अमावस्या या पितृ पक्ष पूर्वजों के श्राद्ध का सबसे उत्तम समय

Balod News - 14 सितंबर से पितृ पक्ष श्राद्ध शुरू हो जाएगा जो कि 28 सितंबर तक चलेगा। पितृ पक्ष पितरों को याद करने का समय माना गया है।...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:41 AM IST
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14 सितंबर से पितृ पक्ष श्राद्ध शुरू हो जाएगा जो कि 28 सितंबर तक चलेगा। पितृ पक्ष पितरों को याद करने का समय माना गया है। पितर दो प्रकार के होते हैं एक दिव्य पितर और दूसरे पूर्वज पितर।

दिव्य पितर ब्रह्मा के पुत्र मनु से उत्पन्न हुए ऋषि हैं। पितरों में सबसे प्रमुख अर्यमा हैं, जिनके बारे में गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि पितरों में प्रधान अर्यमा वे स्वयं हैं। पंडित नारायण प्रसाद ने बताया कि अमावस्या या पितृपक्ष का समय अपने मृत पूर्वजों का श्राद्ध करने का सबसे उत्तम समय माना गया है। पिंड शब्द का अर्थ किसी वस्तु का गोलाकार रूप होता है। प्रतीकात्मक रूप में शरीर को भी पिंड ही माना जाता है।

पिंडदान के लिए पके हुए चावल, दूध और तिल को मिलाकर एक पिंड का रूप दिया जाता है। फिर उसे पितरों को अर्पित किया जाता है। पितृपक्ष के दौरान मृत व्यक्ति अपने पुत्र और पौत्र से पिंडदान की आशा रखते हैं। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष के 15 दिन पितृ पक्ष कहलाते हैं।

पितृ ऋण से मुक्ति पाने का यह श्रेष्ठ समय होता है। शास्त्रों के अनुसार पूर्वजों को याद करके किया जाने वाला पिंडदान उन तक सीधे पहुंचता है, और उन्हें स्वर्गलोक लेकर जाता है। इसलिए इसका अपना ही महत्व है।

पिंडदान करते समय यह रखें ध्यान

पिंडदान में दूध, शहद, तुलसी पत्ता और तिल जरूरी होता है। पिंडदान में सोना, चांदी, तांबे, कांसे या पत्तल के पात्र का ही प्रयोग करना चाहिए। कुत्ता, कौवा और गायों को पितृपक्ष के दौरान भोजन जरूर कराएं। ऐसी मान्यता है कि कुत्ता और कौवा पितरों के करीब होते हैं और गाय उन्हें वैतरणी पार कराती हैं। श्राद्ध के लिए गया, बद्रीनाथ, हरिद्वार, गंगा सागर, पुष्कर, जगन्नाथपुरी, काशी और कुरुक्षेत्र को सबसे उत्तम स्थान माना जाता है।

ये है पितृपक्ष में श्राद्ध तिथि

शनिवार को प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध, 15 सितंबर रविवार द्वितीया तिथि का श्राद्ध, 17 सितंबर मंगलवार तृतीया तिथि का श्राद्ध, 18 सितंबर बुधवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध, 19 सितंबर गुरुवार को पंचमी तिथि का श्राद्ध, 20 सितंबर शुक्रवार को षष्ठी तिथि का श्राद्ध, 21 सितंबर शनिवार को सप्तमी तिथि का श्राद्ध, 22 सितंबर रविवार को अष्टमी तिथि का श्राद्ध, 23 सितंबर सोमवार को नवमी तिथि का श्राद्ध , 24 सितंबर मंगलवार को दशमी तिथि का श्राद्ध, 25 बुधवार को एकादशी व द्वादशी तिथि/सन्यासियों का श्राद्ध 26 सितंबर गुरुवार को त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध, 27 सितंबर शुक्रवार को चतुर्दशी का श्राद्ध, 28 शनिवार को अमावस्या व सर्व पितृ श्राद्ध। लोगों ने इसके लिए तैयारी की है।

ऐसे करें पिंडदान: सबसे पहले पिंडदान के समय मृतक के घरवाले जौ या चावल के आटे में दूध और तिल मिलाकर गूथ लें और उसका गोला बना लें। दोनों हाथों को एकसाथ मिलाकर उस मृत व्यक्ति का नाम लेकर तृप्यन्ताम कहते हुये हाथ में लिए हुए जल को दूसरे खाली पात्र में छोड़ दें। श्राद्ध के बाद ब्राह्मण को भोजन कराकर यथाशक्ति दान दें।

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