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थाने बुलाने पर शासन ने कोर्ट को बताया याचिकाकर्ता ने नौकरी के नाम पर उगाही की

एक वर्ष पहले
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सिविल लाइन थाने बिलासपुर में एफआईआर के बिना बार-बार बुलाए जाने को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। कोर्ट में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा उपस्थित हुए। शासन की तरफ से जवाब में बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ नौकरी के नाम पर चेक लेने और उसका उपयोग करने की शिकायत हुई है। इसकी जांच की जा रही थी, इस दौरान उनका बयान लेने के लिए एसआई ने थाने बुलाया था। अब मामले की अगली सुनवाई 1 सप्ताह बाद होगी।

रुपेश कुमार साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने सिविल लाइन थाने के एसआई शंकर गोस्वामी पर आरोप लगाए थे कि वे बेवजह बिना एफआईआर हुए उनको थाने बुलाकर परेशान कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने राज्य शासन से जवाब तलब करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी को तलब किया था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा राज्य शासन का जवाब लेकर उपस्थित हुए। शासन की तरफ से अधिवक्ता मतीन सिद्दिकी ने पक्ष रखा। इसमें बताया गया कि सुनील शर्मा ने थाने में लिखित शिकायत की है कि याचिकाकर्ता रूपेश साहू ने उससे नौकरी लगाने के नाम पर ब्लैंक चेक लिए और उसका उपयोग किया है। जांच करने के लिए एसआई गोस्वामी ने फोन करके उनको थाने बुलाया और बयान लिया था। इस दौरान याचिकाकर्ता ने गोस्वामी को राजनैतिक पहुंच का हवाला देते हुए वर्दी उतरवाने की धमकी दी थी। इसे रोजनामचा सन्हा में भी दर्ज किया गया है। साथ ही प्रकरण दर्ज न हो इसलिए एसआई को फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले एसपी के पास भी याचिकाकर्ता ने शिकायत की थी। जिसकी जांच सीएसपी सिविल लाइन की तीन सदस्यीय टीम ने की थी। उस रिपोर्ट को भी कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है। राज्य शासन के जवाब के बाद याचिकाकर्ता के तरफ से प्रति उत्तर जवाब प्रस्तुत कर दिया गया है। इस पर शासन की तरफ से जवाब दिया जाना है।

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