कवि सम्मेलन में देशभर के कवियों ने श्रृंगार और वीर की कविताओं से बांधा समा, हास्य व्यंग्यों से खूब हंसाया

Anchalik News - भारत विकास परिषद मुंगेली के द्वारा कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश भर से पधारे...

Sep 23, 2019, 07:50 AM IST
भारत विकास परिषद मुंगेली के द्वारा कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश भर से पधारे कवियों ने अपनी कविताओं की प्रस्तुति से खूबसूरत समा बांधा। देर रात तक श्रोताओं ने उपस्थित रहकर कविताओं का आनंद लिया।

अतिथियों का स्वागत भारत विकास परिषद के पदाधिकारी एवं सदस्यों के द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री एवं क्षेत्र के विधायक पुन्नूलाल मोहले ने कहा कि मुंगेली में कवि सम्मेलन की एक मान्य परंपरा रही है और मुंगेली की पहचान को बनाए रखना हम सब का कर्तव्य है। पूर्व सांसद लखनलाल साहू ने कहा साहित्य प्रेमियों की नगरी मुंगेली अपने ऐतिहासिक कवि सम्मेलन के नाम से जाना जाता है और यह परंपरा कायम रहनी चाहिए। मुख्य प्रायोजक हेमेंद्र गोस्वामी ने कहा कि साहित्यिक गतिविधियों के विस्तार के लिए जो भी सहयोग अपेक्षित है वे उसे पूरा करेंगे और यथासंभव सहयोग देंगे। सह प्रायोजक समाजसेवी संतुलाल सोनकर ने निस्वार्थ भाव से साहित्यिक गतिविधियों के संचालन के लिए अपने सहयोग देने की बात कही। इस अवसर भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारी अरविंद गर्ग ने परिषद के कार्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए मुंगेली में कवि सम्मेलन के आयोजन के लिए साधुवाद दिया। सम्मेलन को जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आत्मा सिंह क्षत्री, नगर पालिका अध्यक्ष सावित्री अनिल सोनी, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष शैलेश पाठक ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी साहित्य सृजन के क्षेत्र में विशेष सम्मान प्राप्त करने के लिए भारत विकास परिषद की ओर से मुंगेली के ख्याति लब्ध साहित्यकार नंदराम यादव ‘निशांत ‘का भी विशेष रूप से सम्मान किया गया।

विधायक ने कहा- मुंगेली में कवि सम्मेलन की एक परंपरा रही है, इसे बचाकर रखना है

कृषि उपज मंडी में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने देर रात तक सुनाईं कविताएं।

जहां पेड़ पर चांद आने लगे हैं हजारों तरफ निशाने लगे हैं...

प्रसिद्ध गजलकार अर्जन सिंह चांद ने यह सुंदर पंक्तियां पढ़ी कि ‘जहां पेड़ पर चांद आने लगे हैं हजारों तरफ से निशाने लगे हैं, घड़ी दर घड़ी इनको पलकों में रख लो यहां इनको आने में जमाने लगे हैं।’ श्रृंगार रस की कवयित्री सरिता सरोज ने अपने गजल और शेरोशायरी से लोगों का मन मोह लिया। उनकी यह पंक्तियां कि ‘तेरे नैनों की खातिर हम दीवाने हो गए‘.. को लोगों ने खूब पसंद किया। रायपुर छत्तीसगढ़ के विख्यात गीतकार रमेश विश्वहार की इन पंक्तियां को लोगों ने खूब पसंद किया कि ‘ तेरे नैनों की मधुशाला में हम इतने खो गए, कि जो खत मिले प्यार के वो भी सब जला दिए‘ को लोगों ने खूब पसंद किया।

महाराष्ट्र की सरोज ने सुनाई सरस्वती वंदना, पाकिस्तान पर कटाक्ष

गोंदिया महाराष्ट्र से पधारे श्रृंगार की कवयित्री सरिता सरोज ने मां सरस्वती की सुमधुर स्वर में वंदना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कवि सम्मेलन का संचालन प्रसिद्ध गजलकार अर्जन सिंह चांद ने किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत नांदघाट छग के हास्य व्यंग के पुरोधा कृष्णा भारती ने अपने चुटीले छत्तीसगढ़ी हास्य व्यंग कविताओं के माध्यम से लोगों को हंसने और गुदगुदाने के लिए मजबूर किया। उनकी छत्तीसगढ़ी कविता ‘जगह-जगह में खो-खो फुगड़ी पांचवां अउ भटकऊला, आंखी ऊपर फरिया बांधे खेले सुग्घर छुवउला ‘ को लोगों ने बेहद पसंद किया। वीर रस के कवि कमलेश राजहंस ने पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए यह पंक्तियां पढ़ी ‘ जोर नहीं अब बाजुओं में पर दम लगाए रहते हैं पता नहीं हमसे क्यों इतना वहम लगाए बैठे हैं।

हास्य व्यंग्यकार अनिलकांत बख्शी ने देर रात तक लोगों को हंसाया, छत्तीसगढ़ी में कविताएं सुनाकर गुदगुदाया

हास्य व्यंग्य के पुरोधा राजनांदगांव के अनिलकांत बख्शी ने भी अपनी छत्तीसगढ़ी कविताओं के माध्यम से लोगों को खूब हंसाया। उन्होंने कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक व्यंग्य सुनाए। वहीं छत्तीगढ़ी में कविताएं सुनाकर लोगों को मन मोह लिया। लोगों ने उनके व्यंग्यों पर जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम का संचालन अशोक सोनी एवं देवेंद्र परिहार ने किया आभार प्रदर्शन आकाश परिहार ने किया। इस अवसर पर श्रीकांत गोवर्धन, डॉ. चंद्रशेखर सिंह, रवि पुराणिक, प्रो. अशोक गुप्ता, चंद्रशेखर शर्मा, आकाश परिहार, अशोक सोनी, जेठमल कोटड़िया, देव गोस्वामी, अभिषेक जैन, सरिता वाजपेयी, डॉ. सुमित तिवारी, कमल सोनी, चिंतामणि तिवारी, योगेश सोनी, रोशन सोनी, आकाश सोनी, देवेंद्र सिंह परिहार, आशीष तिवारी, रामशरण यादव, रामपाल सिंह, आकाश चंदेल, जगदीश देवांगन, डॉ. शिव कुमार बंजारा, शिवरतन लाल सोनी, धनेश सोलंकी, प्रवीण वैष्णव, सुधारानी शर्मा, संतोष वैष्णव, लक्ष्मी सोनी, डॉ. प्रेम कुमार वर्मा, सुरेश शर्मा, विमल लूनिया, नवरतन जैन, अरुण कोटडिया, किशोरी लाल केशरवानी, किशोर चंदेल, रविन्द्र गुप्ता का विशेष योगदान रहा।

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