बचपन में जिसने माता-पिता की नहीं सुनी वह कभी नहीं बन सकता नेक इंसान: हेमंत मुनि

Balod News - समता भवन में पर्यूषण पर्व के पहले दिन आचार्य रामेश के शिष्य हेमंत मुनि मसा ने कहा कि प्रभु महावीर ने जीवों के लिए...

Bhaskar News Network

Aug 29, 2019, 06:35 AM IST
Balod News - chhattisgarh news a child who did not listen to his parents could never become a good man hemant muni
समता भवन में पर्यूषण पर्व के पहले दिन आचार्य रामेश के शिष्य हेमंत मुनि मसा ने कहा कि प्रभु महावीर ने जीवों के लिए संदेश देते हुए कहा कि सुनने से यह जीव जानता है कि पाप क्या है, पुण्य क्या है। जिस व्यक्ति को सुनने का मौका नहीं मिलता वह दुनियादारी से अनभिज्ञ रहता है। जीवन का अवलोकन करें, जीवन का जितना हिस्सा अच्छाइयों में बीता है उसका उसका सार हिस्सा सुनना है, जो व्यक्ति सुनने की क्षमता नहीं रख पाता वह अभागा रहता है। बचपन में जिसने माता-पिता की नहीं सुनी वह नेक इंसान नहीं बन सकते। सुनकर उसको आचरण में लाना ही सार्थक होगा।

मुनिश्री ने कहा कि यदि हमने माता-पिता, गुरुओं का जो सुना है उसे सही ढंग से आचरण में लाएं तो हमारा कद बढ़ता चला जाएगा। वह सुनना भी महत्वपूर्ण हो जाएगा। सुने बिना हम निर्णय नहीं कर पाएंगे। सम्यक ज्ञान सुने बिना आने वाला नहीं है। आचरण में लाएंगे तो निश्चित ही हमारा ज्ञान निरंतर बढ़ता चला जाएगा।ज्ञान का सार है तुम्हारा आचरण, बदलाव जो दुर्गति में जा रही थी। ज्ञान आएगा तब दुर्गति से सुगति की ओर चला जाएगा। जिस व्यक्ति को ज्ञान नहीं आएगा वह अशुभ को ही शुभ समझ पाता है। दुनिया में भला चाहने वाला कोई नहीं है। व्यक्ति यह जान ले कि धर्म में ही उसका भला है। यदि गुरु का साया आपके सिर पर हो तो आपका कोई भी बाल बांका नहीं कर सकता। गुरु वचनों के प्रति निरंतर श्रद्धा भाव से जीवन में उतारे और जो व्यक्ति गुरु की मानता है। उसके जीवन में उत्क्रांति आती है। व्यक्ति के भीतर में अभिमान का साया रहेगा तो ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता।

प्रवचन: जीवों के िलए दिए प्रभु महावीर के संदेश को सुनाया

बालोद. बरखा सांखला की तपस्या का अनुमोदना महिला मंडल ने किया।

बरखा ने 29 उपवास तपस्या का पचकान लिया

बरखा सांखला ने मासखमन महज एक कदम दूर 29 का पचकान ग्रहण किया। निर्मला गोलछा ने 15, रतनलाल नाहटा 17, यशस्वी ढेलडिया, इंदिरा बाफना, श्रद्धा भंसाली 7, रुचि गोलछा 5, हरीश सांखला ने 4 का पचकान मुनिश्री से ग्रहण किया। पल्लवी बाफना, यश बुरड़, प्रदीप चाेपड़ा व समता महिला मंडल व समता बालिका मंडल ने गीत की प्रस्तुति दी।

वात्सल्य सूख जाएगा तो दिल दुखेगा: मुनिश्री ने कहा कि माता-पिता का कर्ज चुकाना बहुत ही मुश्किल है। हम उपकारी के प्रति कृतज्ञता का पालन कर दायित्व निभाए। शिष्य के कारण यदि गुरु का चेहरा मुरझा जाए तो वह महापापी है। इसी प्रकार पुत्र को माता-पिता के प्रति अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। आज देखते हैं प्राय: मित्र स्वार्थी प्रवृत्ति के होते हैं। आप अपने जीवन में बतलाइए किसी मित्र का क्या उपकार रहा, आपके जीवन में आपसी संबंध रहे। जहां पर संबंधों का पालन नहीं होता वहां से जुड़ना नहीं। वात्सल्य सूख जाएगा तो दिल दुखेगा, जो अपेक्षा रखते हैं उसकी अपेक्षा पर खरा उतरने प्रयास करें।

मानव जीवन संबंधांे से घिरा है: संत हर्षित मुनि

धीरज मुनि मसा ने कहा कि जो व्यक्ति निर्णायक होता है, वह एक ही पल में निर्णय करता है। पूर्वाचार्यों का बहुत उपकार है। आज हम धर्म की शुद्ध आचरण व आराधना कर पा रहे हैं। अंगारों को सुरक्षित रखने का काम राख करती हैं। संत हर्षित मुनि मसा ने कहा कि मानव जीवन अनेक संबंधों से घिरा हुआ है। प्रत्येक व्यक्ति एक नहीं कई पात्रों को रोजाना जीवन में निभा रहा है। तीन घंटे के फिल्म चित्रांकन में नायक दो-तीन पात्रों से ज्यादा अभिनय नहीं कर पाता।

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