, इमरान खान, अब्दुल हक, सैय्यद मरूल हुसैन, हाजी गफ्फार चैहान, हाजी ईब्राहिम, बशीर रजा, हाजी याकूब चैहान, नसीम अहमद, शेख सिराजुल हक, सैयद आसिफ अली, अशरफ चैहान, तनवीर अहमद, वहीद कसाब, शेख मुन्ना, मो. जिलानी खान सहित बडी संख्या में मुस्लिम बंधु शामिल थे।

बलौदाबाजार. पैगंबर साहब के जन्मदिन पर निकाले गए जुलूस में शामिल मुस्लिम समाज।

मक्का में हुआ था पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्म, हीरा गुफा में ज्ञान की प्राप्ति हुई

पैगंबर मोहम्मद का पूरा नाम पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम था। वह इस्लाम के सबसे महान नबी और आखिरी पैगंबर थे। उनका जन्म मक्का में हुआ था इनके पिता का नाम मोहम्मद इब्न अब्दुल्लाह इब्न अब्दुल मुत्तलिब और माता का नाम बीबी अमीना था। कहा जाता है कि 610 ईसवीं में मक्का के पास हीरा नाम की गुफा में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म की पवित्र किताब कुरान की शिक्षाओं का उपदेश दिया। हजरत मोहम्मद ने 25 साल की उम्र में खदीजा नाम की विधवा से शादी की। उनके बच्चे हुए, लेकिन लड़कों की मृत्यु हो गई, उनकी एक बेटी का अली हुसैन से निकाह हुआ। उनकी मृत्यु 632 ई. में हुई। उन्हें मदीना में ही दफनाया गया।

धारा 144 के साये में निकला जुलूस

राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद स्थानीय प्रशासन जुलूस के दौरान काफी सतर्क था। धारा 144 लगे होने के बाद भी प्रशासन ने शहर के दोनों समुदायों के बीच सद्भावनापूर्ण माहौल की पूर्व परंपरा के चलते जुलूस के लिए समाज को 3 घंटे का समय दिया था। काफी संख्या में पुलिस बल की तैनाती बता रही थी कि शहर के सौहार्द को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से तैयार है।

दरगाह शरीफ में चादर पोशी के बाद निकला जुलूस, लटेरा में बांटी खीर

पलारी| पलारी लटेरा में मुस्लिम जमात ने जामा मस्जिद से ईद मिलादुन्नबी का जुलूस निकली, जो नगर के मुख्य रास्तों से होकर बस स्टैंड होते हुए वापस दरगाह शरीफ पहुंचा। यहां चादर पोशी करके देश में अमन चैन की दुआ की गई। जुलूस में मुतवल्ली मोहम्मद अली, आजम खान, आज बेग, शरीफ मोहम्मद, अजमेर खान, अजब बेग, शेर खान, फाजल खान, सुल्तान बेग, इब्राहिम बेग, सुभान बेग, असगर खान, मोहम्मद लतीफ, इस्लाम बेग, अजमेर बेग, रसीद मोहम्मद, मुस्तफा बेग, सय्यद अली, अख्तर बेग, रज्जाक खान, ईद मोहम्मद, अमीद अली, अनवर अली, करामात अली, गुड्डा, बबलू, रोहित आदि बड़ी संख्या में जमात के लोग शामिल हुए। जुलूस का जगह-जगह स्वागत कर लटेरा में खीर बांटी गई।

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