15 मिनट में दूध, खाद्य तेलों के हानिकारक तत्वों की पहचान करेगी रैपिड फूड टेस्टिंग किट

Anchalik News - अब दूध और खाद्य तेलों में हानिकारक तत्वों की पहचान तत्काल की जा सकेगी। यह भी जाना जा सकेगा कि खेत से खलिहान होकर...

Feb 20, 2020, 06:40 AM IST
Bhatapara News - chhattisgarh news rapid food testing kit will identify harmful elements of milk edible oils in 15 minutes

अब दूध और खाद्य तेलों में हानिकारक तत्वों की पहचान तत्काल की जा सकेगी। यह भी जाना जा सकेगा कि खेत से खलिहान होकर बाजार तक पहुंची फसल से बनाई गई खाद्य सामग्री में कितनी मात्रा में ऊर्व रक और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया गया है, यह भी पता चलेगा कि इनकी वजह से बनी खाद्य सामग्री के सेवन से मानव शरीर को क्या नुकसान हो सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने छत्तीसगढ़ को ’रैपिड फूड टेस्टिंग किट’ दे दिए हैं ताकि ऐसे सभी मामलों की जांच प्रामाणिकता के साथ हो सके।

उल्लेखनीय तथ्य ये है कि किट अभी रायपुर में ही है, मांग आने पर संबंधित जिलों या क्षेत्रों में भेजी जाएगी। लैबोरेटरी में जो परीक्षण 30 दिन में हो पाता था, वो इस किट से मौके पर 10 से 15 मिनट में ही हो जाएगा।

डाॅ. आरके शुक्ल असिस्टेंट कमिश्नर खाद्य एवं औषधि प्रशासन रायपुर ने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से पहली बार छत्तीसगढ़ को 3 फूड टेस्टिंग किट मिल चुकी हैं। विभाग के मुख्यालय की लैबोरेटरी में इसे लगाया जा रहा है। बहुत जल्द यह किट काम करना चालू कर देगी। दूध और दूध से बनी खाद्य सामग्री का खाद्य तेलों में हानिकारक तत्वों की पहचान अब पूरी तरह सुनिश्चित होने जा रही है। परंपरागत मशीनों की जगह अब खाद्य परीक्षण शाला में रेपिड फूड टेस्टिंग किट की मदद से त्वरित और मान्य परिणाम मिल सकेंगे। अभी तक खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की राजधानी स्थित लेबोरेटरी में परंपरागत मशीनों से ही जांच होती रही है लेकिन नई रेपिड फूड टेस्टिंग किट लेबोरेटरी का काम हल्का और सरल करने जा रही है। प्राधिकरण द्वारा भेजी गई यह किट बहुत जल्द काम करने लगेगी।

अधिकारियों को प्रशिक्षण

रैपिड फूड टेस्टिंग किट का उपयोग कैसे करना है इसकी जानकारी के लिए प्राधिकरण के निर्देश के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अपने सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को इसकी प्रशिक्षण दिया है। किट लगाने के बाद बहुत जल्द प्रभावी जांच के लिए ये अधिकारी सैंपल भेज सकेंगे और प्रामाणिक, त्वरित और मान्य परिणाम हासिल कर सकेंगे।


इसलिए टेस्टिंग किट जरूरी थी

राज्य निर्माण के बाद विकास के काम खूब हुए। समानांतर में बाजार भी बढ़ता गया। इसी के साथ खाद्य एवं पेय पदार्थों में मिलावट की शिकायतें भी बढ़ती गईं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जब दूध और दुग्ध पदार्थेां की जांच की तो इसमें भारी मिलावट और अमानक तत्वों पाए गए और हानिकारक तत्व भी मिले। खाद्य तेलों में भी ऐसी ही शिकायतें मिलीं। रोकथाम की तमाम कोशिशों के बावजूद उपलब्ध उपकरणों से समय पर और नतीजे सही नहीं मिले इसलिए अब नई रैपिड फूड टेस्टिंग किट का उपयोग किया जाएगा ताकि ऐसी गतिविधियों पर कड़ाई से तत्काल लगाम कसी जा सके।


सल्फर ड्रग्स की पहचान तुरंत

खाद्य एवं औषधि प्रशासन की लेबोरेटरी में भेजे जाने वाले सैंपल में रैपिड फूड टेस्टिंग की मदद से दूध और उससे बनी खाद्य सामग्री में एफलाटाॅक्सिन-एंटीबाॅयोटिक्स और सल्फर ड्रग्स की मात्रा की सटीक जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा मैटल-हैवी मैटल का भी खुलासा हो सकेगा। सबसे अहम जानकारी इस किट से जो मिलेगी वह यह होगी कि खाद्य सामग्री में यह पता लगाया जा सकेगा कि किसमें कितनी मात्रा में रासायनिक ऊर्वरक और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव हुआ है। यह भी जानकारी मिलेगी कि मानक मात्रा कम है या ज्यादा क्योंकि इस काम में मानक का ध्यान नहीं
रखा जाता।


खाद्य एवं औषधि प्रशासन के रायपुर स्थित दफ्तर में पहुंची किट।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन में 1 और मोबाइल फूड लेब वैन मिलेगी

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में इस समय 4 मोबाइल फूड लेब वैन हैं। जांच का विस्तार करते हुए अब प्रशासन की मांग पर एक और वैन मिलने जा रही है। इसके मिल जाने के बाद अब राज्य में 5 मोबाइल फूड वैन हो जाएंगी। इसके बाद प्रशासन को जांच का दायरा और बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी क्योंकि जिले में काम कर रही एजेंसियां लगातार इसकी उपलब्धता चाहती रही हैं।

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