संतों का काम चौकीदारी कर जागकर लोगों को जागृत करना है: पं. हरिशरण

Anchalik News - कसडोल. गनियारी में भागवत कथा सुनती हुईं क्षेत्र की महिलाएं। कसडोल| संतों का कार्य चौकीदार की तरह रहकर जागते और...

Feb 15, 2020, 07:25 AM IST
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कसडोल. गनियारी में भागवत कथा सुनती हुईं क्षेत्र की महिलाएं।

कसडोल| संतों का कार्य चौकीदार की तरह रहकर जागते और जगाते रहना है, उसकी थोड़ी सी निद्रा भी खतरनाक हो सकती है। उक्त बातें कथा वाचक पं. हरिशरण वैष्णव ने ग्राम गनियारी में भागवत कथा सुनाते हुए कहा। उन्होंने आगे कहा कि प्रतिदिन एक जूठी रोटी खाने वाला कुत्ता अपने मालिक के घर की चौकीदारी वफादारी से करता है।

संतों को तो लोग आसन पर बैठाकर सबसे पहले रोटी देते हैं इसलिए उन्हें जागते और जगाते रहना चाहिए। कथा सुनने के लिए लोग संतों को ऊंचे आसन पर बैठाकर खुद जमीन पर बैठते हैं। जमीन पर बैठने वाले जमीदार होता है, जबकि चौकी पर बैठने वाला चौकीदार कहलाता है। संन्यासी भागा हुआ नहीं जागा हुआ होता है। जो जागा हुआ है वही जोगी है। केवल भगवा या सफेद वस्त्र पहन लेने से कोई साधु या संन्यासी नहीं हो जाता। उसके लिए वृत्ति बदलनी पड़ती है, घर में रहकर भी सन्यास हो सकता है। संन्यासी का अर्थ थका हुआ नहीं पका हुआ होता है और पके हुए आदमी में मधुरता होती है। साधु वह है, जो सौम्य और सरल हो, जिसके व्यवहार में माधुर्य हो, वैराग्य के लिए किसी को छोड़ना नहीं पड़ता, बल्कि सब छूट जाता है। त्याग करना अच्छी बात है, लेकिन त्याग का भी त्याग करना चाहिए अन्यथा अहंकार पैदा होता है, जो पतन का कारण बनता है।

महाराज कहा कि मोह छोड़े बगैर परमात्मा के चरणों में अनुराग नहीं हो सकता। सत्संग के बिना हरि कथा नहीं मिलती। हरि कथा के बगैर मोह नहीं छूटेगा और मोह के न छूटने पर परमात्मा के चरणों में अनुराग नहीं होगा, सारी समस्याओं का जड़ मोह है। रामायण में रावण और महाभारत में धृतराष्ट्र, भागवत में धुंधकारी मोह के प्रतीक हैं। रामायण और महाभारत पात्र शाश्वत वृत्तियां हैं, जो हमारे भीतर जी रही हैं। धृतराष्ट्र का अंधा होना मोह का अंधापन है, जबकि आंखों पर पट्टी बांध लेना ममता में अंध होने का प्रतीक है। ये ममता मोह की पतिव्रता नारी हैं। सन्तान कौरव अधर्म में अंधे होने का प्रतीक है। सन्तान को दृष्टि देने वाला प्रथम गुरु माता-पिता है, आचार्य का नंबर बाद में आता है। कथा में आगे आजमीन उद्धार, नाम महिमा, प्रह्लाद चरित्र की कथा सुनाई गई। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में भक्त शामिल रहे।

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