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वुमंस को सेनेटरी पैड बनाने की ट्रेनिंग दे बनाया आत्मनिर्भर

एक वर्ष पहले
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ये कहानी है जया द्विवेदी की। इंश्योरेंस कंपनी में लाखों की सैलरी में काम कर रही जया 2017 से बस्तर, नारायणपुर सहित इंटीरियर इलाकों की महिलाओं को सेल्फ डिपेंड बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। लगभग
20 साल इंश्योरेंस सेक्टर में सेवाएं देने के बाद 47 साल की जया ने 2017 में समर्थ जन कल्याण समिति शुरू की जया ने बताया, मैं जब भी बस्तर जैसे क्षेत्रों में जाकर वहां की महिलाओं की स्थिति देखती तो दुख होता था।

आखिरकार सब छोड़कर उनकी मदद करने और उन्हें सेल्फ डिपेंड बनाने का फैसला किया। जिन महिलाओं की दुनिया पहले अपने घर और खेत
तक सिमटी हुई थी अब वे अपने क्षेत्र में रहकर सेनेटरी नैपिकन बनाती हैं। उनकी संस्था से जुड़ी 50 से ज्यादा युवतियां हर महीने 15 हजार रुपए तक कमा रही हैं। यही नहीं, संस्था से जुड़ी युवतियां और महिलाएं घर-घर जाकर लोगों को जैविक
खेती करने और स्वच्छता का ख्याल रखने का संदेश भी देती हैं। जया के कामों से प्रभावित होकर आदिवासी और ग्रामीण युवतियां उन्हें मैडम मां कहकर संबोधित करती हैं।

बांट चुकीं हैं 1 लाख से ज्यादा सेनेटरी नैपकिन

जया की संस्था महिलाओं को हाईजीन का ख्याल रखने के लिए भी प्रेरित कर रही है। उन्होंने बताया, हम अब तक कई जिलों की ग्रामीण महिलाओं को 1 लाख से ज्यादा सेनेटरी नैपकिन बांट चुके हैं। महिलाओं को पैड यूज न करने के नुकसान और यूज करने के फायदे भी बताते हैं। यही नहीं, संस्था ग्रामीणों के बच्चों के लिए शिविर भी लगाती हैं जहां उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करने और महिलाओं का सम्मान करने की सीख दी जाती है।

युवतियों को सेनेटरी नैपकिन बनाने की ट्रेनिंग देतीं जया द्विवेदी(बीच में)।
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