किसी के दो बार, और जो गांव में रहते नहीं उनके नाम पर भी सरपंच ने बनवा दिए शौचालय

Anchalik News - सरकार स्वच्छता अभियान के तहत हर घर में शौचालय बनाने एवं खुले में शौचमुक्त गांव की पहल कर विशेष अभियान चलाकर 12 हजार...

Bhaskar News Network

Oct 22, 2019, 07:30 AM IST
Palari News - chhattisgarh news the sarpanch built toilets in the name of someone twice and in the name of those who do not live in the village
सरकार स्वच्छता अभियान के तहत हर घर में शौचालय बनाने एवं खुले में शौचमुक्त गांव की पहल कर विशेष अभियान चलाकर 12 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि हितग्राहियों को दे रही है। इस योजना को दलालों ने कमाई का जरिया बनाकर फर्जी तरीके से गांवों को ओडीएफ भी गांवों करा लिया और हितग्राहियों को पैसा नहीं मिला और न ही पूरे-पूरे शौचालय बने हैं।

ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है जनपद पंचायत पलारी के ग्राम पंचायत साराडीह का, जहां दो साल पहले खुले में शौचमुक्त गांव बनाने 305 शौचालय स्वीकृत हुए जिसमें 20 लोगों के नाम ऐसे थे जो दो-दो बार सूची में स्थान पा गए तो वहीं 15 लोगों के नाम ऐसे थे जो गांव के ही नहीं थे। और तो और 5 मृत लोगों और एक लड़की जो 5 साल पहले ही शादी होकर ससुराल चली गई है उसके नाम से भी शौचालय की स्वीकृति सरपंच ने ले ली।

सरपंच नूतन ने फर्जीवाड़ा कर सभी शौचालय बनाने का प्रमाण पत्र देकर शासन से भुगतान भी ले लिया मगर अभी तक पूरी राशि हितग्राहियों को नहीं मिली है। इसकी शिकायत लगातार पिछले दो साल से ग्रामीण कलेक्टर जनदर्शन और जनपद पंचायत में अधिकारियों से कर रहे हैं मगर आज तक अधिकारी जांच करने नहीं पहुंचे हैं। टीकाराम, धनवा, राजेन्द्र, अलख, अंजली, द्वारिका, कुलंजन, पुरुषोत्तम, डोमार, मुकुट, रामचंद्र, यशकुमार, लखन, केवरा आदि ग्रामीणों ने बताया कि उनको शौचालय की प्रोत्साहन राशि नही मिला है जबकि सभी ने अपने पैसों से शौचालय बनवाए हैं। इसकी शिकायत दो साल से अधिकारियों से कर रहे हैं। कलेक्टर जनदर्शन, जनपद पलारी से भी शिकायत कर थक चुके हैं अभी तक न कोई जांच करने आया और न पैसा मिला है।

पलारी. साराडीह के ग्रामीण जिन्हें दो साल से भुगतान नहीं मिला है।

सरपंच बोलीं- ग्रामीणों के कहने पर ही ऐसा किया

इस संबंध में सरपंच नूतन हेमलाल ध्रुव का कहना है कि उन्होंने गांव वालों के कहने पर ही ऐसा किया है, जबकि जनपद पंचायत सीईओ सनत महादेवा का कहना है कि वे इस मामले को जल्द ही दिखवाएंगे कि ऐसा क्यों हुआ।

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सोनसील बाई

गरीबी रेखा से नाम हटाने का भय भी दिखाया...

सरपंच ने गांव में मुनादी करा दी कि जिस घर में जो शौचालय नहीं बनवाएगा उसका नाम गरीबी रेखा राशनकार्ड की सूची से कट जाएगा, इस डर से सभी ने शौचालय बनवा लिए। गांव के 25-30 शौचालय सरपंच ने खुद बनवाए, बाकी हितग्राहियों ने बनवाए। इन शौचालयों का भुगतान जनपद से पंचायत के खाते में आया भी मगर सरपंच ने कुछ ही लोगों को आधा अधूरा पैसा देकर बाकी पैसे का गोलमाल कर दिया। इसकी शिकायत ग्रामीण लगातार अधिकारियों से कर रहे हैं पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

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