आज सुपेबेड़ा में चौपाल लगाएंगी राज्यपाल मरीजों के इलाज से उचटे मन की लेंगी थाह

Anchalik News - पिछली भाजपा सरकार ने किडनी पीड़ित गांव सुपेबेड़ा में स्थानीय जरूरतों को मजबूत करने पर पूरा ध्यान लगा दिया लगा दिया...

Oct 22, 2019, 06:55 AM IST
पिछली भाजपा सरकार ने किडनी पीड़ित गांव सुपेबेड़ा में स्थानीय जरूरतों को मजबूत करने पर पूरा ध्यान लगा दिया लगा दिया था पर पीड़ितों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई थी। इस अधूरी सुविधा से बिदके मरीज अब भी सरकारी इलाज से कतरा रहे हैं। उनके मन में इलाज व मिलने वाली सुविधाओं के प्रति विश्वास जगाना वर्तमान कांग्रेस सरकार की पहली प्राथमिकता है। मंगलवार को राज्यपाल अनसुइया उइके अपने सुपेबेड़ा प्रवास के दौरान मरीजों के मन में सरकारी इलाज के प्रति उनकी बेरुखी को जानने की कोशिश चौपाल लगाकर करेंगी।

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने 8 माह के अंतराल में दो बार सुपेबेड़ा आकर मरीजों से राजधानी पहुंचने की अपील की थी। सरकार की बार-बार अपील के बाद पीड़ित नहीं राजधानी गए तो एम्स की पूरी टीम सुपेबेड़ा पहुंच गई पर इस शिविर में भी उपचार कराने वाले मरीज नहीं के बराबर पहुंचे। कारण जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि पिछली सरकार में इलाज के दौरान सुविधा के दावे जो किए गए थे, पूरे नहीं किए गए।

  

6 मरीज डीकेएस से भाग अाए थे, न दवा मिली न परिजन को भोजन

डीकेएस के तत्कालीन प्रमुख डॉ. पुनीत गुप्ता ने सुपेबेड़ा पहुंचकर कहा था कि डीकेएस में अलग से सुपेबेड़ा वार्ड बनाकर मरीजों का बेहतर व निशुल्क उपचार किया जाएगा। उनके दावे पर भरोसा कर 9 किडनी पीड़ित डायलिसिस कराने डीकेएस पहुंचे लेकिन वहां उन्हें दावे के मुताबिक सुविधा नहीं मिली।

पीड़ितों को 3-3 हजार के महंगे इंजेक्शन बाजार से खरीदने पड़े, मरीजों के साथ गए लोगों को भोजन तक नहीं मिल रहा था। आधी रात को वहां से भागकर आए 6 मरीजों में से एक पूरनधर सिन्हा समेत अन्य ने ये बातें बताई थीं। उस समय से मरीजों के दिमाग में असुविधाओं का दर्द घर कर गया है। नतीजा ये है कि अब तक मरीज वहां जाने से कतरा रहे हैं। 17 दिसंबर 2018 के बाद से सुपेबेड़ा के केवल 7 पीड़ित ही राजधानी पहुंचे हैं, इनमें से भी केवल एक मरीज लालबन्धु छेत्रपाल डायलिसिस करवा रहा है।

गांव में शहनाई बजना भी बंद, एक शादी हुई उसमें भी पानी साथ लाए बाराती

भास्कर ने सबसे पहले 6 जुलाई 2017 को किडनी पीड़ितों की मौत को प्रकाश में लाया था। लगातार मौत से सामाजिक दुष्प्रभाव को फोकस करते हुए भास्कर ने बताया था कि यहां शहनाई बजना बंद हो चुकी है क्योंकि किडनी पीड़ित गांव होने के कारण बेटों को बहुएं नही मिल रही थीं जबकि 30 से भी ज्यादा जवान बेटियों की डोली भी नही उठ रही है। इस बीच इस साल किडनी पीड़ित लालबंधु क्षेत्रपाल की बेटी की शादी जरूर 30 सितंबर को हुई पर बाराती पीने का बोतल बंद पानी अपने साथ लेकर आए थे। बताना जरूरी है कि शादी की सीजन में हर साल यहां 25-30 शादियां हो रहीं थी जो घटकर अब 4-5 तक रह गई हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने अपनी पानी की जांच में कैडमियम व क्रोमियम जैसे हैवी मेटल की पुष्टि की थी। भास्कर ने बताया था कि इस रिपोर्ट को दबा दिया गया। हैवी मेटल से बचाने उपाय के बजाए आयरन, अार्सेनिक व फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाकर जिम्मेदारी से बच गई थी तत्कालीन भाजपा सरकार।

ये हैं कड़वे सच के गवाह

मेकाहारा रायपुर में सुपेबेड़ा वार्ड बनाकर बेहतर सुविधा देने का तत्कालीन सरकार के वायदा करने के बाद जनवरी 2018 में सुपेबेड़ा से ये 9 किडनी पीड़ित उपचार के लिए राजधानी गए थे लेकिन वादे के विपरीत मिले व्यवहार से तंग आकर तीसरे दिन इनमें से 6 मरीज आधी रात भागकर वापस आ गए थे। इन्हीं के बताए कड़वे अनुभव के बाद पीड़ित अब दोबारा सरकारी इलाज के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।

मौत के सरकारी आंकड़ों में 68 नाम, गैर सरकारी 113

सीएचसी द्वारा किडनी पीड़ित मृतकों की तैयार सूची के मुताबिक 2008 में 1, 2009 में 7, 2010 में 4, 2011 में 3, 2012 में 5, 2013 में 6, 2014 में 9, 2015 में 8, 2016 में 6, 2017 में 9, 2018 में 8 एवं 2019 में 2 किडनी पीड़ितों की मौत बताई गई है, जबकि ग्रामीणों के मुताबिक अब तक 113 लोगों की मौत इस बीमारी से हुई है।

अब तक वर्तमान कांग्रेस सरकार की व्यवस्था

जांच व इलाज के लिए एम्स को जिम्मा दिया, गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने के अलावा विशेषज्ञ डॉ. जयप्रकाश पटेल का पदस्थापना आदेश जारी किया गया पर डॉ. पटेल ने अब तक यहां एक दिन भी नहीं बिताया है। वे एम्स की टीम के साथ भर नजर आए थे। तेल नदी से पानी लाने की वृहद परियोजना, सुपेबेड़ा पहुंच मार्ग पर तेलनदी के सेनमुड़ा घाट पर अधूरी पड़ी योजना को दोबारा मंजूरी दी गई है। सुपेबेड़ा के अलावा पास के 9 गांवों में जलप्रदाय की वृहद योजना के लिए 8 करोड़ रुपए से ज्यादा का प्रस्ताव भेजा गया है,जो विचाराधीन है।

पेज 18 पर... 100 से ज्यादा किडनी पीड़ितों ने...

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