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बिजली बिल में त्रुटि सुधार के लिए जिम्मेदारी तय

एक वर्ष पहले
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त्रुटिपूर्ण बिजली बिल में सुधार के लिए अब अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। राज्य विद्युत वितरण कंपनी में इसके लिए राशि के अनुसार 5 अधिकारियों की 5 ग्रेड में बिल में सुधार करने की जिम्मेदारी तय कर दी है। तय राशि से अधिक राशि का बिल होने पर उपर के अधिकारियों को यह काम करना होगा।

राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली बिल में त्रुटि सुधार की लचर व्यवस्था में सुधार की व्यापक संभावना को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की है। जीपी अनंत, कार्यपालन अभियंता छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण भाटापारा ने बताया कि मुख्यालय के आदेश के बाद नया फैसला सभी बिजली कार्यालयों में समान रूप से लागू किया जा चुका है। अब इसी के अनुसार त्रुटिपूर्ण बिल में सुधार के काम होंगे।

इसमें पद के अनुरूप सभी अधिकारियों के बीच राशि निर्धारित कर उस राशि के भीतर का काम करना होगा। यानी राशि सीमा के भीतर संबंधित अधिकारी त्रुटिपूर्ण बिल में सुधार कर सकेंगे। निर्धारित रकम से ज्यादा के त्रुटिपूर्ण बिल में सुधार के लिए अपने से उपर के अधिकारी को भेजना होगा तब नहीं जाकर उपभोक्ता का बिल सुधारा जाएगा।त्रुटिपूर्ण बिल सुधार के लिए उठाए गए नए फैसले के बाद जूनियर इंजीनियर की भूमिका फ़ैसले के केंद्र में है। किसी भी बिल में सुधार करने के लिए बनी फाइल सबसे पहले जेई के पास पहुंचेगी। यह फाइल राशि के मुताबिक एई, ईई से होते हुए एसई तक पहुंचेगी। तब कहीं जाकर उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। नया फैसला सभी बिजली ऑफिसों में लागू हो चुका है।

कौन कितनी राशि तक का बिल सुधारेगा

{जूनियर इंजीनियर : 5000 तक।

{ असिस्टेंट इंजीनियर : 10000 तक।

{ एजुकेटेड इंजीनियर : 50000 तक।

{ सुपरिटेंडेंट इंजीनियर : एक लाख तक।

{ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर : एक लाख से अधिक की राशि।

जेई से ईडी तक को दी गई जिम्मेदारी


राज्य विद्युत वितरण कंपनी के नए आदेश के बाद जूनियर इंजीनियर से लेकर कार्यपालक निदेशक तक 5 स्तर में पांच अलग-अलग बिल राशि में सुधार की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। सभी अधिकारी अपनी तय सीमा राशि के भीतर के त्रुटिपूर्ण बिल में सुधार के लिए अधिकृत होंगे। तय सीमा राशि से उपर त्रुटिपूर्ण बिल में सुधार के लिए उन्हें अपने से उपर के अधिकारी तक प्रकरण भेजना होगा, तब कहीं जाकर ऐसे बिल में सुधार हो सकेगा।

इसलिए उठाना पड़ा यह नया कदम

दरअसल यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि त्रुटिपूर्ण बिजली बिल में सुधार के लिए सक्षम अधिकारी कौन होंगे, यह तय नहीं था। ऐसे में अधिकारी और कर्मचारी मिलकर अपने स्तर पर ऐसे बिल में सुधार का काम कर लेते थे। इससे एक बड़े राजस्व की हानि मंडल को हो रही थी। नए नियम में सभी अधिकारियों को एक निश्चित राशि का अधिकार दिया गया है। इससे मिलीभगत खत्म हो सकेगी और जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।
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