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राहस नाच की परंपरा को निभा रहे ग्रामीण

एक वर्ष पहले
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पाण्डुका| होली पर्व पर राहस नाच की परंपरा आज भी पांडुका क्षेत्र में कायम है। इस संस्कृति को लुप्त होने से बचाने के लिए शहरों और गांवों में फाग राहस गीत व नृत्य प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है। जिले के सिरजन लोक कला साहित्य संस्था ने आग्रह किया है कि छत्तीसगढ़ की कला व संस्कृति काफी समृद्ध है। इसे बचाए रखना हम सबका दायित्व है। इस दौरान संस्था के संयोजक गौकरण मानिकपुरी, डॉ. लालजी सिन्हा, राजकुमार यादव, खेम बाई निषाद, तुलसी बाई मानिकपुरी, अरूण कुमार समेत अन्य मौजूद थे।
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